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त्रिशूल की सुरक्षा के मुद्दे पर बीडीए और नगर निगम फंसे
बरेली
Updated Mon, 25 Jan 2016 01:17 AM IST
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बरेली। वायुसेना के त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा में लापरवाह नगर निगम और बरेली विकास प्राधिकरण के अफसरों के खिलाफ विजिलेंस जांच बैठा दी गई है। गृह विभाग ने विजिलेंस टीम से जांच के लिए 15 फरवरी तक दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों का गोपनीय ब्योरा मांगा गया है। उसी के बाद अगले फे ज में तय होगा कि कौन कितना दोषी है। उसी आधार पर स्पष्टीकरण लेने के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करते हुए दंड निर्धारित होगा। यह फैसला वायुसेना मुख्यालय की शिकायत के बाद शासन के गृह विभाग के स्तर पर लिया गया है।
विजिलेंस जांच में उन अफसरों का ब्योरा तलब किया जा रहा है जो कि 1998 से लेकर अब तक तैनात रहे हैं। इनमें कौन - कौन जिम्मेदार है। हालांकि इस पड़ताल में पारदर्शिता मुश्किल नजर आ रही है, क्योंकि नगर निगम और बीडीए के अधिकारियों ने फंसने के डर से अपना अधिकांश रिकार्ड गायब कर दिया है। शासन ने नगर निगम और विकास प्राधिकरण को पूरी तरह से दोषी माना है। प्रदेश के गृह विभाग का मानना है कि इन दोनों विभागों के अधिकारियों की मिली भगत से ही प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण होते रहे हैं। बीडीए के अभियंताओं की मिली भगत से त्रिशूल के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण होते रहे हैं। इसकी एवज में उन्होंने सुविधा शुल्क भी लिया, इतना ही नहीं प्रतिबंधित क्षेत्र में काफी मकानों के नक्शे भी पास कर दिए। दूसरी ओर नगर निगम की जिम्मेदारी भी थी कि वह अवैध मकान और कब्जों को ध्वस्त कराता लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इतना ही नहीं अधिकारियों ने अपने संरक्षण में अवैध मकान बनवाकर हाउस और वाटर टैक्स तक लगा दिया। जिससे कि इन मकानों को अवैध करार दिया जा सके।
तीन श्रेणी में मांगी है रिपोर्ट
1-मृतक दोषी कर्मचारी और अधिकारी
2- रिटायर दोषी कर्मचारी - अधिकारियों का पता सहित ब्योरा
3-अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती वाले जिलों के साथ ब्योरा
गायब हो गईं फाइलें
बरेली। नगर निगम और विकास प्राधिकरण में 1998 से लेकर अब तक के अवैध निर्माण से संबंधित फाइलें गायब कर दी गईं हैं। ज्यादातर फाइलों का पता नहीं चल रहा है। जिम्मेदार लिपिक और अभियंताओं का कहना है कि पत्रावलियां काफी पुरानी हैं। फिर भी रिकार्ड निकाल रहे हैं, हो सकता है कि दस साल बाद नष्ट होने वाले रिकार्ड के साथ कुछ पत्रावलियां नष्ट कर दी गईं हों। इन्हीं कयासों के चलते कमिश्नर के निर्देश के क्रम में दोनों विभाग रिकार्ड खंगाल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर तहसील सदर ने अधिकांश जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। तहसीलदार सदर खालिद अंजुम का कहना है कि कि त्रिशूल के आसपास का क्षेत्र 1984 के बाद तहसील से हटकर नगर निगम में शामिल हो गया। इसीलिए इसका रिकार्ड तथा ज्यादा जिम्मेदारी नगर निगम और विकास प्राधिकरण की है। हालांकि तहसील सदर में खसरा खतौनी आदि रिकार्ड निकाला जा रहा है, जिसे जांच के लिए गठित की गई टीम को भिजवा दिया जाएगा।
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विजिलेंस जांच में उन अफसरों का ब्योरा तलब किया जा रहा है जो कि 1998 से लेकर अब तक तैनात रहे हैं। इनमें कौन - कौन जिम्मेदार है। हालांकि इस पड़ताल में पारदर्शिता मुश्किल नजर आ रही है, क्योंकि नगर निगम और बीडीए के अधिकारियों ने फंसने के डर से अपना अधिकांश रिकार्ड गायब कर दिया है। शासन ने नगर निगम और विकास प्राधिकरण को पूरी तरह से दोषी माना है। प्रदेश के गृह विभाग का मानना है कि इन दोनों विभागों के अधिकारियों की मिली भगत से ही प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण होते रहे हैं। बीडीए के अभियंताओं की मिली भगत से त्रिशूल के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण होते रहे हैं। इसकी एवज में उन्होंने सुविधा शुल्क भी लिया, इतना ही नहीं प्रतिबंधित क्षेत्र में काफी मकानों के नक्शे भी पास कर दिए। दूसरी ओर नगर निगम की जिम्मेदारी भी थी कि वह अवैध मकान और कब्जों को ध्वस्त कराता लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इतना ही नहीं अधिकारियों ने अपने संरक्षण में अवैध मकान बनवाकर हाउस और वाटर टैक्स तक लगा दिया। जिससे कि इन मकानों को अवैध करार दिया जा सके।
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तीन श्रेणी में मांगी है रिपोर्ट
1-मृतक दोषी कर्मचारी और अधिकारी
2- रिटायर दोषी कर्मचारी - अधिकारियों का पता सहित ब्योरा
3-अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती वाले जिलों के साथ ब्योरा
गायब हो गईं फाइलें
बरेली। नगर निगम और विकास प्राधिकरण में 1998 से लेकर अब तक के अवैध निर्माण से संबंधित फाइलें गायब कर दी गईं हैं। ज्यादातर फाइलों का पता नहीं चल रहा है। जिम्मेदार लिपिक और अभियंताओं का कहना है कि पत्रावलियां काफी पुरानी हैं। फिर भी रिकार्ड निकाल रहे हैं, हो सकता है कि दस साल बाद नष्ट होने वाले रिकार्ड के साथ कुछ पत्रावलियां नष्ट कर दी गईं हों। इन्हीं कयासों के चलते कमिश्नर के निर्देश के क्रम में दोनों विभाग रिकार्ड खंगाल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर तहसील सदर ने अधिकांश जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। तहसीलदार सदर खालिद अंजुम का कहना है कि कि त्रिशूल के आसपास का क्षेत्र 1984 के बाद तहसील से हटकर नगर निगम में शामिल हो गया। इसीलिए इसका रिकार्ड तथा ज्यादा जिम्मेदारी नगर निगम और विकास प्राधिकरण की है। हालांकि तहसील सदर में खसरा खतौनी आदि रिकार्ड निकाला जा रहा है, जिसे जांच के लिए गठित की गई टीम को भिजवा दिया जाएगा।
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