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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Soldier wounded in the encounter on his recently released

मुठभेड़ में घायल सिपाही को उसके हाल पर छोड़ा

Sat, 02 Jul 2016 01:16 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Sat, 02 Jul 2016 01:16 AM IST
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बदायूं मुठभेड़ में शहीद दरोगा के परिजनों को तो पुलिस विभाग और शासन से आर्थिक मदद मिल गई लेकिन इसी मुठभेड़ में घायल हुए सिपाही प्रमोद को उसके हाल पर छोड़ दिया गया। जो मदद मिली वह अस्पताल में खर्च हो गई। जब खर्च बढ़ा तो उसे घरवालों ने डिस्चार्ज करा लिया है। भर्ती होने तक का भुगतान करने को आईजी राजी हो गए हैं लेकिन घर पर तीन चार महीने तक इलाज में जो रकम खर्च होगी, उसका इंतजाम कैसे होगा? इसको लेकर परिजन चिंतित हैं। 
मुठभेड़ में घायल सिपाही की मां श्रीमती शकुंतला देवी का कहना है कि वह अपने बेटे का पूरा इलाज सरकारी खर्चे से कराने के लिए शुक्रवार को आईजी से मिली थीं। आईजी साहब ने बात तो अच्छे से की और बोले कि अस्पताल के इलाज के दौरान जो भी खर्चा होगा, हम अदा कर देंगे । डाक्टरों ने तीन से पांच महीने तक इलाज चलने की बात कही है। घर पर इलाज के दौरान करीब एक लाख रुपये की और जरूरत होगी। प्रमोद अभी भी पूरी तरह से चलने फिरने लायक नहीं हैं। थोड़ा सा चलने पर दर्द होता है, क्योंकि बदमाश की गोली पेट और हाथों में लगी है। जिसके कारण शरीर के कई हिस्से पूरी तरह से डैमेज हो गए हैं। शकुंतला देवी का कहना है कि हम गरीब और दलित परिवार से हैं, बेटे को नौकरी मृतक आश्रित के रूप में मिली है। शासन स्तर से इलाज के लिए मात्र 30 हजार रुपये मिले थे। यह रकम बहुत कम है जो कि अस्पताल को इलाज के दौरान ही देनी पड़ी। 
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बदायूं पुलिस मुठभेड़ की खबर में डीआईजी का बयान 

‘सिपाही के इलाज के लिए शासनादेेश के अनुसार धनराशि मिलती है। हो सकता है कि यह राशि व्यवहारिक न हो। लेकिन बहादुरी का परिचय देने वाले सिपाही को इलाज के लिए शासन से अनुमन्य धनराशि दिए जाने के बाद के अंतर का भुगतान जीवन रक्षक निधि से कराएंगे। नियमों में यह भी देखा जा रहा है कि घायल सिपाही को शासन स्तर से आर्थिक मदद का प्रावधान है या नहीं। अगर ऐसी कोई व्यवस्था होगी तो उसके लिए भी व्यवस्था की जाएागी’ आशुतोष कुमार, डीआईजी
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