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700 मुकदमों पर कुंडली मारे बैठे हैं 80 दरोगा

बरेली Updated Tue, 07 Apr 2015 01:49 AM IST
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त्वरित न्याय की अवधारणा पर खाकी की सुस्ती भारी पड़ रही है। इसीलिए जिले में पीड़ितों को जल्द न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिल पा रही थी। देहात के 19 थानों में 1100 मुकदमे लंबित पड़े थे। तमाम केस मामूली कारणों से दरोगाओं ने लटका रखे थे तो कई फाइलें सीओ दफ्तर में अनुमोदन के लिए धूल फांक रही थीं। एसपी देहात ने अभियान चलाकर दस दिन में चार सौ विवेचनाएं निस्तारित करा दीं। इनमें कुल 83 एसआर केस (विशेष अपराध आख्या) भी हैं जिनमें से 15 निपटा दिए गए। ज्यादा केस दबाए बैठे विवेचकों को नोटिस दिए गए हैं, रोज ही करीब पांच विवेचक तलब किए जा रहे हैं।
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इस तरह की पेंडेंसी ज्यादा
खत्म कराए केस में विद्युत अधिनियम के करीब 80 मामले थे। अमूमन इन मामलों में बिजली विभाग को जुर्माना मिलने के बाद केस खत्म कर दिया जाता है। बावजूद दरोगा तीन महीने से ज्यादा पुराने केस लटकाए थे। आबकारी के दो दर्जन से ज्यादा केस विवेचक की परीक्षण रिपोर्ट न लगने से अनसुलझे थे। महिला उत्पीड़न के कई मामले पीड़ित के कोर्ट में बयान न होने से पेंडिंग थे। कई केस में कुल आरोपियों में से किसी एक की गिरफ्तारी न होने से चार्जशीट फाइल नहीं हो सकी थी। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी या कुर्की कराकर चार्जशीट दी गई।


  ज्यादा पेंडेंसी वाले कुछ दरोगा
थाना       दरोगा             विवेचनाएं
बहेड़ी      नरेंद्रपाल सिंह    12
देवरनियां   राजेंद्र सिंह        28
बहेड़ी      अलीशेर          16
मीरगंज     धर्मेंद्र सिंह        26
फरीदपुर    विनोद कुमार    16
फरीदपुर    अजय कुमार     14
नवाबगंज   हरगोविंद सिंह   14
भोजीपुरा    जावेद           16
भोजीपुरा    भूपाल सिंह     30

सीओ भी कम नहीं
एडीजी लॉ एंड आर्डर रहे अरुण कुमार गुप्ता ने दरोगाओं की मनमानी रोकने के लिए व्यवस्था की थी कि किसी भी नामजद को मुकदमे से निकालने के लिए सीओ से अनुमोदन लेना जरूरी होगा। तमाम नियम- कायदे खत्म हुए पर अफसर अपनी सहूलियत के लिए इस व्यवस्था को लागू रखे हैं। तमाम मामलों में विवेचनाएं इस वजह से भी लंबित रहती हैं। सीओ बिना किसी लिखा-पढ़ी के फाइल रोक लेते हैं और अनुमोदन नहीं देते। ऐसे में गलत तरीके से नामजद तमाम लोग बरी नहीं हो पाते। यहां तमाम विवेचनाएं इसी वजह से पेंडिंग थी। अफसरों ने संबंधित सीओ को चेताया तो फाइल आगे बढ़ी।

वर्जन
फोटो-
बिना किसी ठोस वजह से पेंडिंग पड़े केस खत्म कराए जा रहे हैं। इससे विभाग का लोड कम होगा और दरोगाओं की अनावश्यक भागदौड़ भी थमेगी। वे कानून व्यवस्था बनाए रखने और जायज विवेचनाओं के प्रभावी निस्तारण को समय दे सकेंगे।- बृजेश श्रीवास्तव, एसपी देहात

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