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देवी मंदिरों में रही भीड़, सुबह से ही लगते रहे मां के जयकारे
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पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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साहूकारा के नौ देवी मंदिर की गलियां रहीं सूनी, सामाजिक दूरी से भक्तों को दिया गया मंदिरों में प्रवेश
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बरेली। शारदीय नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में भक्तों की सुबह से ही भीड़ लगी रही। घंटे-घड़ियालों की आवाज से आसपास का परिसर गूंज उठा। मंदिर परिसर में भक्तों को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए प्रवेश दिया गया। किसी भी भक्त ने प्रसाद नहीं चढ़ाया। केवल देवी के दर्शन करके ही लौटा दिए गए। महिलाओं ने मंदिरों में छंद भी गाए, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना के बाद ब्रह्ममुहूर्त से ही देवी के दर्शन कर पूजा अर्चना शुरू कर दी, जिससे मंदिर के आसपास का वातावरण घंटे-घड़ियालों और माता के जयकारों से भक्तिमय हो गया। पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना कर आरती उतारी।
साहूकारा स्थित नौ देवी मंदिर की गलियां इस बार सन्नाटे में दिखीं। यहां बेहद कम संख्या में भक्तों को मंदिर परिसर में प्रवेश दिया गया। मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं के हाथ सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सैनिटाइज कराए गए। साथ ही उनका तापमान भी जांचा गया। फूल, प्रसाद न चढ़ने से बाहर फूल, प्रसाद आदि के स्टाल भी खाली रहे। कुछ भक्त घर से प्रसाद लेकर पहुंचे थे, जिसे सेवादारों ने एक ड्रम में रखवा दिया। मंदिर के आसपास की रेलिंग को भी किसी को नहीं छूने दिया गया।
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कालीबाड़ी स्थित मां काली का मंदिर आज खोल दिया गया, लेकिन यहां भी भक्तों की भीड़ नहीं जुटने दी गई। भक्त मंदिर के गेट से ही माता के दर्शन करते देखे गए। यहां गेट पर ही पुजारी जी ने माता को प्रसाद आदि चढ़ाया। किसी भी भक्त की चुनरी, नारियल और अन्य चीजें माता को सीधे नहीं चढ़ाई गईं।
नेकपुर स्थित चौरासी घंटा मंदिर में सुबह पांच बजे से ही भक्त उमड़ने लगे थे। मंदिर परिसर में केवल पांच लोगों को ही पूजा करने की अनुमति दी गई थी। इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से यहां महिलाओं को छंद भी नहीं गाने दिए गए।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना के बाद ब्रह्ममुहूर्त से ही देवी के दर्शन कर पूजा अर्चना शुरू कर दी, जिससे मंदिर के आसपास का वातावरण घंटे-घड़ियालों और माता के जयकारों से भक्तिमय हो गया। पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना कर आरती उतारी।
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साहूकारा स्थित नौ देवी मंदिर की गलियां इस बार सन्नाटे में दिखीं। यहां बेहद कम संख्या में भक्तों को मंदिर परिसर में प्रवेश दिया गया। मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं के हाथ सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सैनिटाइज कराए गए। साथ ही उनका तापमान भी जांचा गया। फूल, प्रसाद न चढ़ने से बाहर फूल, प्रसाद आदि के स्टाल भी खाली रहे। कुछ भक्त घर से प्रसाद लेकर पहुंचे थे, जिसे सेवादारों ने एक ड्रम में रखवा दिया। मंदिर के आसपास की रेलिंग को भी किसी को नहीं छूने दिया गया।
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कालीबाड़ी स्थित मां काली का मंदिर आज खोल दिया गया, लेकिन यहां भी भक्तों की भीड़ नहीं जुटने दी गई। भक्त मंदिर के गेट से ही माता के दर्शन करते देखे गए। यहां गेट पर ही पुजारी जी ने माता को प्रसाद आदि चढ़ाया। किसी भी भक्त की चुनरी, नारियल और अन्य चीजें माता को सीधे नहीं चढ़ाई गईं।
नेकपुर स्थित चौरासी घंटा मंदिर में सुबह पांच बजे से ही भक्त उमड़ने लगे थे। मंदिर परिसर में केवल पांच लोगों को ही पूजा करने की अनुमति दी गई थी। इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से यहां महिलाओं को छंद भी नहीं गाने दिए गए।