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अपने घर मेें तीन दिन से लुटेरों के बंधक थे बुजुर्ग दंपति
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 08 Apr 2016 01:32 AM IST
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बंधक बनाया
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दुर्गानगर कॉलोनी में लुटेरों ने अपने किस्म की अनोखी वारदात कर डाली। यहां रहने वाले रेलवे के 64 वर्षीय रिटायर्ड मैकेनिक देवीशंकर पाठक और उनकी 61 वर्षीय पत्नी विमलेश पाठक को फिल्मी अंदाज में तीन दिन उनके ही घर में कैद रखकर लुटेरे परेशान करते रहे। एक लाख का चेक कटवाकर भुना लिया। घर में रखे जेवर समेट लिए और घर भी अपने नाम कराने के चक्कर में थे लेकिन ऐन वक्त पर पड़ोसियों को शक होने पर तीन लुटेरे पकड़े गए। एक लुटेरा उस समय घर से बाहर था, इसलिए हाथ नहीं आया।
देवीशंकर पाठक रेलवे के इज्जतनगर मंडल से मार्च, 2012 में रिटायर होने के बाद पत्नी विमलेश पाठक के साथ थाना बारादरी की दुर्गानगर कॉलोनी डी-8 पार्ट टू में बने अपने घर में रहते हैं। सोमवार चार अप्रैल की रात करीब तीन बजे देवी शंकर पाठक ने मोबाइल पर आई तीन मिस्ड कॉल तो इग्नोर कर दी लेकिन चौथी बार फोन उठा लिया। उधर से आवाज आई कि तुम्हारा पड़ोसी बोल रहा हूं। तुम्हारी मोटर चलने से सड़क पर पानी आ गया है। देवीशंकर पाठक ने दरवाजा खोलकर मोटर बंद की और जैसे ही अंदर जा के लिए मुड़े, सीढ़ी की तरफ से आए चार लड़कों ने कनपटी पर बंदूक रखकर उन्हें दबोच लिया। बदमाशों ने देवीशंकर को अंदर ले जाने के बाद कुर्सी से हाथ बांध दिए । उन्होंने अलमारी और संदूक की चाबी लेकर जेवर और 12 हजार रुपये की नकदी निकाल ली। मंगलवार सुबह करीब दस बजे लुटेरों ने संदूक में रखी चेक बुक और पास बुक निकाल ली और बुजुर्ग दंपति को गन प्वाइंट पर लेकर खाली चेक पर उनके हस्ताक्षर करा लिए। उनके दो साथी चेक लेकर बैंक पहुंचे। बैंक वालों से देवीशंकर की बात करा दी। उनके साथियों ने असलहों के बल पर धमका कर कहलवाया कि मेरी पत्नी बीमार है। आप इन लड़कों को रुपये दे दो। यह रिश्तेदार हैं।
छह अप्रैल बुधवार को संदूक में मिले मकान के कागजात देखकर लुटेरों को लालच आ गया। विमलेश पाठक ने अपने छोटे बेटे अंकित पाठक के नाम मकान की वसीयत करा रखी थी। दोपहर करीब दो बजे ऑटो रिक्शा से दो बदमाश विमलेश पाठक को रजिस्ट्रार के ऑफिस ले गए। उनके पति उनके दो साथियों के कब्जे में थे। विमलेश से लुटेरों ने कहा कि तुम्हें 12 अनाथ बच्चों के नाम यह मकान कराना है। इसलिए वसीयत खारिज करानी है। यह रजिस्ट्रार के सामने कह देना। डर की वजह से उन्होंने ऐसा ही कर दिया और वसीयत खारिज कर दी। आसपास के लोगों को उनका व्यवहार कुछ खटका तो बृहस्पतिवार को पड़ोसियों ने देवीशंकर का दरवाजा खटखटाया लेकिन उन्होंने नहीं खोला। फोन पर भी लुटेरों ने पड़ोसी से बात नहीं होने दी। इस पर लोगों ने देवीशंकर का घर घेर लिया। देवीशंकर पर नजर पड़ी तो तो उन्होंने इशारे में बता दिया कि वे तो बंधक बने हैं। घर में ही तीन बदमाश पकड़े गए। इनमें से राहुल कुमार गंगवार निवासी ग्राम रजपुरा, थाना मिलक, जिला रामपुर गैंग का सरगना है। बाकी चेतन अरोड़ा और उनका नाबालिग साथी संजयनगर कॉलोनी का रहने वाला है। चौथा साथी संजय कुमार मीरगंज का रहने वाला बताया जा रहा है। प्रभारी निरीक्षक कमरुल हसन ने बताया कि बदमाशों से सोने के दो आइटम और 27 हजार रुपये बरामद हो गए हैं।
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दुर्गानगर कॉलोनी कांड में हुई वारदात का तरीका जो सुन रह रहा है सन्न रह जा रहा है। पुलिस के तमाम अफसर भी 55 घंटे तक लुटेरों के कब्जे में रहे बुजुर्गों की बातें सुनकर दहलते रहे। सोमवार की रात तीन बजे से गुरुवार को दस बजे आजाद होने तक बुजुर्ग दंपति यही सोचती रही कि कौन सी घड़ी आखिरी हो जाए। उन्होंने तो तय कर लिया था कि सबकुछ लेकर हमारे लिए घर का टिकट कटा दो हम चले जाएंगे। एक दो बार विरोध करने की भी कोशिश देवी शंकर ने की लेकिन लुटेरों के आगे एक न चली। लुटेरो जो चाहते करवाते रहे। 55 घंटे तक क्या गुजरी बुजुर्गों पर जानिए उन्हीं की जुबानी।
बस किसी तरह बच गई जान
हम तो सीधे साधे लोग हैं। फोन आया तो सोचा किसी को परेशानी न हो, इसलिए मोटर बंद करने के लिए घर से निकल आए। स्विच बंद करते ही चार लोगों ने मुझे दबोचा तो एहसास हुआ लुटेरों के चंगुल में हूं। विरोध करने की कोशिश भी की, लेकिन तमंचा कनपटी पर रखा तो जुबान बंद हो गई। लाबी में ले जाने के बाद मुझे कुर्सी के बांधकर मुंह पर टेप लगा दिया। विमलेश कमजोर और सीधी स्वाभाव की हैं, इसलिए वह यूं ही डरी हुई थीं। सुबह ही चार बजे विमलेश से अलमारी और संदूक की चाभी मांगी और घर खंगालना शुरू कर दिया। जेवर, 12 हजार रुपये थे जो ले लिए। चेक बुक देखा तो मेरे पास लाए और चेक पर साइन करा लिया। खाते में एक लाख रुपये थे। मंगलवार को सुबह 10.30 बजे दो घर में रह गए और दो लुटेरे चेक लेकर बैंक चले गए। मुझे और विमलेश से कहा चालाकी मत करना। इस दौरान घर में रहे दोनों लुटेरे कुर्सी पर बैठकर तमंचा ताने रहे। उनके साथी बैंक से चेक से एक लाख रुपये निकालने के बाद घर आ गए। उस रात को खाने को भी कुछ नहीं मिला। रात को हाथ खोलने के बाद विमलेश और उसे बेड पर सुला दिया। मोबाइल पहले ही छीन लिया था इसलिए हम किसी को बता भी नहीं पा रहे थे। दो बदमाश उनके पास चारपाई पर सोए और दो बैठक में सो गए। बुधवार को लुटेरा संजय कुमार अपने एक साथी को लेकर विमलेश को रजिस्ट्री ऑफिस ले गया। वह वसीयतनामा खारिज कराने के बाद लौटा तो मुझे लगा आज हमारी जिंदगी का आखिरी दिन है, क्योंकि चारों लुटेरों के इरादे अच्छे नहीं थे। लुटेरों ने जैसे ही यह कहा कि बृहस्पतिवार को काम यानी मकान का बैनामा होने के बाद आपको अच्छी जगह पहुंचा देंगे। दहशत में किसी तरह से रात तो गुजर गई। बृहस्पतिवार की सुबह मोहल्ले वाले जुटने लगे तो कुछ उम्मीद बंधी। दरवाजे खटखटाने पर एक बार विमलेश को भेजा तो डर में उन्होंने यही कहा कि रिश्तेदार आए हैं हमारी देखरेख के लिए। पड़ोसियों का शक फिर खत्म नहीं हुआ और बुजुर्ग को बुलाने पर अड़ गए तो पोल आखिर खुल गई।
अब भी डर से कांप रहीं विमलेश
हमने तो कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह की वारदात हमारे साथ होगी। सोमवार की रात बदमाश घर में घुसकर अपनी मनमानी शुरू की तो उनकी जुबान नहीं खुल रही थी। डर की वजह से चीख भी नहीं निकली। आते ही उन्होंने पति को कुर्सी के बांध दिया था। इसके बाद जैसे वह कहते गए मैं वही करती गई। वह डरा धमकाकर रजिस्ट्री ऑफिस ले गए। वहां भी मैंने वही कहा जो वह समझाकर ले गए थे। अगले दिन भी वह जाने को तैयार थीं, लेकिन इसी बीच मोहल्ले के लोगों को शक हो गया। हमने तो यह सोचा था कि किसी तरह जान बच गई तो अपने गांव भाग जाएंगे। बदमाशों की कैद में रहने के दौरान भूख भी नहीं लगी। वह जबरन खाना खिलाते थे। पानी पीने के लिए भी जबरदस्ती करते थे।
दो महीने पहले कूड़े वाला बनकर की थी रेकी
राहुल ने पुलिस को बताया कि दो महीने पहले कूड़ा लेने वाला बनकर वह बुजुर्ग दंपति के घर गया था। वहां उसने देवीशंकर पाठक के दरवाजा खोलते ही पूछा कि आपके घर में कितने लोग रहते हैं। जितने लोग होंगे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन उतने ही रुपये लगेंगे। देवीशंकर ने बताया कि हम तो सिर्फ दो ही लोग हैं। इस पर राहुल ने बताया कि 85 रुपये लगेंगे। देवीशंकर ने इसके अलावा अपने दोनों बेटों की डिटेल भी नोट करा दी थी। फार्म पर फोन नंबर भी लिख दिया था जिसका बाद में लुटेरों ने इस्तेमाल किया।
यह माल लूटा गया
दो सोने की चेन, तीन तोले, एक पायल(चांदी), कान के फूल, एक अंगूठी, 12 हजार रुपये नकद।
इंजीनियर के शक ने बचाई जान
देवीशंकर रोजाना सुबह सवेरे ही अपने आंगन में लगे पौधों पर पानी छिड़कते दिख जाते थे। मंगलवार की सुबह वह दिखाई नहीं दिए। इसके बाद बाद बुधवार को भी नजर नहीं आए और दो लड़कों को उनके घर से पड़ोस में रहने वाले निजी कंपनी के इंजीनियर देवेंद्र कुमार गंगवार ने आते जाते देख लिया था। देवेंद्र ने पहले तो शाम को ही देवीशंकर पाठक का दरवाजा खटखटाया। बृहस्पतिवार को उन्होंने पड़ोस में रहने वाले हेड बंदी रक्षक हरपाल सिंह को यह बात बता दी। इसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। नतीजा यह रहा था कि लुटेरे पकड़े गए और बुजुर्ग दंपति की जान बच गई।
इशारे ने बिगाड़ दिया राहुल का खेल
बृहस्पतिवार की सुबह मोहल्ले वालों के बुजुर्ग दंपति का मकान घेर लेने के बाद राहुल ने अंदर से पहले विमलेश को समझाकर गेट पर भेजा। विमलेश ने बताया कि उनके पति की तबियत खराब है। इसलिए लेटे हुए हैं। यह लड़के हमारी सेवा कर रहे हैं। दवा वगैरह लाकर दी है। हमारे रिश्तेदार लगते हैं। विमलेश को राहुल के बताए शब्द न बोलने पर पति का सिर उड़ा देने की धमकी दी गई है। लेकिन मोहल्ले वालों ने विमलेश के चेहरे का डर पहचान लिया। उन्होंने जिद की कि देवीशंकर को बाहर लाकर बात तो कराओ। इस पर राहुल ने उन्हें समझाकर बाहर भेज दिया। इस दौरान उन्होंने बंधक बनाने का इशारा किया, लेकिन सब लोग नहीं समझ पाए। इसके बाद राहुल को एहसास हो गया कि मोहल्ले वालों को शक हो चुका है। उसने देवीशंकर को पत्नी के कपड़े फैलाने के लिए छत पर भेज दिया। ताकि लोगों को यह लगे कि उनके घर का माहौल सामान्य है। देवीशंकर ने छत से बाहर खड़े लोगों को बंधक होने का इशारा कर दिया और नीचे चले आए। इसके बाद मोहल्ले के लोगों ने पुलिस बुला ली।
जंग लगे तमंचा लेकर आए थे लुटेरे
घर में प्रवेश करने के बाद ही राहुल और उनके साथियों ने देवीशंकर पाठक का मोबाइल कब्जे में ले लिया था। फोन आने पर अपने ही हिसाब के बात कराते थे। इंजीनियर ने बुधवार की शाम को फोन किया तो देवीशंकर ने आवाज न आने की बात कहकर काट दिया था। राहुल ने बताया कि तमंचा उसे उसके दोस्त आवास विकास के रहने वाले आशीष ने दिया था। उसने अपने कई स्टाइल में उसी तमंचे के फोटो कर डाल रखे थे।
दंपति को जहर खिलाकर मारना था
मास्टर माइंड राहुल की प्लानिंग के मुताबिक बैनामा कराने के बाद देवीशंकर और उनकी पत्नी को जहर खिलाकर मारना था। लुटेरों के पास से चूहे मार दवा का एक पैकेट भी मिला है।
पुलिस को कातिब की भी तलाश
पुलिस ने राहुल के करीबी कातिब की भी तलाश शुरू कर दी है। कातिब के बारे में पता कराया जा रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि राहुल ने कहीं और तो इस तरह की वारदात नहीं की है।
डीआईजी ने की पूछताछ
डीआईजी आशुतोष कुमार ने खुद पीड़ित की कहानी सुनकर आरोपियों से पूछताछ की। उन्होंने इंस्पेक्टर से कहा कि यह एकदम नए तरीके का अपराध है। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए इस तरह के अपराध को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करनी होगी। इसलिए गैंग के हर बदमाश से पूछताछ करने के बाद इंट्रोगेशन रिपोर्ट तैयार करके उन्हें भी भेंजे।
सावधान! अपराधियों के निशाने पर हैं बुजुर्ग
शहर के बुजुर्ग लुटेरों के निशाने पर हैं। सुरेश शर्मा नगर में बुजुर्ग महिला उनके पुत्र और पुत्रवधू की हत्या के बाद पुलिस ने सुरक्षा कमेटियों को जागरूक करने के लिए एक-दो दिन अभियान चलाया। इसके बाद फिर इसी कॉलोनी में बुजुर्ग दंपति का मर्डर हो गया। पुलिस ने जैसे-तैसे दोनों सनसनीखेज घटनाओं का खुलासा कर दिया। इन खुलासों पर कई सवाल भी खड़े हुए। इसके बाद गार्डन सिटी में बुजुर्ग महिला दंपति की हत्या हो गई। पुलिस अभी तक भी घटना का खुलासा नहीं कर पाई। सुरक्षा कमेटियों के नाम पर खानापूरी होने के बाद किसी ने आगे कदम नहीं बढ़ाए। चंद कॉलोनियों को छोड़कर कहीं भी सुरक्षा समितियां सही से काम नहीं कर रही हैं।
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देवीशंकर पाठक रेलवे के इज्जतनगर मंडल से मार्च, 2012 में रिटायर होने के बाद पत्नी विमलेश पाठक के साथ थाना बारादरी की दुर्गानगर कॉलोनी डी-8 पार्ट टू में बने अपने घर में रहते हैं। सोमवार चार अप्रैल की रात करीब तीन बजे देवी शंकर पाठक ने मोबाइल पर आई तीन मिस्ड कॉल तो इग्नोर कर दी लेकिन चौथी बार फोन उठा लिया। उधर से आवाज आई कि तुम्हारा पड़ोसी बोल रहा हूं। तुम्हारी मोटर चलने से सड़क पर पानी आ गया है। देवीशंकर पाठक ने दरवाजा खोलकर मोटर बंद की और जैसे ही अंदर जा के लिए मुड़े, सीढ़ी की तरफ से आए चार लड़कों ने कनपटी पर बंदूक रखकर उन्हें दबोच लिया। बदमाशों ने देवीशंकर को अंदर ले जाने के बाद कुर्सी से हाथ बांध दिए । उन्होंने अलमारी और संदूक की चाबी लेकर जेवर और 12 हजार रुपये की नकदी निकाल ली। मंगलवार सुबह करीब दस बजे लुटेरों ने संदूक में रखी चेक बुक और पास बुक निकाल ली और बुजुर्ग दंपति को गन प्वाइंट पर लेकर खाली चेक पर उनके हस्ताक्षर करा लिए। उनके दो साथी चेक लेकर बैंक पहुंचे। बैंक वालों से देवीशंकर की बात करा दी। उनके साथियों ने असलहों के बल पर धमका कर कहलवाया कि मेरी पत्नी बीमार है। आप इन लड़कों को रुपये दे दो। यह रिश्तेदार हैं।
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छह अप्रैल बुधवार को संदूक में मिले मकान के कागजात देखकर लुटेरों को लालच आ गया। विमलेश पाठक ने अपने छोटे बेटे अंकित पाठक के नाम मकान की वसीयत करा रखी थी। दोपहर करीब दो बजे ऑटो रिक्शा से दो बदमाश विमलेश पाठक को रजिस्ट्रार के ऑफिस ले गए। उनके पति उनके दो साथियों के कब्जे में थे। विमलेश से लुटेरों ने कहा कि तुम्हें 12 अनाथ बच्चों के नाम यह मकान कराना है। इसलिए वसीयत खारिज करानी है। यह रजिस्ट्रार के सामने कह देना। डर की वजह से उन्होंने ऐसा ही कर दिया और वसीयत खारिज कर दी। आसपास के लोगों को उनका व्यवहार कुछ खटका तो बृहस्पतिवार को पड़ोसियों ने देवीशंकर का दरवाजा खटखटाया लेकिन उन्होंने नहीं खोला। फोन पर भी लुटेरों ने पड़ोसी से बात नहीं होने दी। इस पर लोगों ने देवीशंकर का घर घेर लिया। देवीशंकर पर नजर पड़ी तो तो उन्होंने इशारे में बता दिया कि वे तो बंधक बने हैं। घर में ही तीन बदमाश पकड़े गए। इनमें से राहुल कुमार गंगवार निवासी ग्राम रजपुरा, थाना मिलक, जिला रामपुर गैंग का सरगना है। बाकी चेतन अरोड़ा और उनका नाबालिग साथी संजयनगर कॉलोनी का रहने वाला है। चौथा साथी संजय कुमार मीरगंज का रहने वाला बताया जा रहा है। प्रभारी निरीक्षक कमरुल हसन ने बताया कि बदमाशों से सोने के दो आइटम और 27 हजार रुपये बरामद हो गए हैं।
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दुर्गानगर कॉलोनी कांड में हुई वारदात का तरीका जो सुन रह रहा है सन्न रह जा रहा है। पुलिस के तमाम अफसर भी 55 घंटे तक लुटेरों के कब्जे में रहे बुजुर्गों की बातें सुनकर दहलते रहे। सोमवार की रात तीन बजे से गुरुवार को दस बजे आजाद होने तक बुजुर्ग दंपति यही सोचती रही कि कौन सी घड़ी आखिरी हो जाए। उन्होंने तो तय कर लिया था कि सबकुछ लेकर हमारे लिए घर का टिकट कटा दो हम चले जाएंगे। एक दो बार विरोध करने की भी कोशिश देवी शंकर ने की लेकिन लुटेरों के आगे एक न चली। लुटेरो जो चाहते करवाते रहे। 55 घंटे तक क्या गुजरी बुजुर्गों पर जानिए उन्हीं की जुबानी।
बस किसी तरह बच गई जान
हम तो सीधे साधे लोग हैं। फोन आया तो सोचा किसी को परेशानी न हो, इसलिए मोटर बंद करने के लिए घर से निकल आए। स्विच बंद करते ही चार लोगों ने मुझे दबोचा तो एहसास हुआ लुटेरों के चंगुल में हूं। विरोध करने की कोशिश भी की, लेकिन तमंचा कनपटी पर रखा तो जुबान बंद हो गई। लाबी में ले जाने के बाद मुझे कुर्सी के बांधकर मुंह पर टेप लगा दिया। विमलेश कमजोर और सीधी स्वाभाव की हैं, इसलिए वह यूं ही डरी हुई थीं। सुबह ही चार बजे विमलेश से अलमारी और संदूक की चाभी मांगी और घर खंगालना शुरू कर दिया। जेवर, 12 हजार रुपये थे जो ले लिए। चेक बुक देखा तो मेरे पास लाए और चेक पर साइन करा लिया। खाते में एक लाख रुपये थे। मंगलवार को सुबह 10.30 बजे दो घर में रह गए और दो लुटेरे चेक लेकर बैंक चले गए। मुझे और विमलेश से कहा चालाकी मत करना। इस दौरान घर में रहे दोनों लुटेरे कुर्सी पर बैठकर तमंचा ताने रहे। उनके साथी बैंक से चेक से एक लाख रुपये निकालने के बाद घर आ गए। उस रात को खाने को भी कुछ नहीं मिला। रात को हाथ खोलने के बाद विमलेश और उसे बेड पर सुला दिया। मोबाइल पहले ही छीन लिया था इसलिए हम किसी को बता भी नहीं पा रहे थे। दो बदमाश उनके पास चारपाई पर सोए और दो बैठक में सो गए। बुधवार को लुटेरा संजय कुमार अपने एक साथी को लेकर विमलेश को रजिस्ट्री ऑफिस ले गया। वह वसीयतनामा खारिज कराने के बाद लौटा तो मुझे लगा आज हमारी जिंदगी का आखिरी दिन है, क्योंकि चारों लुटेरों के इरादे अच्छे नहीं थे। लुटेरों ने जैसे ही यह कहा कि बृहस्पतिवार को काम यानी मकान का बैनामा होने के बाद आपको अच्छी जगह पहुंचा देंगे। दहशत में किसी तरह से रात तो गुजर गई। बृहस्पतिवार की सुबह मोहल्ले वाले जुटने लगे तो कुछ उम्मीद बंधी। दरवाजे खटखटाने पर एक बार विमलेश को भेजा तो डर में उन्होंने यही कहा कि रिश्तेदार आए हैं हमारी देखरेख के लिए। पड़ोसियों का शक फिर खत्म नहीं हुआ और बुजुर्ग को बुलाने पर अड़ गए तो पोल आखिर खुल गई।
अब भी डर से कांप रहीं विमलेश
हमने तो कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह की वारदात हमारे साथ होगी। सोमवार की रात बदमाश घर में घुसकर अपनी मनमानी शुरू की तो उनकी जुबान नहीं खुल रही थी। डर की वजह से चीख भी नहीं निकली। आते ही उन्होंने पति को कुर्सी के बांध दिया था। इसके बाद जैसे वह कहते गए मैं वही करती गई। वह डरा धमकाकर रजिस्ट्री ऑफिस ले गए। वहां भी मैंने वही कहा जो वह समझाकर ले गए थे। अगले दिन भी वह जाने को तैयार थीं, लेकिन इसी बीच मोहल्ले के लोगों को शक हो गया। हमने तो यह सोचा था कि किसी तरह जान बच गई तो अपने गांव भाग जाएंगे। बदमाशों की कैद में रहने के दौरान भूख भी नहीं लगी। वह जबरन खाना खिलाते थे। पानी पीने के लिए भी जबरदस्ती करते थे।
दो महीने पहले कूड़े वाला बनकर की थी रेकी
राहुल ने पुलिस को बताया कि दो महीने पहले कूड़ा लेने वाला बनकर वह बुजुर्ग दंपति के घर गया था। वहां उसने देवीशंकर पाठक के दरवाजा खोलते ही पूछा कि आपके घर में कितने लोग रहते हैं। जितने लोग होंगे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन उतने ही रुपये लगेंगे। देवीशंकर ने बताया कि हम तो सिर्फ दो ही लोग हैं। इस पर राहुल ने बताया कि 85 रुपये लगेंगे। देवीशंकर ने इसके अलावा अपने दोनों बेटों की डिटेल भी नोट करा दी थी। फार्म पर फोन नंबर भी लिख दिया था जिसका बाद में लुटेरों ने इस्तेमाल किया।
यह माल लूटा गया
दो सोने की चेन, तीन तोले, एक पायल(चांदी), कान के फूल, एक अंगूठी, 12 हजार रुपये नकद।
इंजीनियर के शक ने बचाई जान
देवीशंकर रोजाना सुबह सवेरे ही अपने आंगन में लगे पौधों पर पानी छिड़कते दिख जाते थे। मंगलवार की सुबह वह दिखाई नहीं दिए। इसके बाद बाद बुधवार को भी नजर नहीं आए और दो लड़कों को उनके घर से पड़ोस में रहने वाले निजी कंपनी के इंजीनियर देवेंद्र कुमार गंगवार ने आते जाते देख लिया था। देवेंद्र ने पहले तो शाम को ही देवीशंकर पाठक का दरवाजा खटखटाया। बृहस्पतिवार को उन्होंने पड़ोस में रहने वाले हेड बंदी रक्षक हरपाल सिंह को यह बात बता दी। इसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। नतीजा यह रहा था कि लुटेरे पकड़े गए और बुजुर्ग दंपति की जान बच गई।
इशारे ने बिगाड़ दिया राहुल का खेल
बृहस्पतिवार की सुबह मोहल्ले वालों के बुजुर्ग दंपति का मकान घेर लेने के बाद राहुल ने अंदर से पहले विमलेश को समझाकर गेट पर भेजा। विमलेश ने बताया कि उनके पति की तबियत खराब है। इसलिए लेटे हुए हैं। यह लड़के हमारी सेवा कर रहे हैं। दवा वगैरह लाकर दी है। हमारे रिश्तेदार लगते हैं। विमलेश को राहुल के बताए शब्द न बोलने पर पति का सिर उड़ा देने की धमकी दी गई है। लेकिन मोहल्ले वालों ने विमलेश के चेहरे का डर पहचान लिया। उन्होंने जिद की कि देवीशंकर को बाहर लाकर बात तो कराओ। इस पर राहुल ने उन्हें समझाकर बाहर भेज दिया। इस दौरान उन्होंने बंधक बनाने का इशारा किया, लेकिन सब लोग नहीं समझ पाए। इसके बाद राहुल को एहसास हो गया कि मोहल्ले वालों को शक हो चुका है। उसने देवीशंकर को पत्नी के कपड़े फैलाने के लिए छत पर भेज दिया। ताकि लोगों को यह लगे कि उनके घर का माहौल सामान्य है। देवीशंकर ने छत से बाहर खड़े लोगों को बंधक होने का इशारा कर दिया और नीचे चले आए। इसके बाद मोहल्ले के लोगों ने पुलिस बुला ली।
जंग लगे तमंचा लेकर आए थे लुटेरे
घर में प्रवेश करने के बाद ही राहुल और उनके साथियों ने देवीशंकर पाठक का मोबाइल कब्जे में ले लिया था। फोन आने पर अपने ही हिसाब के बात कराते थे। इंजीनियर ने बुधवार की शाम को फोन किया तो देवीशंकर ने आवाज न आने की बात कहकर काट दिया था। राहुल ने बताया कि तमंचा उसे उसके दोस्त आवास विकास के रहने वाले आशीष ने दिया था। उसने अपने कई स्टाइल में उसी तमंचे के फोटो कर डाल रखे थे।
दंपति को जहर खिलाकर मारना था
मास्टर माइंड राहुल की प्लानिंग के मुताबिक बैनामा कराने के बाद देवीशंकर और उनकी पत्नी को जहर खिलाकर मारना था। लुटेरों के पास से चूहे मार दवा का एक पैकेट भी मिला है।
पुलिस को कातिब की भी तलाश
पुलिस ने राहुल के करीबी कातिब की भी तलाश शुरू कर दी है। कातिब के बारे में पता कराया जा रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि राहुल ने कहीं और तो इस तरह की वारदात नहीं की है।
डीआईजी ने की पूछताछ
डीआईजी आशुतोष कुमार ने खुद पीड़ित की कहानी सुनकर आरोपियों से पूछताछ की। उन्होंने इंस्पेक्टर से कहा कि यह एकदम नए तरीके का अपराध है। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए इस तरह के अपराध को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करनी होगी। इसलिए गैंग के हर बदमाश से पूछताछ करने के बाद इंट्रोगेशन रिपोर्ट तैयार करके उन्हें भी भेंजे।
सावधान! अपराधियों के निशाने पर हैं बुजुर्ग
शहर के बुजुर्ग लुटेरों के निशाने पर हैं। सुरेश शर्मा नगर में बुजुर्ग महिला उनके पुत्र और पुत्रवधू की हत्या के बाद पुलिस ने सुरक्षा कमेटियों को जागरूक करने के लिए एक-दो दिन अभियान चलाया। इसके बाद फिर इसी कॉलोनी में बुजुर्ग दंपति का मर्डर हो गया। पुलिस ने जैसे-तैसे दोनों सनसनीखेज घटनाओं का खुलासा कर दिया। इन खुलासों पर कई सवाल भी खड़े हुए। इसके बाद गार्डन सिटी में बुजुर्ग महिला दंपति की हत्या हो गई। पुलिस अभी तक भी घटना का खुलासा नहीं कर पाई। सुरक्षा कमेटियों के नाम पर खानापूरी होने के बाद किसी ने आगे कदम नहीं बढ़ाए। चंद कॉलोनियों को छोड़कर कहीं भी सुरक्षा समितियां सही से काम नहीं कर रही हैं।