{"_id":"57a794854f1c1b86622b897e","slug":"out-of-crime-control-district-failed-dhama","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्राइम कंट्रोल में नाकाम धामा जिले से आउट ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
क्राइम कंट्रोल में नाकाम धामा जिले से आउट
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 08 Aug 2016 01:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। डीआईजी आशुतोष कुमार ने क्राइम कंट्रोल में नाकाम साबित हुए शहर कोतवाल सुधीर पाल धामा को शाहजहांपुर फेंक दिया है। इसके अलावा बरेली में तैनात तीन और इंस्पेक्टरों के दूसरे जिले में तबादला हुआ है। हालांकि सावन माह के चलते एसएसपी आरके भारद्वाज ने अभी तक किसी को रिलीव नहीं किया है।
साढ़े चार साल से बरेली में तैनात कोतवाली प्रभारी सुधीर पाल धामा की ओर से की जा रहीं विवेचनाओं पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं। दिवाली के दिन जुआ खेलने के दौरान पुलिस को देखकर भागे दो युवकों की नदी में डूबकर मौत से गुस्सा भीड़ ने थाना कैंट थाना फूंक दिया था। धामा को ही इस मामले की विवेचना दी गई। इसमें से कई लोगों के नाम उन्होंने सीओ चतुर्थ से बिना अनुमोदन के निकाल दिया। पता करने पर उनका कहना था कि उन्होंने अफसरों के कहने पर नाम निकाले हैं। बवाल के दौरान एसपी सिटी समीर सौरभ ने खुद 35 लोगों को चिहिन्त किया था, ये ऐसे लोग थे जिनके फोटो भी पुलिस के पास थे। कार्रवाई के नाम पर कैंट पुलिस ने ही ग्यारह लोगों को जेल भेजा था। सुधीर धामा ने बाद में दस और लोगों की गिरफ्तारी की तहरीर कैंट थाने को भेजकर मामला निपटा दिया। रामपुर बाग की कई बेशकीमती जमीनों के विवाद को लेकर धामा का नाम सुर्खियों में रहा। हाल ही में कोर्ट के आदेश के बावजूद धामा ने विवादित भूमि पर रातोरात दीवार बनवा दी। आला अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। प्रेमनगर थाने में तैनाती के दौरान भी उनके कई किस्से सामने आए। सीबीगंज और फतेहगंज पश्चिमी थाने में भी धामा का कार्यकाल ज्यादा अच्छा नहीं रहा। धामा के अलावा डीआईजी ने इंस्पेक्टर शीशगढ़ हरीश राजपूत, क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर राज सिंह को शाहजहांपुर और योगेंद्र पाल शर्मा को पीलीभीत जिले में तबादला कर दिया है।
अफसर इन पर मेहरबान क्यों ?
-प्रभारी निरीक्षक प्रेमनगर देवेश सिंह और बहेड़ी इंस्पेक्टर अजय श्रोतिया का बरेली में समय पूरा हो चुका है। इसके बाद भी पुलिस के आला अधिकारियों की मेहरबानी इन दोनों पर बनी हुई है। पूर्व डीआईजी ने देवेश को विशेष परिस्थितियों में एक साल के लिए स्टे दे रखा है, लेकिन उनके तबादले की फाइल में इसका जिक्र नहीं है। बहेड़ी इंस्पेक्टर अजय श्रोतिया पर भी पुलिस के आला अधिकारी मेहरबान हैं। उनकी मेहरबानी से वह बहेड़ी जैसे जिले की सबसे महत्वपूर्ण कोतवाली में तैनात हैं। जबकि उनका समय यहां कई साल पहले ही पूरा हो चुका है। डीजीपी के साफ निर्देश हैं कि अटैमेंट कराकर जिलों में रहने वालों को चार्ज नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बाद भी दोनों इंस्पेक्टर थानों में बने हुए हैं।
विज्ञापन
-कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुधीर पाल धामा समेत चार इंस्पेक्टरों का तबादला तो चार दिन पहले शाहजहांपुर और पीलीभीत जिलों में किया है। इन दोनों ही जिलों में इंस्पेक्टरों की कमी है। क्राइम कंट्रोल के लिए धामा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। उनके इलाके की कई घटनाएं नहीं खुल पा रही थीं। अब एसएसपी को उन्हें रिलीव करना है- आशुतोष कुमार, डीआईजी
संजय सिंह की वापसी के आदेश
बरेली। डीआईजी आशुतोष कुमार ने महिला सिपाही से बात करने को लेकर सुर्खियों में आए इंस्पेक्टर संजय सिंह की वापसी के आदेश कर दिए हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि उनके पास जिम्मेदारी क्या रहेगी।
डेढ़ महीने महिला थाने के सिपाही के अटैचमेंट का समय बढ़वाने को लेकर विवादों में रहे संजय सिंह को डीआईजी ने शाहजहांपुर जिले को रिलीव करा दिया था। उधर, सीओ तृतीय एएसपी आकाश तोमर ने संजय सिंह के मामले में अपनी जांच रिपोर्ट भी डीआईजी को सौंप दी। जांच में यह बात तो साफ हो गई कि संजय सिंह की महिला सिपाही से बात होती थी। डीआईजी ने बताया कि जांच में संजय सिंह के खिलाफ कोई खास बात सामने नहीं आई, इसलिए उनकी वापसी कर ली गई है।
विज्ञापन
साढ़े चार साल से बरेली में तैनात कोतवाली प्रभारी सुधीर पाल धामा की ओर से की जा रहीं विवेचनाओं पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं। दिवाली के दिन जुआ खेलने के दौरान पुलिस को देखकर भागे दो युवकों की नदी में डूबकर मौत से गुस्सा भीड़ ने थाना कैंट थाना फूंक दिया था। धामा को ही इस मामले की विवेचना दी गई। इसमें से कई लोगों के नाम उन्होंने सीओ चतुर्थ से बिना अनुमोदन के निकाल दिया। पता करने पर उनका कहना था कि उन्होंने अफसरों के कहने पर नाम निकाले हैं। बवाल के दौरान एसपी सिटी समीर सौरभ ने खुद 35 लोगों को चिहिन्त किया था, ये ऐसे लोग थे जिनके फोटो भी पुलिस के पास थे। कार्रवाई के नाम पर कैंट पुलिस ने ही ग्यारह लोगों को जेल भेजा था। सुधीर धामा ने बाद में दस और लोगों की गिरफ्तारी की तहरीर कैंट थाने को भेजकर मामला निपटा दिया। रामपुर बाग की कई बेशकीमती जमीनों के विवाद को लेकर धामा का नाम सुर्खियों में रहा। हाल ही में कोर्ट के आदेश के बावजूद धामा ने विवादित भूमि पर रातोरात दीवार बनवा दी। आला अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। प्रेमनगर थाने में तैनाती के दौरान भी उनके कई किस्से सामने आए। सीबीगंज और फतेहगंज पश्चिमी थाने में भी धामा का कार्यकाल ज्यादा अच्छा नहीं रहा। धामा के अलावा डीआईजी ने इंस्पेक्टर शीशगढ़ हरीश राजपूत, क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर राज सिंह को शाहजहांपुर और योगेंद्र पाल शर्मा को पीलीभीत जिले में तबादला कर दिया है।
विज्ञापन
अफसर इन पर मेहरबान क्यों ?
-प्रभारी निरीक्षक प्रेमनगर देवेश सिंह और बहेड़ी इंस्पेक्टर अजय श्रोतिया का बरेली में समय पूरा हो चुका है। इसके बाद भी पुलिस के आला अधिकारियों की मेहरबानी इन दोनों पर बनी हुई है। पूर्व डीआईजी ने देवेश को विशेष परिस्थितियों में एक साल के लिए स्टे दे रखा है, लेकिन उनके तबादले की फाइल में इसका जिक्र नहीं है। बहेड़ी इंस्पेक्टर अजय श्रोतिया पर भी पुलिस के आला अधिकारी मेहरबान हैं। उनकी मेहरबानी से वह बहेड़ी जैसे जिले की सबसे महत्वपूर्ण कोतवाली में तैनात हैं। जबकि उनका समय यहां कई साल पहले ही पूरा हो चुका है। डीजीपी के साफ निर्देश हैं कि अटैमेंट कराकर जिलों में रहने वालों को चार्ज नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बाद भी दोनों इंस्पेक्टर थानों में बने हुए हैं।
विज्ञापन
-कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुधीर पाल धामा समेत चार इंस्पेक्टरों का तबादला तो चार दिन पहले शाहजहांपुर और पीलीभीत जिलों में किया है। इन दोनों ही जिलों में इंस्पेक्टरों की कमी है। क्राइम कंट्रोल के लिए धामा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। उनके इलाके की कई घटनाएं नहीं खुल पा रही थीं। अब एसएसपी को उन्हें रिलीव करना है- आशुतोष कुमार, डीआईजी
संजय सिंह की वापसी के आदेश
बरेली। डीआईजी आशुतोष कुमार ने महिला सिपाही से बात करने को लेकर सुर्खियों में आए इंस्पेक्टर संजय सिंह की वापसी के आदेश कर दिए हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि उनके पास जिम्मेदारी क्या रहेगी।
डेढ़ महीने महिला थाने के सिपाही के अटैचमेंट का समय बढ़वाने को लेकर विवादों में रहे संजय सिंह को डीआईजी ने शाहजहांपुर जिले को रिलीव करा दिया था। उधर, सीओ तृतीय एएसपी आकाश तोमर ने संजय सिंह के मामले में अपनी जांच रिपोर्ट भी डीआईजी को सौंप दी। जांच में यह बात तो साफ हो गई कि संजय सिंह की महिला सिपाही से बात होती थी। डीआईजी ने बताया कि जांच में संजय सिंह के खिलाफ कोई खास बात सामने नहीं आई, इसलिए उनकी वापसी कर ली गई है।