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करोड़ों की मालकिन की लाश का अंगूठा कहां लगा

Fri, 22 May 2015 01:05 AM IST
बरेली
बरेली Updated Fri, 22 May 2015 01:05 AM IST
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करोड़ों की संपत्ति की मालकिन इस बुजुर्ग महिला की कहानी कई बार अमर उजाला में छप चुकी है। उसकी संपत्ति के लिए कई लोगों के बीच खींचतान चल रही थी। आखिरकार बृहस्पतिवार को उसने एक अस्पताल में दम तोड़ दिया लेकिन पुलिस जब लाश का पंचनामा भरने पहुंची तो उसके अंगूठे पर मिले स्याही के निशान ने नया सवाल खड़ा कर दिया कि किसी ने उसके मरने के बाद कुछ लिखकर उसका अंगूठा लगाया है। ऐसा करने वाला शख्स कौन है और उसने क्या लिखकर वृद्धा का अंगूठा लगाया है यह तो पुलिस अभी पता नहीं लगा सकी है, लेकिन इसके बाद करोड़पति वृद्धा की लाश को लेकर हुई खींचतान ने उसकी संपत्ति के विवाद को और साफ कर दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अंतत: उनका अंतिम संस्कार उनके भतीजे ने किया। संपत्ति विवाद के कारण महीने भर पहले चर्चा में आई वृद्ध महिला कमलेश जुनेजा के नाम प्रेमनगर इलाके में चार मकानों समेत करीब दस करोड़ रुपये की संपत्ति है लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक अंतिम दिनों में वह खाने तक को मोहताज थीं। उन्हें कई दिनों से ठीक से खाना नहीं मिला था।

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पुलिस के मुताबिक मानस अस्पताल के  पास पांच सौ गज एरिया में बनी जिस कोठी में कमलेश रहती थीं, वह अहमदाबाद में रहने वाले उनके भाई सुरेंद्र जुनेजा के नाम बताई गई है। उनका बेटा सन्नी कोठी का असली वारिस है। वर्ष 2012 में शहर के एक कॉलोनाइजर ने कमलेश और उनके भाई-बहन को 15 लाख रुपये देकर इस कोठी का एग्रीमेंट करा लिया था। एग्रीमेंट में कोठी की कीमत करीब करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई थी लेकिन बैनामा नहीं कराया गया था। कमलेश और राजकुमारी बैनामा कराने के लिए कॉलोनाइजर के चक्कर लगाती रहीं। फिर थक हारकर घर बैठ गईं मगर इसके बाद उन्होंने भी बैनामा कराने के मना कर दिया। दो फरवरी को कॉलोनाइजर ने कमलेश, उनकी बहन राजकुमारी और भाई सुरेंद्र जुनेजा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। यहां तैनात रहे इंस्पेक्टर जेके तोमर ने इस मामले में कमलेश और उनकी बहन की बहुत मदद की थी। उनकी दो बहनों सावित्री और रमेश कुमारी की पहले ही मौत हो गई थी। मार्च के तीसरे सप्ताह में तीसरी बहन राजकुमारी की भी सांसें थम गई थीं।
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पेशे से शिक्षिका रहीं कमलेश प्रहलादपुर गांव में लंबे समय तैनात रही थीं। वहीं की रहने वाली शिक्षिका प्रवेश यादव का उनके घर आना-जाना था। पंद्रह दिन पहले वह कमलेश से मिलने आई तो उनसे बातचीत के बाद उनकी सेवा के लिए यहीं रहने लगीं। बुधवार की रात कमलेश की मौत हुई तो उनका शव लेने के लिए खींचतान मच गई। सूचना मिलने पर कमलेश के भाई जगदीश जुनेजा की पत्नी नीलम जुनेजा उझानी (बदायूं) में रहने वाली अपनी बेटी अंजू, उसके पति श्याम जुनेजा, बदायूं के विजयनगर में रह रही मीनू और उसके पति कृष्ण कुमार के साथ अस्पताल पहुंच गई। नीलम के साथ उनका बेटा सोनू और उसका आठ साल का बेटा जतिन जुनेजा भी था।
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कमलेश के शव को लेकर अस्पताल में भी विवाद होने लगा। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। कृष्ण कुमार ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कमलेश को धीमा जहर देकर मारा गया है। उनका पोस्टमार्टम कराया जाए। पुलिस ने कमलेश का पोस्टमार्टम कराकर शव प्रवेश कुमारी को देने की कोशिश की तो दोनों पक्षों में वहीं नोंकझोंक होने लगी। पुलिस के पहुंचने पर सहमति बनी कि दोनों लोग अंतिम संस्कार करेंगे। कमलेश की चिता को सोनू ने मुखाग्नि दी। प्रभारी निरीक्षक देवेश सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कमलेश जुनेजा की मौत फेफड़े की बीमारी से होने की बात आई है। शव का शांतिपूर्वक अंतिम संस्कार करा दिया गया है।  


प्रवेश यादव से की पूछताछ
पंचनामा भरने के दौरान अंगूठे पर स्याही लगे होने से चौंके चौकी इंचार्ज जितेंद्र सिंह ने शिक्षिका प्रवेश यादव से पूछताछ की। बकौल जितेंद्र, प्रवेश ने बताया कि उन्होंने कमलेश को अस्पताल में भर्ती कराया था, वहां शायद निशान लिया गया हो। पुलिस ने अस्पताल स्टाफ से पूछताछ की। स्टाफ ने बताया कि अस्पताल में मरीज के अंगूठे का निशान लेने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि इसकी जरूरत नहीं पड़ती है। चौकी इंचार्ज ने बताया कि मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में डाल दिया गया है।


मैंने उठाया इलाज का खर्च: प्रवेश कुमारी
हालत खराब होने पर शिक्षिका कमलेश जुनेजा ने आठ मई को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। शिक्षिका प्रवेश कुमारी ने बताया कि 11 मई को उन्हें अस्पताल से निकाल लिया। इसके बाद उन्हें 12 मई को फिर उसी अस्पताल में भर्ती करा दिया। दोनों दफा में करीब 35 हजार रु पये अस्पताल में खर्च हुए। बाकी दवाएं भी बाहर से मंगाई गईं। परिवार वाले अस्पताल जाते थे तो कमलेश भगा देतीं थीं। उनका कहना है कि उन्हें कोई लालच नहीं था। कमलेश जुनेजा का उससे बहुत पुराना लगाव है। वह उन्हीं के गांव में शिक्षिका थीं। उनके कैद होने की खबर मिलने पर वह उनसे मिलने आई तो लिपट गईं और रोने लगीं। कहने लगी तू मेरी कुछ दिन सेवा कर दे। मैं भी अकेली हूं उसने कमलेश की सेवा कर दी। प्रवेश का कहना है कि मुझे काफी धमकाया गया।


फोटो---
कमलेश जूनेजा को खाना ठीक से नहीं मिल रहा था। जिसकी वजह से वह बेहद कमजोर हो गई थीं। इलाज शुरू होने के बाद उनकी सेहत में सुधार हो रहा था, लेकिन बुधवार की रात को अचानक हालत बिगड़ जाने पर उनकी मौत हो गई।
-डॉक्टर महेश गुप्ता

अंगूठा लगाए जाने की बात सामने आई है। इस निशान की कोई वैल्यू नहीं होगी। इस संबंध में सभी आवश्यक विधिक कार्यवाही की जाएगी।
- राजीव मल्होत्रा, एसपी सिटी
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