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आम आदमी आज भी मूल्य और व्यवस्था के बीच करता है जीवन यापन
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बरेली। संजय कमेटी हॉल में चल रहे नाटय समारोह में दर्शकों का उत्साह अपनी चरम सीमा पर है। यह मंचित किए जा रहे मुंशी प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित नाटक दर्शको को खूब भा रहा है। बुजुर्गो से लेकर बच्चे तक इसमें रुचि ले रहे हैं।
गांव के आम आदमी के जीवन का जो चित्रण प्रेमचंद ने किया है वह आज भी प्रासंगिक है सामाजिक और व्यक्तिगत सीमा में बंधा आम आदमी आज भी मूल्य और व्यवस्था के मध्य अपना जीवन यापन कर रहा है। प्रेमचंद की दृष्टि से देखने पर आज भी समाज वही है मात्र परिस्थितियां बदल गई हैं। इन्हीं परिस्थितियों को समझाने के लिए कलाकारों ने नमक का दारोगा के पात्र दारोगा मुंशी वंशीधर के चरित्र के जरिए यह समझाने का प्रयास किया गया है कि वक्त चाहे जो हो ईमानदार अधिकारी अपने कार्यों से अपनी छाप छोड़ते हैं। किसी के दिए गए लालच के आगे नहीं झुकते। नमक के व्यापारी अलोपीदीन जैसे लोग आज भी हैं जो अपने रुपये और रसूख के बदले कानून से खिलवाड़ करते हैं।
इस मौके पर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह उनकी पत्नी नीता सिंह, एडीएम (ई) आरएस द्विवेदी, रणजीत पंचाले, आशीष गुप्ता, वरिष्ठ रंगकर्मी जेसी पालीवाल, दानिश जमाल, मोहित सिंह, दिनेश्वर दयाल सक्सेना आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के संयोजक कुलभूषण शर्मा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। सह संयोजक समयुन खान ने स्वागत किया। संचालन कविता अरोडा ने किया। मीडिया प्रभारी गौरव वर्मा ने बताया कि शनिवार को मानव सेवा योग संसाधन की ओर से बूढ़ी काकी नाटक का मंचन सायं 7 बजे से किया जाएगा।
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गांव के आम आदमी के जीवन का जो चित्रण प्रेमचंद ने किया है वह आज भी प्रासंगिक है सामाजिक और व्यक्तिगत सीमा में बंधा आम आदमी आज भी मूल्य और व्यवस्था के मध्य अपना जीवन यापन कर रहा है। प्रेमचंद की दृष्टि से देखने पर आज भी समाज वही है मात्र परिस्थितियां बदल गई हैं। इन्हीं परिस्थितियों को समझाने के लिए कलाकारों ने नमक का दारोगा के पात्र दारोगा मुंशी वंशीधर के चरित्र के जरिए यह समझाने का प्रयास किया गया है कि वक्त चाहे जो हो ईमानदार अधिकारी अपने कार्यों से अपनी छाप छोड़ते हैं। किसी के दिए गए लालच के आगे नहीं झुकते। नमक के व्यापारी अलोपीदीन जैसे लोग आज भी हैं जो अपने रुपये और रसूख के बदले कानून से खिलवाड़ करते हैं।
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इस मौके पर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह उनकी पत्नी नीता सिंह, एडीएम (ई) आरएस द्विवेदी, रणजीत पंचाले, आशीष गुप्ता, वरिष्ठ रंगकर्मी जेसी पालीवाल, दानिश जमाल, मोहित सिंह, दिनेश्वर दयाल सक्सेना आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के संयोजक कुलभूषण शर्मा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। सह संयोजक समयुन खान ने स्वागत किया। संचालन कविता अरोडा ने किया। मीडिया प्रभारी गौरव वर्मा ने बताया कि शनिवार को मानव सेवा योग संसाधन की ओर से बूढ़ी काकी नाटक का मंचन सायं 7 बजे से किया जाएगा।
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