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दारू में यूरिया घोलने वालों को उम्रकैद
बरेली।
Updated Sat, 04 Feb 2017 01:08 AM IST
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Those life dissolving urea in wine
जहरीली शराब बनाकर बेचने वाले अक्सर पकड़े जाते हैं। इन पर मुकदमा भी चलता है पर अमूमन सख्त सजा नहीं मिल पाती है। लेकिन, शुक्रवार को ऐसे ही एक मामले में कोर्ट ने तीन लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाकर मिसाल पेश कर दी। यूरिया का इस्तेमाल कर शराब बनाने को कोर्ट ने काफी गंभीर माना। इसे लोगों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ मानते हुए अपर सत्र न्यायाधीश सतीश चंद्र द्विवेदी ने उम्रकैद के अलावा प्रत्येक को सात-सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई।
एडीजीसी फौजदारी जहां आरा के अनुसार आबकारी निरीक्षक रणविजय सिंह ने टीम के साथ मीरगंज क्षेत्र में 15 जुलाई, 2011 को शाम करीब चार बजे एक बाइक पर सवार तीन लोगों को पकड़ा था। इनके पास से दो केन में सौ लीटर स्प्रिट, पॉलिथीन में दो किलो यूरिया, नकली होलोग्राम युक्त सौ पौवे नकली शराब पकड़ी थी। पकड़े गए लोगों ने अपना नाम थाना मीरगंज के ग्राम सैंजना निवासी छत्रपाल, थाना फतेहगंज पश्चिमी के ग्राम मीरापुर निवासी वीरपाल और थाना किला के मोहल्ला चौधरी तालाब निवासी जगदीश बताया था। इन सभी पर विवेचना के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 व 272 व आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया। विचारण के दौरान पांच गवाह पेश कर अभियोजन ने नकली व घातक शराब रखने का आरोप सिद्ध कर दिया। धारा 467 व 468 कूट रचना का मामला सिद्ध नहीं हुआ। बता दें कि जहरीली शराब बनाने और इससे मौतों के मामले सामने आते ही रहते हैं, लेकिन या तो ये रफा-दफा हो जाते हैं फिर सख्त सजा नहीं हो पाती है। इस बार कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए यह धंधा करने वालों को कड़ा संदेश दिया है।
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एडीजीसी फौजदारी जहां आरा के अनुसार आबकारी निरीक्षक रणविजय सिंह ने टीम के साथ मीरगंज क्षेत्र में 15 जुलाई, 2011 को शाम करीब चार बजे एक बाइक पर सवार तीन लोगों को पकड़ा था। इनके पास से दो केन में सौ लीटर स्प्रिट, पॉलिथीन में दो किलो यूरिया, नकली होलोग्राम युक्त सौ पौवे नकली शराब पकड़ी थी। पकड़े गए लोगों ने अपना नाम थाना मीरगंज के ग्राम सैंजना निवासी छत्रपाल, थाना फतेहगंज पश्चिमी के ग्राम मीरापुर निवासी वीरपाल और थाना किला के मोहल्ला चौधरी तालाब निवासी जगदीश बताया था। इन सभी पर विवेचना के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 व 272 व आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया। विचारण के दौरान पांच गवाह पेश कर अभियोजन ने नकली व घातक शराब रखने का आरोप सिद्ध कर दिया। धारा 467 व 468 कूट रचना का मामला सिद्ध नहीं हुआ। बता दें कि जहरीली शराब बनाने और इससे मौतों के मामले सामने आते ही रहते हैं, लेकिन या तो ये रफा-दफा हो जाते हैं फिर सख्त सजा नहीं हो पाती है। इस बार कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए यह धंधा करने वालों को कड़ा संदेश दिया है।
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