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बेटे की हरकत से शर्मसार पिता ने जान दे दी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 04 Jul 2016 01:01 AM IST
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बेटे की गलत हरकत से परेशान होकर तनाव में आए पिता ने फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी। सूचना पर पहुंची पुलिस और फील्ड यूनिट ने शव फंदे से उतराकर घटना स्थल की जांच की। एक सप्ताह पहले बुजुर्ग का बड़ा बेटा मोहल्ले में ही रहने वाली महिला और उसकी 14 वर्षीय बेटी को लेकर कहीं चला गया है। उस पर अपहरण का मुकदमा दर्ज होने से पूरा परिवार घर छोड़कर कहीं चला गया है।
थाना सुभाषनगर की राजीव कालोनी की गली नंबर 13 में रहने वाले बाबूराम कश्यप राज मिस्त्री थे। 26 जून को बाबूराम का बड़ा बेटा संजय उर्फ संजू कश्यप मोहल्ले में ही रहने वाली एक महिला और उसकी 14 वर्षीय बेटी को लेकर फरार हो गया था। इस महिला के परिवार से बाबूराम के परिवार के बहुत अच्छे संबंध बताए जाते हैं। महिला संजू को राखी बांधती थी। महिला के पति ने सुभाषनगर थाने में संजू के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कराया। पुलिस की पूछताछ से डरे बाबूराम अपनी पत्नी और छोटे बेटे नन्नू सिंह संग अंडरग्राउंड हो गए थे। घर में सिर्फ बाबूराम की बूढ़ी मां चंद्रकली और तीन बकरियां मौजूद थीं। मोहल्ले वालों ने बताया कि तीन दिन पहलेे बाबूराम वापस आ गए, पर वह बेटे की हरकत की वजह से शर्मिंदगी में थे, किसी से बातचीत नहीं करते थे। बेटे की आत्महत्या से टूटी मां 80 वर्षीय चंद्रकली रोते हुए बताने लगी कि सुबह से बाबूराम घर नहीं आए थे। किस वक्त घर आकर बाबूराम कुंडे पर फंदा बनाकर लटक गए, उन्हें नहीं पता लगा। पड़ोस में रहने वाले बाबूराम के छोटे भाई हरदयाल उर्फ पप्पू ने भाई के अवसाद में आकर आत्महत्या करने की तहरीर पुलिस को दी।
पुलिस गंभीरता दिखाती तो शायद बाबूराम बच जाते
26 जून को केस दर्ज होने के बाद से अब तक सुभाषनगर पुलिस ने अगवा महिला और किशोरी को खोजने की कोई कोशिश नहीं की। संजू की लोकेशन के बाद में विवेचक को कोई जानकारी नहीं। विवेचक राजीव ने बताया कि पूरा घर फरार है, तीन दिन पहले बाबूराम से बातचीत हुई थी, पर उन्हें बेटे की कोई जानकारी नहीं थी। मां चंद्रकली ने बताया कि बाबूराम चाहते थे कि संजू को पुलिस पकड़ लाए और मां बेटी को उनके घर पहुंचा दिया जाए।
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प्रथम दृष्टया बुजुर्ग के आत्महत्या का कारण ग्लानि प्रतीत हो रहा है। मृतक के छोटे भाई हर दयाल ने भी यही तहरीर दी है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
-सतीश यादव, थानाध्यक्ष, सुभाषनगर
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थाना सुभाषनगर की राजीव कालोनी की गली नंबर 13 में रहने वाले बाबूराम कश्यप राज मिस्त्री थे। 26 जून को बाबूराम का बड़ा बेटा संजय उर्फ संजू कश्यप मोहल्ले में ही रहने वाली एक महिला और उसकी 14 वर्षीय बेटी को लेकर फरार हो गया था। इस महिला के परिवार से बाबूराम के परिवार के बहुत अच्छे संबंध बताए जाते हैं। महिला संजू को राखी बांधती थी। महिला के पति ने सुभाषनगर थाने में संजू के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कराया। पुलिस की पूछताछ से डरे बाबूराम अपनी पत्नी और छोटे बेटे नन्नू सिंह संग अंडरग्राउंड हो गए थे। घर में सिर्फ बाबूराम की बूढ़ी मां चंद्रकली और तीन बकरियां मौजूद थीं। मोहल्ले वालों ने बताया कि तीन दिन पहलेे बाबूराम वापस आ गए, पर वह बेटे की हरकत की वजह से शर्मिंदगी में थे, किसी से बातचीत नहीं करते थे। बेटे की आत्महत्या से टूटी मां 80 वर्षीय चंद्रकली रोते हुए बताने लगी कि सुबह से बाबूराम घर नहीं आए थे। किस वक्त घर आकर बाबूराम कुंडे पर फंदा बनाकर लटक गए, उन्हें नहीं पता लगा। पड़ोस में रहने वाले बाबूराम के छोटे भाई हरदयाल उर्फ पप्पू ने भाई के अवसाद में आकर आत्महत्या करने की तहरीर पुलिस को दी।
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पुलिस गंभीरता दिखाती तो शायद बाबूराम बच जाते
26 जून को केस दर्ज होने के बाद से अब तक सुभाषनगर पुलिस ने अगवा महिला और किशोरी को खोजने की कोई कोशिश नहीं की। संजू की लोकेशन के बाद में विवेचक को कोई जानकारी नहीं। विवेचक राजीव ने बताया कि पूरा घर फरार है, तीन दिन पहले बाबूराम से बातचीत हुई थी, पर उन्हें बेटे की कोई जानकारी नहीं थी। मां चंद्रकली ने बताया कि बाबूराम चाहते थे कि संजू को पुलिस पकड़ लाए और मां बेटी को उनके घर पहुंचा दिया जाए।
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प्रथम दृष्टया बुजुर्ग के आत्महत्या का कारण ग्लानि प्रतीत हो रहा है। मृतक के छोटे भाई हर दयाल ने भी यही तहरीर दी है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
-सतीश यादव, थानाध्यक्ष, सुभाषनगर