फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Not treated or mixed with blood, were killed procreative

न खून मिला न इलाज, प्रसूता की जान चली गई

Sun, 29 Jan 2017 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Sun, 29 Jan 2017 01:09 AM IST
विज्ञापन
Not treated or mixed with blood, were killed procreative
pregnancy - फोटो : mirror
खून की कमी से दम तोड़ने वाली रुखसाना को बचाया जा सकता था, लेकिन परिवार की जिद और अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी जान चली गई। गंभीर एनीमिया की वजह से शुक्रवार को प्रसव के बाद रुखसाना को महिला अस्पताल से जिला संयुक्त अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था। जिला अस्पताल में पति और परिवारवाले खून का इंतजाम नहीं कर सके। अपराह्न ढाई बजे भर्ती हुई रुखसाना की रात करीब नौ बजे मौत हो गई थी। 
विज्ञापन

तिलहर बहरनपुर गांव के साजिद की पत्नी रुखसाना (30) को 26 जनवरी को प्रसव पीड़ा हुई तो 102 एंबुलेंस से उसे महिला अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी डिलीवरी हो गई। महिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टराें ने खून का इंतजाम करने को कहा तो उसका पति घर ले जाने की जिद करने लगा। खून की कमी से महिला की हालत बिगड़ी तो उसे संयुक्त अस्पताल में शिफ्ट किया गया। यहां अपराह्न 2.20 पर इमरजेंसी के डॉक्टर ने देखने के बाद करीब 4 बजे महिला वार्ड में शिफ्ट कर दिया। इस दौरान कोई डॉक्टर मौके पर रुखसाना को देखने नहीं पहुंचा। रात करीब 8 बजे तक रुखसाना को खून भी नहीं चढ़ाया गया, जबकि उसका हीमोग्लोबिन 5 ग्राम से कम था। ब्लड बैंक से भी किसी ने संपर्क नहीं किया। जिला अस्पताल में ही रुखसाना ने करीब 8.52 पर दम तोड़ा। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा का कहना है कि रुखसाना के प्रसव के बाद वह अस्पताल में थी। गंभीर एनीमिया होने के चलते खून चढ़ाने को उसके पति से कहा गया, लेकिन वह नहीं लाया। वह रुखसाना को घर ले जा रहा था। हालत गंभीर होने पर उपचार के लिए संयुक्त अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था। 
विज्ञापन


मौतों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं
गर्भवती महिलाआें की मौत का सही रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। शनिवार को एडी हेल्थ कार्यालय पर मातृ मृत्यु दर को लेकर मंडल की बैठक में यह खुलासा हुआ। विभाग को सूचना नहीं मिल रही है। एडी हेल्थ डॉ. प्रमिला ने कहा कि एक लाख गर्भवती में 258 मृत्यु दर का मानक है, लेकिन बरेली ने कुछ ज्यादा ही अच्छी रिपोर्ट बना दी है। यहां एक लाख पर 196 मृत्यु दर आ रही है जो सही नहीं है। यहां गर्भवती महिलाआें की मौत की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक नहीं पहुंच पा रही है। उन्हाेंने सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी व ब्लाक कार्यक्रम अधिकारियों को बताया कि वे अपने यहां कार्यरत आशा को बताएं कि 15 से 49 साल की किसी भी महिला की मौत होती है तो उसे तुरंत सूचित करें। सिर्फ फोन से सूचना देने पर उनको 200 रुपये मिलेंगे। बाद में जांचकर मौत का सही कारण पता किया जाएगा। जेडी हेल्थ डॉ. सुबोध शर्मा ने बताया कि महिलाओं की मृत्यु दर रोकने के लिए ही तमाम कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन जानकारी सही होनी चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


2016-17 में मृत्यु का आंकड़ा
बदायूं :    83
पीलीभीत :    33
बरेली :     19
शाहजहांपुर : 14

गर्भवती की मौत का मानक अभी कम नहीं हुआ है। इससे कम मौतें अगर बरेली में होंगी तो यह उपलब्धि की बात है, लेकिन रिपोर्ट सही होनी चाहिए। मौत की जानकारी न होने से सही रिपोर्ट नहीं बन पा रही है। 
- डॉ. प्रमिला, एडी हेल्थ। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed