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अरबों की सरकारी जमीन ठिकाने लगाने वाले दो गिरफ्तार 

Tue, 08 May 2018 06:22 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Tue, 08 May 2018 06:22 PM IST
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two arrested in land scam
arrested in land scam
अरबों रुपये कीमत की जमींदारी की जमीन ठिकाने लगाने का खेल कई साल पहले ही शुरू हो गया था। फरीदपुर और फतेहगंज पूर्वी में स्थित इस हजारों बीघा जमीन के अभिलेखों में जालसाजी कराने के पीछे शहर के कुछ रईसों का हाथ माना जा रहा है। दरअसल यह सारी प्लानिंग इस बात को ध्यान में रखकर की गई थी कि फरीदपुर में हाईवे के आसपास की जमींदारी से मुक्त यह जमीन कुछ बरसों बाद सोना उगलेगी। माफिया एक तरफ जमीनों को कब्जाने के खेल में मशगूल रहे और दूसरी तरफ दोनों कस्बों में इंडस्ट्रियल हब बनाने तैयारियों में भी अपना जोर लगाते रहे।
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बरेली-सीतापुर फोरलेन हाईवे पर फरीदपुर बाईपास बनने की सुगबुगाहट पहले ही शुरू हो गई थी। वर्ष 2011 में सीतापुर फोरलेन मंजूर होने से शहर के कुछ बड़े रईसों की निगाहें फरीदपुर से फतेहगंज पूर्वी तक जमींदारी की अरबों रुपये की कीमत की जमीन पर लग गईं थीं। क्योंकि शहर के रईस जानते थे कि सीतापुर फोरलेन और फरीदपुर बाईपास बनने के बाद अभिलेख खुर्द-बुर्द कर कौड़ियों के भाव ली जाने वाली जमीन इंडस्ट्रियल हब बनने के बाद ‘सोना’ उगलेगी। इसके चलते इन रईसों ने फरीदपुर से लेकर फतेहगंज पूर्वी तक फोरलेन के किनारे कलक्ट्रेट कर्मचारियों की सांठगांठ से जमीनें छुटभइयों के नाम से खरीद लीं। फिर स्वयं ही बेरोजगारी दूर करने और बरेली के विकास की दुहाई देकर इस एरिया को इंडस्ट्रियल हब बनाने की तैयारी भी शुरू करा दी। फरीदपुर तहसील में राजस्व रिकार्ड में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों से सांठगांठ की गई। इसके चलते राजस्व रिकार्ड की सुरक्षा करने वाले तीन कर्मचारियों ने पहले फरीदपुर तहसील में रहकर जमीनों के अभिलेख में पुराने नाम खुर्द बुर्द कर नए नाम दर्ज करा दिए। 
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इसके बाद एक सोची समझी साजिश के तहत इन कर्मचारियों की कलक्ट्रेट के राजस्व रिकार्ड में ड्यूटी लगवाई गई तो यह यहां भी सरकारी ड्यूटी न निभाकर रईसों के लिए अभिलेख खुर्द बुर्द करने का काम निपटाते रहे। दशकों से जमीनों के अभिलेखों में हेरफेर कर हजारों बीघा जमीन ठिकाने लगाने का खेल चलता रहा। मगर, खुलासा अक्टूबर 2017 में हो पाया। एसीएम के रिपोर्ट दर्ज कराने के आठ माह बाद भी पुलिस ने महज मोहरों को पकड़कर केस को निपटाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं, जबकि इस खेल में पर्दे के पीछे से अंजाम देने वाले माफिया अभी भी पुलिस की पकड़ से बहुत दूर हैं।   
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सात आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर 
फरीदपुर-फतेहगंज पूर्वी में जमींदारी की 630 बीघा जमीन के अभिलेख खुर्द बुर्द करने के मामले में तत्कालीन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट अरुणमणि त्रिपाठी ने नौ आरोपियों के खिलाफ 13 अक्टूबर 2017 को कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। इनमें मुख्य आरोपी वाहिद बेग पुत्र आबिद बेग, ताहिर बेग, फैयाज बेग, मोहम्मद बेग, आसिफ बेग सभी निवासी फतेहगंज पूर्वी तहसील फरीदपुर जमींदारी की जमीन के राजस्व रिकार्ड में सुरक्षित रखे अभिलेखों में दर्ज विभिन्न नामों को फरीदपुर तहसील और कलक्ट्रेट कर्मचारियों की सांठ-गांठ से खुरचकर अपने पिता आबिद बेग के नाम दर्ज कराते थे। इस गैंग में जाहिद बेग और शाहिद बेग पुत्र हामिद बेग भी शामिल थे। इनकी सांठगांठ कलक्ट्रेट में राजस्व रिकार्ड में ड्यूटी करने वाले कर्मचारी विनोद कुमार सक्सेना, शैली जौहरी और ऊषा जयंत से थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज होने के आठ महीने बाद मात्र दो आरोपियों को पकड़ा। सात आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। 
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