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दातागंज में प्रधान की बेटी की हत्या का मामला

बरेली Updated Wed, 08 Apr 2015 01:46 AM IST
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बदायूं की कोतवाली दातागंज के अमरोली गांव के प्रधान अख्तर हुसैन की बेटी रेहाना की हत्या की विवेचना  दो साल बाद भी पूरी नहीं हुई। इस बीच एक के बाद एक नौ विवेचक बदले पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे। यह मामला इतना पेचीदा हो गया है कि एक विवेचक ने नामजद आरोपी वाहिद अली को रंजिशन हत्या करने का आरोपी मानकर जेल भी भेज दिया था, लेकिन उनके बाद जिस विवेचक को विवेचना मिली उन्होंने उसे बरी करा दिया। विवेचना के इस खेल की जांच के बाद सात विवेचकों को एसएसपी ने सीओ की रिपोर्ट पर नोटिस जारी कर दिया है।
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9 अप्रैल 2013 को अमरोली गांव के प्रधान अख्तर हुसैन की बेटी रेहाना के सीने में गोली मारकर सुबह साढ़े तीन बजे हत्या कर दी गई थी। प्रधान का आरोप यह था कि पूर्व प्रधान जमील अहमद, उनके परिवार के ताहिर अली, वाहिद अली समेत चार लोग उसकी हत्या करने के लिए आए थे लेकिन उन्होंने उसकी बेटी रेहाना को मार डाला। बतौर एसओ दातागंज रेहाना की हत्या की विवेचना दरोगा अशोक पाल (इन दिनों डीआईजी ऑफिस में तैनात हैं) ने शुरू की।मौके से खून आदि के नमूनों को उन्होंने विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की जहमत नहीं उठाई। इनके बाद विवेचना तत्कालीन एसओ अलापुर कमल सिंह यादव को दी गई। उन्होंने भी विवेचना में कुछ खास नहीं किया। इसके बाद विवेचना आईजी के आदेश पर क्राइम ब्रांच बरेली आ गई। यहां विवेचना वर्तमान में शाहजहांपुर के रोजा में तैनात इंस्पेक्टर अजीत सिंह को दी गई। उन्होंने भी खानापूरी ही की। उनके शाहजहांपुर चले जाने के बाद विवेचक राजेंद्र प्रसाद हो गए। राजेंद्र प्रसाद इन दिनों क्राइम ब्रांच बाराबंकी में तैनात हैं। उन्होंने भी विवेचना को कागजों में चलाकर आगे बढ़ा दिया। किला इंस्पेक्टर रहे विद्याराम दिवाकर और वीरपाल सिंह भी इस विवेचना में कुछ नहीं कर पाए। क्राइम ब्रांच में तैनाती के दौरान एसएसआई कैंट सियाराम वर्मा को विवेचना मिली तो उन्होंने इसमें वाहिद अली को हत्या का मुल्जिम मानते हुए जेल भेज दिया।  इसके बाद  विवेचना इंस्पेक्टर रनवीर सिंह को मिल गई। उन्होंने वाहिद को बेगुनाह बताते हुए उसे 169 की रिपोर्ट देकर रिहा करा दिया। विवेचना की इस कहानी में  आठवें विवेचक ने मौके से मिले नमूनों को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जबकि पहले की विवेचक को यह काम कर देना चाहिए था। एसएसपी ने विवेचक की तीन बिंदुओं पर सीओ द्वितीय मुकुल द्विवेदी के जांच करा ली। इसमें सात विवेचकों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इससे विवेचकों में हड़कंप मचा हुआ है।  



इन बिंदुओं पर सीओ ने की जांच
1-मृतका के खून से सने कपड़े और मौके पर मिला खून आदि से नमूने जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला क्यों नहीं भेजे गए।
2-विवेचना के दौरान किसी का नाम निकालने और शामिल करने के लिए अधिकारियों से अनुमोदन क्यों नहीं लिया गया।
3-हत्या के समय फौरन ही फोरेंसिक टीम को तत्कालीन एसओ ने मौके पर बुलाने की जरूरत क्यों नहीं समझी।

नए सिरे से हो रही विवेचना
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर टीकाराम भारती को अब यह विवेचना मिली है। उनका कहना है कि नए सिरे में विवेचना की शुरुआत कर रहा हूं। मामला बहुत पेचीदा है। इस मामले में नामजद हुए पूर्व प्रधान जमील अहमद की तो मौत हो गई है। वादी पक्ष के लोगों ने कुछ लोगों ने शपथ पत्र देकर घटना में पूर्व प्रधान पक्ष के लोगों के नाम शामिल होने की बात कही है। जरूरत पड़ेगी को कुछ लोगों के कोर्ट में 164 के बयान भी कराए जाएंगे। 

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