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सीबीगंज में मिली गर्दन कटी लाश की शिनाख्त

Mon, 21 Mar 2016 01:25 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Mon, 21 Mar 2016 01:25 AM IST
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सीबीगंज में सनऊआ रोड पर मिली गर्दन कटी लाश की शिनाख्त मढ़ीनाथ की 50 वर्षीय धर्मवती के रूप में हुई है। धर्मवती की हत्या के बाद थाना सुभाषनगर में उसकी गुमशुदगी लिखी गई। परिवार वालों ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शव की शिनाख्त करने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस अभी तक धर्मवती की हत्या की वजह का पता नहीं लगा पाई है। मामले की छानबीन की जा रही है। 
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सनऊआ रोड पर सोलह मार्च को महिला की गर्दन कटी लाश सड़क किनारे खेत में पड़ी मिली। हत्या के बाद महिला के शव को पहचान मिटाने के लिए जलाया गया था। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद पहचान कराने की कोशिश करके शव को वहीं रखवा दिया था। महिला हाथ में जो अंगूठी पहने थी, उसमें नमन लिखा था। महिला की बेरहमी से कत्ल किया गया था। मौके से पुलिस को ब्लेड के टुकड़े भी मिले थे। रविवार को चौथे दिन अज्ञात शव की पहचान हो पाई। पता लगा कि महिला का नाम धर्मवती है। बहेड़ी के कुसुमपुर गांव में उसका मायका है। धर्मवती की पहली शादी भोजीपुरा के कलारा गांव के दाताराम से हुई थी। दाताराम से धर्मवती के पांच बच्चे हैं। बाद में धर्मवती ने शिवनगर, मढ़ीनाथ, थाना सुभाषनगर के रहने वाले राजेंद्र सिंह यादव से शादी कर ली थी। राजेंद्र यादव ने बताया कि 15 मार्च को धर्मवती घर से गायब हो गई थी। वह उस समय घर पर नहीं थे। अगले दिन वह घर पर नहीं थे। 18 मार्च को उन्होंने धर्मवती की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। धर्मवती की हत्या की वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। सीओ द्वितीय स्नेहलता ने बताया कि धर्मवती के परिवार वाले लाश का अंतिम संस्कार करके निपटे हैं। सोमवार को उनसे विस्तार के बात करने के बाद कुछ नतीजा सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल को हत्या को लेकर कोई सुराग नहीं मिला है। 
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कोई अपना ही है कातिल
 
दो दिन पहले पति ने क्यों नहीं पहचानी थी लाश
बरेली। धर्मवती की हत्या की वजह भले ही जो हो, लेकिन हत्या करने में उनका कोई बेहद करीबी शामिल है। उनके पति भी हत्या को लेकर तमाम बातें पुलिस के छुपा रहे हैं।
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18 मार्च को धर्मवती के पति राजेंद्र सिंह थाना सुभाषनगर में पत्नी की गुमशुदगी लिखाने के लिए पहुंचे थे। उस समय एसओ सीबीगंज कमल सिंह यादव भी सुभाषनगर थाने में ही एक दबिश के सिलसिले में बैठे थे। जैसे ही धर्मवती की गुमशुदगी की बात आई एसओ सीबीगंज ने राजेंद्र यादव ने सनऊआ रोड पर मिली लाश को देख लेने को कहा था। इस पर राजेंद्र यादव ने कह दिया था कि वह देख आए हैं, वह नहीं है। कमल सिंह यादव ने उनसे यह भी कहा था कि हाथ या अंगूठी में कुछ लिखा तो नहीं है। एक बार ठीक से देख लो, लेकिन राजेंद्र यादव ने उस लाश को पत्नी धर्मवती की होने से स्पष्ट मना कर दिया था। रविवार को दो दिन ऐसा क्या हुआ है कि राजेंद्र यादव और उनके परिवार वालों ने उसी लाश को धर्मवती के रूप में पहचान लिया। जबकि राजेंद्र यादव तो जानते थे कि धर्मवती का घर का नाम नमन था। एसओ सीबीगंज ने यह बताया भी था कि महिला जो अंगूठी पहने थी, उस पर नमन लिखा था। समाचार पत्रों में यह बात दूसरे ही दिन छप गई थी। इसके बाद भी लाश की पहचान करने में राजेंद्र और उसके परिवार को देर क्यों लगी। दूसरा यह है कि हत्या के एक दिन पहले राजेंद्र सिंह यादव कहां गए थे। पुलिस इस बिंदू पर भी छानबीन कर रही है। बच्चों के यह भी जानकारी जुटा रही है कि धर्मवती घर से कब और किन हालातों में निकली थी। राजेंद्र यादव की किसी से दुश्मनी तो नहीं है। दाताराम के परिवार से तो धर्मवती का लेनादेना नहीं था। एसपी सिटी समीर सौरभ ने बताया कि हम हर बिंदू पर विवेचना कर रहे हैं। परिवार के लोग भी शक के दायरे में होंगे, उनसे भी जानकारी की जाएगी।        
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