मां बाप के कत्ल के बाद दहशतजदा एनआरआई सौरभ सिंह बोले
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सौरभ ने बुरे वक्त में पुलिस का सहयोग मिलने पर शुक्रिया अदा किया। कहा कि सिपाही से लेकर आईजी तक से उसने मां बाप के कत्ल के बाद मदद के लिए जो भी कहा तो पूरा रिस्पांस मिला। पुलिस से उसे भरपूर सुरक्षा भी मिली। सौरभ ने पुलिस के खुलासे पर कुछ अधिक कहने से इनकार कर दिया। बोले मैं खुद तो जांच कर नहीं सकता पुलिस जो कह रही है वही सही होगा। इतना जरूर कहा कि जब पिता की लूटी गई घड़ी मिल जाएगी, तो साफ हो जाएगा कि खुलासा सही हुआ। सौरभ ने बताया कि इलेक्ट्रानिक घड़ी उसने अपने पापा को विदेश से भेजी थी। सौरभ ने कहा कि अगर छैमार ने घटना की तो उनकी करतूत साफ दिखती, लेकिन उसके घर का खाने पीने का सामान जरा भी नहीं छुआ गया। जबकि सुना है कि छैमार घटना करते समय शीशम का डंडा अपने साथ लाते हैं और घटना करने के बाद ड्रिंक करकर खाना पीना भी करते हैं और गंदगी भी फैलाते हैं। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे घटना के खुलासे पर सवाल उठना बिल्कुल सही है। इतना सौरभ को जरूर अंदेशा है कि इस घटना के पीछे कोई घर का भेदी है लेकिन इस पर वह खुल कर बोलने को तैयार नहीं हैं।
घर में मिल गई लॉकर की चाभी और लैपटॉप
बरेली। पुलिस जिन दो लैपटॉप को लुटेरों के पास बता रही है, उनमें एक लैपटॉप सौरभ के घर में ही लकड़ी के संदूक और दूसरा कपड़ों में लिपटा मिला। लॉकर की चॉबी भी डबल बेड की रैक में बिछे पेपर के नीचे रखी मिली। इस बरामदगी से पुलिस के खुलासे पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सीबीगंज की स्टेट बैंक शाखा में स्थित इंजीनियर दंपति का लॉकर चाबी न मिलने पर बृहस्पतिवार तीन से चार बजे के बीच टूटना था। बैंक प्रबंधन ने लॉकर तोड़ने के लिए टीम भी बुला ली थी, लेकिन दोपहर दो बजे घर खाली करते समय चॉबी मिल जाने पर इसकी सूचना बैंक प्रबंधक को दी गई। चॉबी का नंबर बैंक से जारी लॉकर के नंबर से मैच खा गया जिससे लॉकर टूटने से बच गया।
00
मां के हाथ के बने पापड़ देखे तो भर आईं आंखें
सौरभ ने बताया कि उसे आलू के पापड़ बेहद पसंद हैं। वह फिनलैंड से जब भी बरेली आता, तब उसकी मां उसके लिए पहले से ही पापड़ तैयार कर रख लेती थीं। इस बार भी जुलाई में उसके घर आने का कार्यक्रम था। इसलिए मां ने आलू के पापड़ बनाकर डिब्बे में पैक करके उसके लिए रखे। बृहस्पतिवार को सामान खाली करने के दौरान जब ये पापड़ सौरभ ने देखे तो वह सुबक-सुबक कर रोने लगा।
00
हमेशा पास रखूंगा मम्मी की पत्थर की माला
घर का सामान खाली करते समय मां- बाप की जो भी चीज सौरभ को मिलती तो वह उसे सीने से लगा लेता। घर में मां आशा की पत्थर की माला मिली, जो सौरभ ने पैक कर अन्य सामान में रखने के बजाए अपने गले में डाल ली। कहा कि ये माला वह अपने पास हमेशा रखेगा, क्योंकि अब उसके पास मां- बाप की चीज की यादों के अलावा कुछ नहीं बचा। बरेली में उसका सब कुछ छीन लिया गया।
00
काश दोस्त की बात मान लेते
मथुरा रिफायनरी में इंजीनियर गोपेश्वर सिंह के साथ अशोक सक्सेना भी काम करते थे। दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। वर्ष 1998 में गोपेश्वर सिंह ने सुरेश शर्मा नगर में मकान बनाया तो पास में ही अशोक सक्सेना ने भी मकान बना लिया, लेकिन उन्हें बरेली का माहौल शायद पसंद नहीं आया, जिससे उन्होंने अपना परिवार मथुरा में ही शिफ्ट कर दिया और यहां दीवार पर लिखवा दिया मकान बिकाऊ है। वह मकान की चॉबी भी गोपेश्वर को ही दे गए थे। जो भी खरीददार आता तो वह उसे मकान दिखाते थे। सीबीगंज में आईटीआर कॉलोनी निवासी बड़े भाई वीर सिंह ने कहा कि उन्होंने ही नहीं, बल्कि दोस्त अशोक सक्सेना ने भी गोपेश्वर से सुरेश शर्मा नगर छोड़ने को कहा था, लेकिन वह नहीं माने। अब सभी कहते हैं कि काश वह बात मान जाते तो शायद दंपति की जान बच जाती।