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सरकारी अस्पताल से लौटाया, बीच सड़क पर जन्मा बच्चा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:33 AM IST
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Returned from the hospital, on the road between birth
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के डॉक्टर और नर्स ने रविवार को मानवीय संवेदनाओं और डॉक्टरी पेशे को ताक पर रखकर प्रसव के लिए आई एक महिला को भर्ती कराने से इनकार कर दिया। बच्चे के ओवरवेट और संसाधनों का अभाव होने का तर्क रखकर बरेली ले जाने की सलाह दे डाली। दर्द से कराह रही महिला की हालत पर भी वे नहीं पसीजे। हार थककर परिवार वाले उसे पैदल घर ले जा रहे थे मगर रास्ते में उसने बच्चे को जन्म दे दिया। नर्स की शिकायत आला अफसरों और पुलिस से की गई है।
मामला रविवार सुबह सात बजे का है। मोहल्ला प्रभात नगर के राकेश कुमार की पत्नी भगवती को प्रसव पीड़ा हुई तो वह उसे ठेले पर रखकर दो सौ कदम दूर सीएचसी ले आया। राकेश का आरोप है कि वहां तैनात स्टाफ नर्स दीप्ति ने बच्चे के ओवरवेट या जुड़वा होने की आशंका व्यक्त की। उसे भर्ती कराने से इनकार कर दूसरी जगह ले जाने की सलाह भी दे दी। इस पर राकेश ने परिचित आशा बहू विमला को बुला लिया। आशा ने इसे नार्मल केस बताया तो दोनों में कहासुनी हो गई। घर वाले गरीबी का हवाला देते रहे मगर किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद वे महिला को पैदल ही घर ले जाने लगे। घर से 50 कदम पहले नाला पार करते समय प्रसव हो गया। शुक्र था आशा साथ में थी। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
उधर, स्टाफ नर्स दीप्ति और ड्यूटी पर तैनात डॉ. विभु अग्रवाल ने बताया कि बच्चा ओवरवेट था। प्रसूता के पास कोई जांच रिपोर्ट भी नहीं थी। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण यहां जांच भी नहीं हो सकती थी, उसकी जान को खतरा देखते हुए बरेली ले जाने की सलाह दी गई थी। एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई जा रही थी लेकिन घर वाले इसके लिए तैयार नहीं हुए।
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अगर गर्भवती और तीमारदार को 102 के बारे में नहीं पता था तो कम से कम आशा को तो जानकारी थी, उन्होंने फोन क्यों नहीं किया। मामला पूरी तरह संज्ञान में नहीं है। सोमवार को इसकी जांच कराऊंगा। अगर शिकायत तीमारादार की होगी तो जांच के बाद दोषी पर कार्रवाई भी होगी।
डॉ. विजय यादव, सीएमओ
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मामला रविवार सुबह सात बजे का है। मोहल्ला प्रभात नगर के राकेश कुमार की पत्नी भगवती को प्रसव पीड़ा हुई तो वह उसे ठेले पर रखकर दो सौ कदम दूर सीएचसी ले आया। राकेश का आरोप है कि वहां तैनात स्टाफ नर्स दीप्ति ने बच्चे के ओवरवेट या जुड़वा होने की आशंका व्यक्त की। उसे भर्ती कराने से इनकार कर दूसरी जगह ले जाने की सलाह भी दे दी। इस पर राकेश ने परिचित आशा बहू विमला को बुला लिया। आशा ने इसे नार्मल केस बताया तो दोनों में कहासुनी हो गई। घर वाले गरीबी का हवाला देते रहे मगर किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद वे महिला को पैदल ही घर ले जाने लगे। घर से 50 कदम पहले नाला पार करते समय प्रसव हो गया। शुक्र था आशा साथ में थी। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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उधर, स्टाफ नर्स दीप्ति और ड्यूटी पर तैनात डॉ. विभु अग्रवाल ने बताया कि बच्चा ओवरवेट था। प्रसूता के पास कोई जांच रिपोर्ट भी नहीं थी। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण यहां जांच भी नहीं हो सकती थी, उसकी जान को खतरा देखते हुए बरेली ले जाने की सलाह दी गई थी। एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई जा रही थी लेकिन घर वाले इसके लिए तैयार नहीं हुए।
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अगर गर्भवती और तीमारदार को 102 के बारे में नहीं पता था तो कम से कम आशा को तो जानकारी थी, उन्होंने फोन क्यों नहीं किया। मामला पूरी तरह संज्ञान में नहीं है। सोमवार को इसकी जांच कराऊंगा। अगर शिकायत तीमारादार की होगी तो जांच के बाद दोषी पर कार्रवाई भी होगी।
डॉ. विजय यादव, सीएमओ