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बिहार के दद्दन को दे दिया गांवों से वसूली का ठेका
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Thu, 07 Apr 2016 01:11 AM IST
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मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर बिहार के दद्दन पंडित ने टीसी पांडेय आगरा तबादले पर जाने से पहले बरेली के पूर्व जीपीआरओ को सेट किया और उन्होंने घरों में नंबर प्लेट लगाने के नाम पर जिले के ग्रामीणों से 30-30 रुपये वसूली का फरमान जारी कर दिया। सभी बीडीओ को 13 जनवरी को आदेश जारी कर उन्होंने दद्दन का सहयोग करने को कहा है। बीडीओ ने ग्राम प्रधानों को सरकुलर जारी कर दिया और दद्दन पंडित के लोग वसूली करने निकल पड़े। करीब तीन रुपये की ये टिन की प्लेट लगाने के हर घर से 30-30 रुपये वसूल रहे हैं साथ में लोगों को डरा भी रहे हैं कि अगर ये प्लेट नहीं लगाई तो तो किसी को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। क्यारा, भोजीपुरा, भदपुरा और नवाबगंज ब्लाक के गांवों में यह वसूली इन दिनों चल रही है। बुधवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद गांवों में वसूली करने वाले नहीं पहुंचे। इससे जाहिर है कि खेल उजागर होने के बाद उनमें अब खलबली मची हुई है।
एक बात साफ हुई कि नंबर प्लेट लगाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। डीपीआरओ की कुर्सी पर बैठे अधिकारी को ऐसा आदेश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि टीन के छोटे से टुकड़े पर हरे रंग का स्टिकर चिपकाकर तैयार की गई यह नंबर प्लेट की लागत महज तीन रुपये से ज्यादा नहीं है। अपने बचाव के लिए अफसरों ने मकान मालिकों से स्वेच्छा से नंबर प्लेट लगाने की बात लिखी है।
अशोक की लाट का दुरुपयोग
नंबर प्लेट पर स्वच्छ भारत मिशन के साथ ही बहू बेटियां दूर न जाएं, घर में शौचालय बनवाएं जैसे नारों के ऊपर अशोक की लाट भी छपी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अशोक की लाट के चिह्न का प्रयोग यूं किया जा सकता है। अशोक की लाट का प्रयोग करने की छूट कैसे दे दी गई।
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कौन है दद्दन पंडित
दद्दन की ओर से डीपीआरओ को जो पत्र लिखा गया है उसमें उन्होंने खुद को बिहार का निवासी और शिक्षित बेरोजगार दर्शाया है। लिखा है कि इससे पहले वह कुशीनगर और इटावा में नंबर प्लेट लगा चुके हैं। उनका तर्क है कि इन नंबर प्लेट से जनगणना, मकान गणना जैसे शासकीय कार्यों में सहयोग मिलेगा।
कोट...
मैंने अपने ब्लाक के गांवों में नंबर प्लेट लगाने का आदेश डीपीआरओ के आदेश के अनुपालन में जारी किया है। मुझे इसके अलावा इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
-नजमा सिद्दीकी, बीडीओ क्यारा
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एक बात साफ हुई कि नंबर प्लेट लगाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। डीपीआरओ की कुर्सी पर बैठे अधिकारी को ऐसा आदेश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि टीन के छोटे से टुकड़े पर हरे रंग का स्टिकर चिपकाकर तैयार की गई यह नंबर प्लेट की लागत महज तीन रुपये से ज्यादा नहीं है। अपने बचाव के लिए अफसरों ने मकान मालिकों से स्वेच्छा से नंबर प्लेट लगाने की बात लिखी है।
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अशोक की लाट का दुरुपयोग
नंबर प्लेट पर स्वच्छ भारत मिशन के साथ ही बहू बेटियां दूर न जाएं, घर में शौचालय बनवाएं जैसे नारों के ऊपर अशोक की लाट भी छपी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अशोक की लाट के चिह्न का प्रयोग यूं किया जा सकता है। अशोक की लाट का प्रयोग करने की छूट कैसे दे दी गई।
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कौन है दद्दन पंडित
दद्दन की ओर से डीपीआरओ को जो पत्र लिखा गया है उसमें उन्होंने खुद को बिहार का निवासी और शिक्षित बेरोजगार दर्शाया है। लिखा है कि इससे पहले वह कुशीनगर और इटावा में नंबर प्लेट लगा चुके हैं। उनका तर्क है कि इन नंबर प्लेट से जनगणना, मकान गणना जैसे शासकीय कार्यों में सहयोग मिलेगा।
कोट...
मैंने अपने ब्लाक के गांवों में नंबर प्लेट लगाने का आदेश डीपीआरओ के आदेश के अनुपालन में जारी किया है। मुझे इसके अलावा इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
-नजमा सिद्दीकी, बीडीओ क्यारा