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फर्जी एकाउंट खोलकर सौंप देते हैं नाइजीरियन को

Fri, 06 May 2016 12:44 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Fri, 06 May 2016 12:44 AM IST
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Fake account opening are passed on to Nigerian
ठग
रु हेलखंड में नाइजीरियन ठगों ने अपना बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया है। बरेली के अलावा आसपास के सभी जिलों में लॉटरी निकलने के बहाने ये लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं। यहां उनके गुर्गे फर्जी आईडी के जरिए बैंकों में खाते खुलवाने के बाद उन्हें पांच हजार रुपये में बेच देते हैं। इन खातों में आने वाली ठगी की रकम में से खाता खुलवाने वालों को दो फीसदी कमीशन मिलता है। बुधवार को फर्जी खाता खोलते गिरफ्तार दो जालसाजों ने जब यह खुलासा किया हड़कंप मच गया। नाइजीरियन ठगों के गुर्गों के तीन बैंकों में छह फर्जी खाते अभी तक पकड़ में आए हैं। उन्हें पुलिस ने फिलहाल सीज करा दिया है।
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पुलिस की अब तक की छानबीन में पता लगा कि असली खिलाड़ी तो दिल्ली में नाइजीरियन ठगों के साथ रहने वाला मुजाहिद का भाई है। वही पश्चिमी यूपी में अपना नेटवर्क बिछा रहा है। कमाई के चक्कर में उसने अपने रिश्तेदारों को भी इस धंधे से जोड़ दिया है। बुधवार को भारतीय स्टेट बैंक की डेलापीर शाखा फर्जी एकाउंट खुलवाने आए सीबीगंज के धंतिया गांव के रिजवान और मुजाहिद के पकड़े जाने के बाद नाइजीरियन ठगों के इस गैंग का खुलासा हुआ है। पुलिस ने पकड़े गए ठगों के दोनों गुर्गों को जेल भिजवा दिया है। पूछताछ में पुलिस को मुजाहिद ने बताया कि वह छह महीने से नाइजीरियन ठगों के गैंग से जुड़ा है। खाते खुलवाकर वह ठगी के करीब सात लाख रुपये इधर से उधर कर चुका है। सीओ तृतीय एएसपी आकाश तोमर ने बताया कि मुजाहिद और उसके साथी से पूछताछ के दौरान तीन बैंकों में छह फर्जी खाते मिले हैं। उन खातों को सीज करा दिया है। कई बड़े ठगों के बारे में भी जानकारी मिली है। लाटरी के नाम पर ठगी करने वाले इस गैंग का पूरी तरह खुलासा करने के  लिए टीम को लगा दिया है। इस गैंग के कुछ और लोग जल्द ही पकड़ में आएंगे।    
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फर्जी आईडी से बनवाते हैं असली पैन कार्ड
नाइजीरियन ठगों के गुर्गे फर्जी आईडी में पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए पैनकार्ड असली बनवा लेते हैं। इसके जरिए उनका बैंक में खाता आसानी से खुल जाता है। खाता खुलते ही उसका एटीएम और खाते की जानकारी नाइजीरियन को देते हैं।
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इन्हीं फर्जी खातों में आती है ठगी की रकम
फर्जी खातों की सारी जानकारी नाइजीरियन को देने के बाद एटीएम कार्ड भी सौंप दिया जाता है। अब इस खाते का संचालन नाइजीरियन करते हैं। ठगी की रकम इसमें वे मंगाते हैं और बाद में खुद ही निकालते हैं। फर्जी खाते वाले को दो फीसदी कमीशन मिलता है। खाता खोलते समय बैंक में मोबाइल नंबर नाइजीरियन का ही दर्ज कराया जाता है। जिससे उनके मोबाइल पर बैंक से मैसेज आता रहता है। कुछ ठग तो ऑनलाइन ही फर्जी खातों से पैसा ट्रांसफर कर लेते हैं। 

दिल्ली में ठगों ने बना रखा है हेडक्वार्टर 
बरेली। साइबर ठगों के इस गैंग ने दिल्ली के पालम इलाके में हेडक्वार्टर बना रखा है। यहां से नेटवर्क चलाकर वे देश भर में तमाम लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुका है। बरेली के प्रेमनगर इलाके में इससे पहले पकड़े गए ठगों में से एक नेम्डी किग्लेस अकोसा नाइजीरिया का रहने वाला था। दूसरा मार्क ब्लेस्ड सैमुअल साउथ अफ्रीका का। बरेली में उन्होंने प्रेमनगर इलाके की नैनीताल रोड स्थित कॉलोनी अशोक नगर में रहने वाले ओएनजीसी के रिटायर्ड अधिकारी रामचंद्र को अपना शिकार बनाया था। दोनों उनसे काफी रकम ठग चुके थे और लॉटरी में निकली दो मिलियन डॉलर की रकम उनके सुपुर्द करने से पहले उनसे एक लाख रुपये की और ठगी करने के लिए बरेली आए थे। पुलिस ने उनके पास से भारी मात्रा में नकली डॉलर बरामद किए थे। 


पहले भी पकड़े जा चुके हैं दो ठग
17 अगस्त 2014 को क्राइम ब्रांच ने शाहजहांपुर के तिलहर निवासी दो भाइयों आनंद गुप्ता उर्फ राम और संजय गुप्ता को पकड़ा था। वे ऐसे गैंग से जुड़े थे जो मोबाइल पर एसएमएस भेजकर करोड़ों की लाटरी निकलने का झांसा देकर लाखों ठग लेता था। उनका आका रामपुर के कैमरी निवासी जावेद उर्फ विक्की फरार अभी भी फरार है। पुलिस छानबीन में गैंग के तार नाइजीरिया से जुडे़ होने की बात सामने आई थी।
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