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लिलौर झील घोटाले में एक्सईएन,तीन एई, तीन जेई निलंबित
बरेली।
Updated Thu, 08 Jun 2017 01:00 AM IST
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Suspended XE, three AE, three JE in Lilor Lake scam
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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लिलौर झील घोटाले को दबाए जाने की चर्चाओं को विराम देते हुए सिंचाई मंत्री ने प्रारंभिक कार्रवाई कर दी है। मुख्य अभियंता एके सिंह और विनय कुमार राठी ने सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा ने अधीक्षण अभियंता काजिम अली और जीवनराम, एक्सईएन सिंचाई खंड राम बहादुर यादव और तीन सहायक अभियंताओं को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। लिलौर झील में सपा शासन में तीन साल पहले 8.5 करोड़ रुपये से सफाई कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता , एई, जेई और ठेकेदारों द्वारा आपस में मिलकर अधिकांश बजट का दुरुपयोग करने की बात सामने आई है। इस मामले में सवाल तब भी उठा था जब मामले की जांच कर रहे मुख्य अभियंता एके सिंह को ही बरेली से हटा दिया गया था।
प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि लिलौर झील के कामों में सिल्ट के कैरीज का रेट ज्यादा लगाकर अनुबंध में डिवाटरिंग का काम अनावश्यक तरीके से कराया गया। झील की पूरी चैनेज से सिल्ट नहीं निकाली गई और आठ करोड़ के काम खास ठेकेदारों को देने के लिए बिना किसी वजह के 29 टुकड़ों में बांटकर कराया गया। झील में पानी जाने के सही रास्ते नहीं बनाए गए। इसमें अधीक्षण अभियंता सिंचाई खंड काजिम अली और जीवनराम के अलावा एक्सईएन रामबहादुर यादव के अलावा पांच सहायक अभियंता राकेश कुमार, कौशल किशोर, आशीष रंजन, प्रदीप कुमार सक्सेना और हरीशचंद्र वर्मा भी दोषी पाए गए। शासन ने दोनों अधीक्षण अभियंताओं, एक्सईएन के अलावा तीन सहायक अभियंताओं राकेश कुमार, कौशल किशोर और आशीष रंजन को निलंबित कर दिया। एई प्रदीप कुमार सक्सेना और हरिश्चंद्र वर्मा को रिटायर होने की वजह से निलंबित नहीं किया गया। इनकी पेंशन और फंड रोकने समेत अन्य विभागीय कार्रवाई की जा रही है। प्रमुख सचिव सिंचाई के मुताबिक लिलौर झील की सफाई कराने में अनियमितताओं के दोषी अवर अभियंता रामकुमार, अरविंद कुमार, दीपक कुमार को भी निलंबित किया गया है। बाकी तीन सेवानिवृत्त अवर अभियंताओं पर भी कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। लिलौर झील में घपले की शिकायत पर सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने एक मई 2017 को जांच के आदेश दिए थे। इस पर प्रमुख सचिव सिंचाई समेत अन्य जीर्णोद्धार के लिए रिपेयर, रिनोवेशन, रेस्टोरेशन मापन वाटर बॉडी की परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस दौरान जांच टीम लिलौर झील के आस-पास के ग्रामीणों से भी पूछताछ की थी। सिंचाई मंत्री ने अनियमितताओं के दोषी ठेकेदारों से पैसे की वसूली करने, लिलौर झील के कामों की बची खामियां एक माह के अंदर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि लिलौर झील के कामों में सिल्ट के कैरीज का रेट ज्यादा लगाकर अनुबंध में डिवाटरिंग का काम अनावश्यक तरीके से कराया गया। झील की पूरी चैनेज से सिल्ट नहीं निकाली गई और आठ करोड़ के काम खास ठेकेदारों को देने के लिए बिना किसी वजह के 29 टुकड़ों में बांटकर कराया गया। झील में पानी जाने के सही रास्ते नहीं बनाए गए। इसमें अधीक्षण अभियंता सिंचाई खंड काजिम अली और जीवनराम के अलावा एक्सईएन रामबहादुर यादव के अलावा पांच सहायक अभियंता राकेश कुमार, कौशल किशोर, आशीष रंजन, प्रदीप कुमार सक्सेना और हरीशचंद्र वर्मा भी दोषी पाए गए। शासन ने दोनों अधीक्षण अभियंताओं, एक्सईएन के अलावा तीन सहायक अभियंताओं राकेश कुमार, कौशल किशोर और आशीष रंजन को निलंबित कर दिया। एई प्रदीप कुमार सक्सेना और हरिश्चंद्र वर्मा को रिटायर होने की वजह से निलंबित नहीं किया गया। इनकी पेंशन और फंड रोकने समेत अन्य विभागीय कार्रवाई की जा रही है। प्रमुख सचिव सिंचाई के मुताबिक लिलौर झील की सफाई कराने में अनियमितताओं के दोषी अवर अभियंता रामकुमार, अरविंद कुमार, दीपक कुमार को भी निलंबित किया गया है। बाकी तीन सेवानिवृत्त अवर अभियंताओं पर भी कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। लिलौर झील में घपले की शिकायत पर सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने एक मई 2017 को जांच के आदेश दिए थे। इस पर प्रमुख सचिव सिंचाई समेत अन्य जीर्णोद्धार के लिए रिपेयर, रिनोवेशन, रेस्टोरेशन मापन वाटर बॉडी की परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस दौरान जांच टीम लिलौर झील के आस-पास के ग्रामीणों से भी पूछताछ की थी। सिंचाई मंत्री ने अनियमितताओं के दोषी ठेकेदारों से पैसे की वसूली करने, लिलौर झील के कामों की बची खामियां एक माह के अंदर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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