पुलिस नहीं अब एसटीएफ करेगी जांच
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जयपुर (राजस्थान) में सीएमओ तैनात रहे डॉ.बाल किशन खत्री का नेशनल हाईवे पर कैंट थाने की नकटिया चौकी से कुछ आगे अस्पताल है जिसके पीछे बनी कोठी में उनका परिवार रहता है। 26 अप्रैल की रात नकाबपोश बदमाशों ने उनकी कोठी में घुस कर हथियारों के जोर पर उनकी पत्नी, बेटी और नातिन को कब्जे में ले लिया था और फिर ढाई लाख कैश और करीब 43 लाख के गहने और कीमती मोबाइल लूट ले गए थे। वारदात की सूचना दिए जाने के बाद नकटिया चौकी इंचार्ज रहे एचसीपी जेपी यादव ने इसे चोरी बताकर मामला दबा दिया था। बाद में डकैती दर्ज हुई लेकिन चार दिनों के बाद भी पुलिस कोई महत्वपूर्ण सुराग हासिल नहीं कर पाई। पुलिस ने अब तक सिर्फ अस्पताल के मौजूद स्टाफ और नौकरी छोड़ चुके स्टाफ से पूछताछ की है। पुलिस की असफलता के मद्देनजर अब डकैती के खुलासे के लिए एसटीएफ के साथ हीनियस क्राइम यूनिट और एलआईयू को भी लगाया गया है। तीनों टीमें शुक्रवार दोपहर डॉ. बालकिशन के अस्पताल पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उनकी बेटी डॉ. मोनिका से पूछताछ की।
डॉ. बालकिशन की बेटी डॉ. मोनिका खत्री का कहना है कि भले ही उन्हें गहने पहनना पसंद नहीं हैं लेकिन मेहनत की कमाई से बनाई गई कोई चीज चली जाए तो अफसोस होता ही है। अब गहने मिलेंगे, दिल को यह तसल्ली देने के सिवा कुछ नहीं बचा है। डकैती के पांच दिन बाद भी पुलिस की कार्रवाई का कोई रिजल्ट सामने नहीं आया है।
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इलाके के सभी मोबाइल सर्विलांस पर
घटना की रात सवा दो बजे के आसपास डॉ. बालकिशन के घर के आसपास एक्टिव सभी मोबाइल फोन के नंबर सर्विलांस पर लगाकर उनकी कॉल डिटेल निकाली जा रही है। इससे यह जानने की कोशिश की जा रही है कितने मोबाइल किस-किस से संपर्क में थे। पुलिस को इस कवायद से वारदात का कोई सूत्र हाथ आने की उम्मीद है।
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काम छोड़ने वालों से पूछताछ
बालकिशन अस्पताल से करीब एक साल पहले काम छोड़ चुके कर्मचारी बलवीर से भी पुलिस ने पूछताछ की है। साथ ही डॉक्टर के पड़ोसी छोटू से भी पुलिस ने पूछताछ की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके अलावा पुलिस ने नौकर-नौकरानियों से भी पूछताछ की।
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