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अब वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी बंदियों की पेशी
बरेली
Updated Thu, 12 Mar 2015 01:39 AM IST
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पुलिस-प्रशासन के लिए राहत भरी खबर है। पहली अप्रैल से जिला जेल के बंदियों की अदालत में पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ऑनलाइन होगी। बुधवार को जेल और अदालत दोनों जगह वीसी उपकरणों का ट्रायल किया गया जो सफल रहा। सोमवार से बतौर ट्रायल बंदियों की जेल से अदालत के बीच वीसी के जरिए पेशी होगी। जून से सेंट्रल जेल के बंदियों की भी ऑनलाइन पेशी कराने की योजना है।
जिला जेल के अधीक्षक आरके मिश्रा ने बताया कि बनारस और कानपुर के बाद अब बरेली की अदालत में भी बंदियों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज शर्मा और अपर जिला जज संजय खरे ने बुधवार को इसका सफल ट्रायल किया। पहले चरण में रिमांड पर पेश होने वाले आरोपियों की ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट के न्यायालयों में पेशी होगी। इससे हर रोज करीब 150 बंदियों को जेल से अदालत तक ले जाने के लिए होने वाली मशक्कत से राहत मिलेगी। अपर जिला जज और जिला न्यायाधीश के न्यायालय में फिलहाल यह व्यवस्था नहीं होगी।
अगले चरण में चार्जशीट दाखिल होने वाले बंदियों की भी इसी तरह पेशी कराने की योजना है। इनके बारे में फैसला करने से पहले न्याय विभाग से विधिक राय ली जाएगी। शासन से विधिक राय मिलने के बाद बड़ी अदालतों के बारे में फैसला लिया जाएगा। जेल अधीक्षक का कहना है कि इस व्यवस्था से अदालत ले जाते समय बंदियों पर हमले होने की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। साथ ही बंदियों को ले जाने के लिए पुलिस बल भी नहीं लगाना होगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विभिन्न अदालतों के लिए समय तय होगा। इसके लिए जेल, जिला प्रशासन और न्याय अधिकारियों के बीच बैठक होगी, जिसमें विभिन्न अदालतों में अपराधियों की पेशी के लिए प्रतिदिन का समय निर्धारित होगा।
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बरेली का सॉफ्टवेयर प्रदेश में लागू होगा
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जिला जेल के अधीक्षक आरके मिश्रा ने बताया कि बनारस और कानपुर के बाद अब बरेली की अदालत में भी बंदियों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज शर्मा और अपर जिला जज संजय खरे ने बुधवार को इसका सफल ट्रायल किया। पहले चरण में रिमांड पर पेश होने वाले आरोपियों की ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट के न्यायालयों में पेशी होगी। इससे हर रोज करीब 150 बंदियों को जेल से अदालत तक ले जाने के लिए होने वाली मशक्कत से राहत मिलेगी। अपर जिला जज और जिला न्यायाधीश के न्यायालय में फिलहाल यह व्यवस्था नहीं होगी।
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अगले चरण में चार्जशीट दाखिल होने वाले बंदियों की भी इसी तरह पेशी कराने की योजना है। इनके बारे में फैसला करने से पहले न्याय विभाग से विधिक राय ली जाएगी। शासन से विधिक राय मिलने के बाद बड़ी अदालतों के बारे में फैसला लिया जाएगा। जेल अधीक्षक का कहना है कि इस व्यवस्था से अदालत ले जाते समय बंदियों पर हमले होने की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। साथ ही बंदियों को ले जाने के लिए पुलिस बल भी नहीं लगाना होगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विभिन्न अदालतों के लिए समय तय होगा। इसके लिए जेल, जिला प्रशासन और न्याय अधिकारियों के बीच बैठक होगी, जिसमें विभिन्न अदालतों में अपराधियों की पेशी के लिए प्रतिदिन का समय निर्धारित होगा।
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बरेली का सॉफ्टवेयर प्रदेश में लागू होगा
बरेली। कारागार में बंदियों से मिलाई के कंप्यूटराइज्ड सॉफ्टवेयर को दूसरे जिलों में लागू कराने की तैयारी है। यहां के सॉफ्टवेयर के आधार पर 13 और 14 मार्च को एनआईसी लखनऊ में प्रदेश के जिला सूचना विज्ञान अधिकारियोें की वर्कशाप होगी। जिसमें बरेली एनआईसी के वरिष्ठ बैज्ञानिक मनोज शर्मा टिप्स देंगे। जून से प्रदेश की अन्य जिलों में इस कंप्यूटराइज्ड सिस्टम को लागू करने की योजना है।