{"_id":"570958f64f1c1b822dc8126e","slug":"piracy-off-the-informer-what","type":"story","status":"publish","title_hn":"तो मुखबिर को चोरी की छूट है क्या?","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
तो मुखबिर को चोरी की छूट है क्या?
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sun, 10 Apr 2016 01:03 AM IST
विज्ञापन
पब्लिक हैरान है कि जिस चोर को पकड़ा उसने खुद को छुड़ाने के लिए सिपाहियों को बुला लिया। सिपाही चोर को मुखबिर बताकर छुड़ाने के लिए भीड़ से भिड़ गए। प्रेम नगर में शुक्रवार को हुई इस घटना पर अफसरों की चुप्पी तो यही बताती है कि यहां मुखबिर को चोरी करने की छूट है।
बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस आमतौर पर बतौर मुखबिर ऐसे लोग ढूंढती है जो अपराध की दुनिया को अलविदा कह चुके होते हैं। इस मामले में जो सिपाही लिप्त है वह जगतपुर पुलिस चौकी में तैनाती के दौरान कई मामलों में चर्चित रहा है। दोस्ती इतनी गाढ़ी थी कि विपिन अस्पताल के सामने प्रेमनगर थाने की अशरफ खां छावनी पुलिस चौकी के प्रभारी आशीष कुमार से भी सिपाही भिड़ गया। चोर के साथी को पकड़ने आई भीड़ में शामिल पार्षद गौरव सक्सेना का कड़ा रुख देखकर दरोगा ने चोर की पैरवी करने वाले सिपाही को समझाया नहीं होता तो मामला बढ़ सकता था, क्योंकि सिपाही की पैरवी करने का तरीका ही अलग था। वह तो किसी भी तरह नदीम को छुड़ाने के मूड में था।
सिपाही की भूमिका की जांच होनी चाहिए
पार्षद गौरव सक्सेना ने कहा कि वह इस मामले को पुलिस के आला अफसरों के सामने रखेंगे। मोहल्ले वालों का कहना है कि इससे साफ जाहिर हो रहा है कि सिपाही की चोर से दोस्ती पक्की है। चोर के पकड़े जाने पर सिपाही का तुरंत मौके पर पहुंचना उसे संदेह के घेरे में रखे हुए हैं।
विज्ञापन
-शास्त्रीनगर में पकड़े गए चोर के साथियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। इस मामले में जांच कराने जैसी कोई बात नहीं लग रही है। बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस को अपना नेटवर्क बनाना ही पड़ता है-आरके भारद्वाज, एसएसपी
विज्ञापन
बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस आमतौर पर बतौर मुखबिर ऐसे लोग ढूंढती है जो अपराध की दुनिया को अलविदा कह चुके होते हैं। इस मामले में जो सिपाही लिप्त है वह जगतपुर पुलिस चौकी में तैनाती के दौरान कई मामलों में चर्चित रहा है। दोस्ती इतनी गाढ़ी थी कि विपिन अस्पताल के सामने प्रेमनगर थाने की अशरफ खां छावनी पुलिस चौकी के प्रभारी आशीष कुमार से भी सिपाही भिड़ गया। चोर के साथी को पकड़ने आई भीड़ में शामिल पार्षद गौरव सक्सेना का कड़ा रुख देखकर दरोगा ने चोर की पैरवी करने वाले सिपाही को समझाया नहीं होता तो मामला बढ़ सकता था, क्योंकि सिपाही की पैरवी करने का तरीका ही अलग था। वह तो किसी भी तरह नदीम को छुड़ाने के मूड में था।
विज्ञापन
सिपाही की भूमिका की जांच होनी चाहिए
पार्षद गौरव सक्सेना ने कहा कि वह इस मामले को पुलिस के आला अफसरों के सामने रखेंगे। मोहल्ले वालों का कहना है कि इससे साफ जाहिर हो रहा है कि सिपाही की चोर से दोस्ती पक्की है। चोर के पकड़े जाने पर सिपाही का तुरंत मौके पर पहुंचना उसे संदेह के घेरे में रखे हुए हैं।
विज्ञापन
-शास्त्रीनगर में पकड़े गए चोर के साथियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। इस मामले में जांच कराने जैसी कोई बात नहीं लग रही है। बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस को अपना नेटवर्क बनाना ही पड़ता है-आरके भारद्वाज, एसएसपी