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खबरदार अब किसी दलित को निरीह न समझना

Wed, 30 Mar 2016 12:59 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Wed, 30 Mar 2016 12:59 AM IST
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 Beware not understand any longer innocent Dalit
मी‌िटटिंग
पुलिस लाइंस सभागार में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के संशोधनों की जानकारी देने के लिए हुई कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा किनए संशोधन में पंद्रह और अत्याचारों को अपराध की श्रेणी में शामिल करके उनकी सजा तय कर दी है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र रोहित वेमूला की मौत के बाद नए संशोधनों को 26 जनवरी से लागू भी कर दिया गया है। इससे दलितों को जल्द इंसाफ मिलेगा। नए संशोधन में किए प्रावधानों में सबकी जिम्मेदारी तय कर दी है। इसमें जिस स्तर से लापरवाही होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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मंगलवार की सुबह ग्यारह बजे कार्यशाला का उद्घाटन आईजी विजय सिंह मीना ने किया। बरेली कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 31 दिसबंर 2015 को लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद सरकार ने 26 जनवरी को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) संशोधन को पंद्रह और नए अत्याचारों को अपराध की श्रेणी में रखकर लागू कर दिया। अब कुल मिलाकर दलितों पर 37 तरह से अत्याचार ऐसे हो गए जिन्हें अपराध की श्रेणी में रखा गया है। नए संशोधन के तहत 60 दिन में विवेचना पूरी करनी होगी। आर्थिक और सामाजिक बायकॉट करने वालों के खिलाफ भी नए संशोधन के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। मेला ढुलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी नए संशोधन में प्रावधान है। ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुरेश चंद्र साहू हाईकोर्ट की रुलिंग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दलितों के मामलों में उम्र को लेकर काफी दिक्कतें आती हैं। मुकदमा ज्यादा दिनों चलने की वजह से गवाह मुकर जाते हैं। कुछ मामलों में समझौते हो जाते हैं। इस मौके पर डीआईजी आशुतोष कुमार, एसएसपी आरके भारद्वाज, एसपी ट्रैफिक ओपी यादव, सीओ तृतीय आकाश तोमर, समेत कई अधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।
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 इस तरह होगी कार्रवाई
1-एफआईआर: मुकदमा लिखने के बाद पुलिस दलितों को पढ़कर सुनाएगी। संतुष्ट होने के बाद भी दलितों के उस पर हस्ताक्षर होंगे। एफआईआर के बाद तुरंत ही उन्हें उसकी एक काफी दी जाएगी।
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2-विवेचना: पुलिस को दलित उत्पीड़न के मामलों की विवेचना को हर हाल में 60 दिन में पूरा करना होगा। यदि किसी वजह से देरी होती है तो उसका जवाब देना पड़ेगा। विवेचना के हर स्टेप की वीडियो रिर्काडिंग कराई जानी है।
3-कोर्ट में ट्रायल: दलित उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई के लिए हर जिले में अलग के न्यायालय स्थापित होंगे। जिन जिलों पहले से न्यायालय हैं, वहां सिर्फ दलित उत्पीड़न के मामलों की डे टू डे सुनवाई होनी है।     

ये अत्याचार अपराध में शामिल 
जूता चप्पल की माला पहनाना, बाल और मूछ मुड़वाना, सर पर मैला ढुलवाना, जबरन दफन के लिए कब्र खुदवाना, महिलाओं को घूरना, जाति सूचक शब्द, आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार करना, अखाद्य पदार्थ खिलाने या पिलाने को मजबूर करना, चेहरा पोतकर घुमाना और बल पूवर्क कपड़े उतरवाना, भूमि पर कब्जा करना और कहीं से भी पानी लेने से रोकना,  बेगार कराना मतदान कराने के लिए धमकाना, सार्वजनिक स्थान पर दलित का अपमान करना, अधिकारियों को गलत जानकारी देकर नुकसान पहुंचाना, किसी दलित के खिलाफ झूठे आरोपों में कार्रवाई करना।


राइट टू विक्टम: दलित पीड़ितों को यात्रा भत्ता, भरण पोषण, मुआवजा तुरंत मिलेगा। इसके लिए जिलाधिकारी को जिम्मेदार बनाया गया है। आरोपी को खुद सिद्ध करना होगा कि वह यह नहीं जानता था कि पीड़ित दलित है।   
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