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खबरदार! अपराधी चला रहे हैं ऑटो
Updated Mon, 20 Feb 2017 01:00 AM IST
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खबरदार! अपराधी चला रहे हैं ऑटो
- फोटो : Beware! Criminals run auto
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महिला के साथ कोई अनहोनी हो जाती तो एक फिर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता, लेकिन इस तरह की घटनाएं न हो इसे रोकने के लिए कोई आगे नहीं आना चाहता। यहां तक की जिम्मेदार विभाग भी चुप्पी साधे हुए हैं। दो साल पहले संभागीय परिवहन विभाग की ओर से ऑटो चालकों और मालिकों का सत्यापन कार्य शुरू हुआ था, लेकिन इसमें यातायात पुलिस ने कोई दिलचस्पी नहीं ली तो मात्र सौ से 150 चालकाें का सत्यापन होने के बाद काम रुक गया। आज स्थिति ये है कि शहर में ऑटो चालक के रूप में अपराधी घूम रहे हैं। कब किस यात्री के साथ घटना हो जाए इसकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।
ऑटो चालकों को पुलिस और प्रशासन का किस तरह से संरक्षण प्राप्त है उसे इस तरह से समझा जा सकता है। जंक्शन पर डीआरएम की ओर से साफ निर्देश हैं कि 300 से ज्यादा ऑटो नहीं खड़े होंगे लेकिन यहां एक दिन में एक हजार ऑटो खड़े होते हैं। जंक्शन की पुलिस इनसे उगाही करती है। ये यहां सूद ब्याज का अवैध धंधा भी चलाते हैं। ऑटो चालक की बिना पहचान किए ही 300 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से किराये पर ऑटो दिए जा रहे हैं। अगर ऑटो चालक कोई कांड करके ऑटो छोड़कर भाग जाए तो उसकी तलाश मुमकिन नहीं है। इस काम में शहर के कई ऑटो मालिक लगे हुए हैं। ऑटो चालकाें के सत्यापन के लिए वर्ष 2013- 14 में सत्यापन कार्य कैंप लगाकर करना शुरू किया गया था। इस दौरान चालकों को एक आईडी मिलनी थी और ऑटो में मालिक व चालक का मोबाइल नंबर लिखा था। लेकिन कुछ दिन के बाद यह भी ठप हो गया। इस समय शहर में 3200 ऑटो सीएनजी, 1200 सीएनजी देहात और करीब 5000 ऑटो टेंपो डीजल के चल रहे हैं।
ऑटो चालक कल्याण सोसाइटी के महासचिव गुरुदर्शन सिंह ने कहा - ऑटो चालक के रूप में अपराधियाें के एक नहीं कई उदाहरण हैं। दो बार आरटीओ के पास मुद्दा ले गए उन्होंने सत्यापन का काम शुरू भी करवाया लेकिन बाद में किसी ने दिलचस्पी नहीं ली। सत्यापन से ही कई लोग सामने आएंगे।
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ऑटो चालकों को पुलिस और प्रशासन का किस तरह से संरक्षण प्राप्त है उसे इस तरह से समझा जा सकता है। जंक्शन पर डीआरएम की ओर से साफ निर्देश हैं कि 300 से ज्यादा ऑटो नहीं खड़े होंगे लेकिन यहां एक दिन में एक हजार ऑटो खड़े होते हैं। जंक्शन की पुलिस इनसे उगाही करती है। ये यहां सूद ब्याज का अवैध धंधा भी चलाते हैं। ऑटो चालक की बिना पहचान किए ही 300 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से किराये पर ऑटो दिए जा रहे हैं। अगर ऑटो चालक कोई कांड करके ऑटो छोड़कर भाग जाए तो उसकी तलाश मुमकिन नहीं है। इस काम में शहर के कई ऑटो मालिक लगे हुए हैं। ऑटो चालकाें के सत्यापन के लिए वर्ष 2013- 14 में सत्यापन कार्य कैंप लगाकर करना शुरू किया गया था। इस दौरान चालकों को एक आईडी मिलनी थी और ऑटो में मालिक व चालक का मोबाइल नंबर लिखा था। लेकिन कुछ दिन के बाद यह भी ठप हो गया। इस समय शहर में 3200 ऑटो सीएनजी, 1200 सीएनजी देहात और करीब 5000 ऑटो टेंपो डीजल के चल रहे हैं।
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ऑटो चालक कल्याण सोसाइटी के महासचिव गुरुदर्शन सिंह ने कहा - ऑटो चालक के रूप में अपराधियाें के एक नहीं कई उदाहरण हैं। दो बार आरटीओ के पास मुद्दा ले गए उन्होंने सत्यापन का काम शुरू भी करवाया लेकिन बाद में किसी ने दिलचस्पी नहीं ली। सत्यापन से ही कई लोग सामने आएंगे।
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