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बरेली में व्यापारी नेता के पूरे परिवार की हत्या, लूटपाट
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:59 AM IST
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चौहरा हत्याकांड में मौके पर जांच टीम
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इज्जतनगर क्षेत्र के वीर सावरकर नगर से सटी गायत्रीपुरी कॉलोनी में व्यापारी नेता नरेश सेठी के घर में घुसे बदमाशों ने सोमवार रात जमकर कहर बरपाया। व्यापारी नेता, उनकी पत्नी और बेटा, बेटी की धारदार हथियार से हत्या कर दी। अलमारियों के लॉकर टूटे मिले हैं, सामान बिखरा पड़ा हुआ था जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि लूट के दौरान ये हत्याएं हुईं हैं।
घटना की जानकारी बुधवार सुबह तब हुई जब नरेश सेठी की बेटी को ऑटो चालक स्कूल ले जाने के लिए उनके घर पहुंचा। व्यापारियों ने पोस्टमार्टम हाउस पर जाम लगाकर घटना के जल्द खुलासे की मांग की। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ को भी खुलासे के लिए लगाया है। नरेश सेठी (43) उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल (कंछल गुट) युवा इकाई के जिलाध्यक्ष थे। वह एलआईसी एजेंट के साथ प्रापर्टी तथा लाइफ सेफ्टी डिवाइस का काम भी करते थे। उनकी पत्नी शिखा सेठी (40) ने घर में ब्यूटी पार्लर खोल रखा था। 15 वर्षीय बेटा शुभ सेठी विद्या भवन स्कूल में दसवीं कक्षा और 14 वर्षीय बेटी आस्था जीआरएम में आठवीं क्लास में पढ़ती थी।
पड़ोसी केहरी सिंह पटेल एडवोकेट ने बताया कि बुधवार को सुबह करीब सात बजे आस्था को स्कूल ले जाने के लिए ऑटो चालक नरेश सेठी के घर पहुंचा। कई बार घंटी बजाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। ऑटो चालक के साथ केहरी सिंह ने नरेश के घर में जाने की कोशिश की तो अचानक कुंडा टूटने से गेट खुल गया। दोनों घर के अंदर घुसे तो नरेश, उनकी पत्नी शिखा के शव बेडरूम में डबल बेड पर खून से लथपथ पर पड़े थे। शिखा के पहने हुए जेवर गायब थे। बेडरूम की अलमारी खुली हुई थी और दोनों लॉकर टूटे हुए थे। उसमें रखे जेवर कपड़े गायब थे। सामान बिखरा पड़ा था। बेटा शुभ ड्राइंग रूम के बेड पर मुंह के बल पड़ा था। खून से सनी बेटी आस्था की लाश फर्श पर पड़ी थी। मंगलवार का अखबार, दूध दरवाजे पर मिला है जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वारदात सोमवार की रात की है। केहरी सिंह की सूचना पर इज्जतनगर इंस्पेक्टर रामगोपाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सीओ आकाश तोमर को बताया तो आईजी विजय सिंह मीना, डीआईजी आशुतोष कुमार, एसएसपी आरके भारद्वाज, एसपी सिटी समीर सौरभ मौके पर पहुंचे तो लोगों की भीड़ जुट चुकी थी। कुतुबखाना के पास गली नवाबान में रहने वाले नरेश के पिता त्रिलोक नाथ सेठी, भाई सुरेश सेठी और परिवार के अन्य लोग पहुंच गए। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट टीम और डॉग स्क्वाड को भी बुला लिया गया। पिता और भाई की घंटाघर के पास तंबाकू व पान से जुड़े उत्पादों की दुकान है।
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घर में फैले सामान से लगता है कि दंपति और उनके बच्चों की हत्या लूटपाट के लिए की गई है। हत्या सिर में भारी व धारदार हथियार मारकर की गई होगी। हत्या के पीछे लूटपाट और रंजिश दोनों लाइनों पर छानबीन की जा रही है।- विजय सिंह मीना, आईजी शासन सख्त, लगाई गई एसटीएफ
लखनऊ। इज्जतनगर में हुई वारदात पर प्रदेश के गृह विभाग ने गंभीर रुख अपनाया है। खुलासे के लिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ एसटीएफ को लगाया है। बरेली में एक के बाद एक हो रही वारदात पर आईजी (एसटीएफ) ने कहा कि की घटना के तार पुरानी घटनाओं से जुड़े होने की दिशा में भी जांच करने को कहा गया है।
गेट बंद कालोनी में कैसे घुस गए बदमाश?
गायत्रीपुरी कॉलोनी में वैसे तो करीब 50 मकान होंगे, लेकिन इनमें 14 मकान अति सुरक्षित माने जाते हैं। इन घरों में रहने वालों के आने जाने के लिए केवल दो रास्ते हैं, दोनों गेटों पर लोहे का दरवाजे लगा है। दरवाजे की ऊंचाई 15 फिट के करीब होगी। पश्चिम गेट रात 10 बजे बंद कर दिया जाता है। इस गेट की चाबी सभी मकान वालों के पास रहती है। पूर्वी गेट की चाबी नरेश सेठी और अधिवक्ता केहरी सिंह के पास रहती है। अधिकांश दिनों गेट नरेश ही बंद करते थे। सोमवार की रात 11 बजे भी कॉलोनी का पूर्वी गेट नरेश ने बंद किया था। घर बंद होने से पड़ोसियों ने सोचा कि नरेश सेठी बाहर गए होंगे। मंगलवार की रात गेट केहरी सिंह के नौकर ने बंद किया था।
नरेश सेठी और उनके परिवार की मौत के पीछे कई सवाल हैं। गेट नरेश ने बंद किया था तो क्या बदमाश पहले से अंदर छिपे थे? माना जा रहा है कि बदमाश नरेश सेठी के घर की चहारदीवारी कूदकर अंदर पहुंचे होंगे। मगर चहारदीवारी पर पैरों के निशान नहीं मिले। छानबीन के दौरान किचिन की खिड़की के निकाली गई ग्रिल ऊपर जीने में रखी मिली। सवाल यह है कि बदमाशों ने ग्रिल ऊपर क्यों रखी थी? नरेश के घर के तीन ओर मकान बने हैं और सामने सड़क है। पीछे वाले मकानों के बरामद में खाली प्लाट पड़े हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि बदमाश छत से होकर आए होंगे। पड़ोसियों के मुताबिक सोमवार रात सेठी ने छत पर लगा जीने का दरवाजा बंद किया था, जो खुला मिला। अगर बदमाश ऊपर से घुसे होते तो दरवाजे को बल पूर्वक खोला गया होता।
जिसने सुना वही दौड़ पड़ा
बरेली। नरेश सेठी की शहर और समाज में अच्छी पहचान थी। हमेशा हंसते रहना और मिलनसार व्यवहार उन्हें दूसरों से अलग करता था। यही कारण था कि घटना के बारे में जिसने भी सुना, उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और नजदीकी लोगों में हर कोई नरेश के अच्छे व्यवहार की तारीफ करते नहीं थक रहा था।
व्यापारी नेता और एलआईसी एजेंट होने के नाते नरेश के तमाम लोगों से जान पहचान थी। उन्होंने नेट वर्किंग कंपनी में भी काम किया था। प्रापर्टी के कारोबार से भी जुड़े थे। ब्यूटी पार्लर चलाने से शिखा सेठी को भी कई लोग जानते थे। बुधवार सुबह कुछ ही देर में कालोनी वालों की भीड़ जमा हो गई। भाजपा नेता गुलशन आनंद, व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता, विशाल मेहरोत्रा, शोभित सक्सेना, नदीम शमसी, देवेंद्र जोशी, सोनू शर्मा, राजकुमार राजपूत, डीके जैन, पोपिंद्र सिंह बक्की, अमित भारद्वाज, सुनील खत्री, सभासद राजेश अग्रवाल, कांग्रेस नेता अमजद सलीम भी वहां पहुंचे।
एक साथ जलीं चाराें चिताएं
शाम को मॉडल टाउन श्मशान भूमि में नरेश सेठी, उनकी पत्नी और बच्चों के शवों का दाह संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि नरेश के बड़े भाई सुरेश सेठी ने दी। पूरे परिवार की चिताएं जलते देख हर किसी की आंखें नम हो गई। अंतिम संस्कार में नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार, बार एसोसिएशन अध्यक्ष घनश्याम शर्मा, व्यापारी दर्शन लाल भाटिया समेत तमाम व्यापारी और वकील आदि मौजूद रहे।
सेठी हाउस बंद था, पड़ोसियों ने झांका तक नहीं
व्यापारी नेता नरेश सेठी का पैतृक मकान कोतवाली क्षेत्र की कुतुबखाना के पास नवाबान गली में है। जहां उनके पिता त्रिलोक नाथ सेठी, बड़े भाई सुरेश सेठी, भाभी और भतीजे रहते हैं। दो बहनें सोनू सेठी व मन्नू सेठी शादीशुदा हैं। परिजनों के मुताबिक सोमवार शाम नरेश और उनकी पत्नी शिखा मॉडल टाउन स्थित हरि मंदिर गए थे। वहीं से नवाबान गली पिता के पास चले गए। उस दिन शिखा का व्रत था। वहां से करीब 10.30 बजे अपने घर लौटे होंगे। उस रात में 11 बजे नरेश को छत का दरवाजा बंद करते पड़ोसी ने देखा था। रात 11.15 बजे तक नरेश के घर से बातें करने की आवाजें सुनी गई थीं। उन्होंने रात 11.30 बजे व्हाट्सएप पर अपने एक साथी को मैसेज भी भेजा था। फिर क्या हुआ कुछ नहीं मालूम।
पड़ोसियों के मुताबिक मंगलवार सुबह दूधिया नरेश का दरवाजा खटखटाता रहा। घर के अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो लौट गया। काम करने पहुंची नौकरानी शोभा ने मंगलवार सुबह नरेश के घर की घंटी कई बार बजाई। मेन गेट पर अंदर से ताला पड़ा था। शिखा मंगलवार को अपना ब्यूटी पार्लर बंद रखती थीं। शोभा ने सोचा कि सब सो रहे होंगे, जिससे लौट गई। मंगलवार दिन में कई व्यापारी नेताओं ने नरेश के मोबाइल पर फोन किया था, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। मगर उनके बारे में पता लगाने की किसी ने कोशिश नहीं की। नरेश का घर दिन भर बंद रहने के बावजूद किसी ने ध्यान नहीं दिया। बुधवार को दरवाजा खुलने पर लॉबी में 27 और 28 सितंबर के अखबार पड़े मिले, जो खुले नहीं थे। बुधवार को घर खोला गया तो अंदर से बदबू निकल रही थी। इससे स्पष्ट है कि पूरे परिवार को सोमवार की रात ही मार दिया गया था।
नरेश के घर में मुख्य दरवाजे से सटी गैलरी, उसके बराबर में ड्राइंग रूम और फिर ब्यूटी पार्लर है। गैलरी के सामने किचन और वहीं छत पर जाने का जीना है। ब्यूटी पार्लर के पीछे बाथरूम और उसके बराबर में स्टोर रूम है। बाथरूम का एक दरवाजा ब्यूटी पार्लर और दूसरा पीछे बेडरूम में खुलता है। बेडरूम, ड्राइंग रूम और स्टोर का दरवाजा अंदर लॉबी में खुलता है।
सोमवार रात नरेश और उनकी पत्नी शिखा बेडरूम में डबल बेड पर सोए होंगे। बेटा शुभ ड्राइंग रूम में पड़े दीवान और बेटी आस्था सोफे पर लेटी होगी। बुधवार सुबह देखा तो किचन की खिड़की का ग्रिल निकली हुई थी। लॉबी का मुख्य दरवाजा भिड़ा हुआ था। इससे अनुमान है कि बदमाश किचन की खिड़की से अंदर घुसे होंगे और लॉबी का दरवाजा खोलकर निकल गए।
बेड पर नरेश और शिखा के शव चित पड़े थे। बदमाशों ने उनके सिर पर वार करके सोते समय ही मारा होगा। उनके खून के छींटे दीवारों और अलमारियों पर साफ दिख रहे थे। बेडरूम के दीवान पर शुभ का शव औंधे मुंह पड़ा था। उसके भी सिर पर वार किए गए थे। आस्था का शव फर्श पर पड़ा मिला। लगता है कि भाई की चीख सुनकर वह जाग गई होगी। उसने भाई को बचाने की कोशिश की होगी तभी बदमाशों ने मार दिया होगा। बदमाशों ने घर में रखी प्रत्येक अलमारी, कोना और बेड की दराज को खंगाला था। बेडरूम में रखी लकड़ी की अलमारी के सभी खानों में चाबी लगी थी। लोहे की अलमारी का दरवाजा भी चाबी से खेला गया था। अलमारी की दोनों तिजोरी किसी सब्बल जैसी चीज से तोड़ी गई होगी।
पूरी तैयारी से आए थे बदमाश, की थी रेकी
वीर सावरकर नगर की गायत्रीपुरी कॉलोनी में व्यापारी नेता नरेश सेठी के यहां वारदात पूरी प्लानिंग से की गई थी। कॉलोनी की सड़क पर खड़ी नरेश की कार और घर में खड़ी दोनों स्कूटी को पंचर कर दिया गया। ताकि कोई उनका पीछा भी नरेश के वाहन से न कर पाए। पुलिस को 15 दिन पहले नरेश के घर की पुताई करने वालों पर रेकी करने का शक है। नरेश की नौकरानी से भी पूछताछ की जा रही है।
व्यापारी नेता के बेटे शुभ सेठी का 11 सितंबर को जन्मदिन था। इस मौके पर उन्होंने प्रभु गुणगान(संकीर्तन) के नाम से कार्यक्रम किया था। कार्यक्रम में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को घर बुलाया था। कार्यक्रम के दौरान रात दस बजे तक खूब धूम धड़ाका हुआ था। इस कार्यक्रम के लिए नरेश ने घर की पुताई भी कराई थी। पुताई करने वाले नरेश के घर के हर कोने के बारे में जानते थे। दूसरा घर में नरेश की पत्नी शिखा बेटी आस्था के नाम ब्यूटी पार्लर चलाती थीं। इसलिए वहां महिलाओं का आना-जाना दिन भर लगा रहता था। महिलाओं के साथ पुरुष भी आते थे। कई ग्राहक घर के अंदर तक चले जाते थे। इसलिए नरेश के घर की रेकी करना बेहद आसान था। हत्या और लूट करने वालों की रेकी इतनी सटीक थी कि उन्हें यह भी मालूम था कि मंगलवार को ब्यूटी पार्लर बंद रहता है। यह बात नरेश का कोई परिचित या कॉलोनी का व्यक्ति ही जानता होगा, क्योंकि बाहर के व्यक्ति का वहां तक पहुंचने का कोई मतलब नहीं बनता है। इसलिए रेकी करने के लिए शक के दायरे में नरेश के घर की तीनों नौकरानी और पुताई करने वाले हैं। ब्यूटी पार्लर पर काम कराने आने वाली ग्राहकों की भी सूची बनाई जा रही है।
हत्याकांड से जुड़ी खास बातें
-घटना की रात सवा ग्यारह बजे तक व्हाट्सएप पर आन लाइन थे। इसके बाद भी बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया है। सारे गेट खुले थे, इसका मतलब साफ है कि बदमाश गेट खुलवाकर ही घुसे होंगे। बदमाशों में कोई परिचित भी हो सकता है।
-छानबीन के दौरान बेडरूम में एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। नरेश के पास लाइसेंसी हथियार कोई था नहीं। सवाल यह उठता है कि घर में कारतूस आया कहां से? क्या बदमाशों के पास तमंचे भी थे? पंजाबी समाज के होने के नाते नरेश कृपाण रखते थे। छानबीन के दौरान घर में म्यान तो मिल गई, लेकिन कटार गायब थी। लॉबी में टंकी के पास एक ग्लब्स भी पड़ा मिला।
-कालोनी के आसपास के पांच सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ली गई गई है। नरेश सेठी के घर के सामने केहरी सिंह एडवोकेट के यहां लगे सीसीटीवी कैमरे में सड़क का कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए दूसरे सीसीटीवी कैमरों से कुछ मिलने की उम्मीद है।
-नरेश सेठी रोजाना अपने दोस्तों को सुबह सवेरे ही राधे-राधे लिखकर मैसेज भेजते थे। मंगलवार को मैसेज नहीं आया तो लोगों ने सोचा कुछ वजह रही होगी। बुधवार को उनकी हत्या की खबर सुनकर सभी हैरान थे।
-गायत्रीपुरी कॉलोनी में नरेश सेठी और उनके परिवार के चार लोगों की हत्या के समय मोहल्ले के लोगों ने चीख की एक आवाज सुन ली थी, इसकी सूचना पुलिस को दी गई। लेकिन पुलिस चक्कर मारकर चली गई थी।
-सोमवार को महालक्ष्मी का व्रत रखने के बाद नरेश सेठी पत्नी शिखा और बेटी आस्था के साथ अपने पैतृक आवास पर गए थे। वहां उन्होंने अपने ससुर त्रिलोकी नाथ को प्रसाद देकर आईं थीं।
-हरि मंदिर से लौटने के बाद नरेश ने अपनी कार से सामान भी नहीं उतारा था। इसके पीछे वजह यह थी नरेश कीर्तन करने जाते थे।
टाइम लाइन
सुबह 6.50 बजे- आटो चालक नरेश सेठी के घर पहुंचा।
सुबह 6.52 बजे- केहरी सिंह एडवोकेट नरेश के घर में गए।
सुबह 6.53 बजे -पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया गया।
सुबह 7.18 बजे- इज्जतनगर इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे।
सुबह 7.20 बजे- परिवार वाले नरेश सेठी के घर पहुंचे।
सुबह 7.40 बजे- पुलिस अफसर घटना स्थल पर पहुंचे।
सुबह 7.50 बजे- फोरेंसिक टीम घटना स्थल पर पहुंची।
सुबह 8.20 बजे- डॉग स्क्वाइड मौके पर बुलाया गया।
सुबह 8.55 बजे - शव पोस्टमार्टम हाउस भेजे गए।
शाम 3.45 बजे- लाशों का पोस्टमार्टम किया गया।
शाम 6.30 बजे- चारो शवों का दाह संस्कार हुआ।
नहीं उठा कंट्रोल रूम का फोन
नरेश सेठी समेत पूरे परिवार की लाशें घर में पड़ी देखने के बाद अधिवक्ता केहरी सिंह ने सिटी कंट्रोल के 100 नंबर पर फोन किया। उनका कहना है कि कई बार नंबर डायल करने पर घंटी जाती रही, लेकिन 20 मिनट तक फोन रिसीव नहीं हुआ। फिर उन्होंने इज्जतनगर थाने के एक दरोगा को फोन किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस गश्त नहीं करती, आक्रोश
इज्जतनगर थाने की रक्षक मोबाइल दो दिन से बंद पड़ी है। 100 डायल सेवा के लिए सिपाहियों के ट्रेनिंग पर चले जाने के बाद से यह दोनों गाड़ियां थाने से बाहर नहीं निकली हैं। गायत्रीपुरी के लोगों का कहना है कि यहां भी पहले चीता मोबाइल के सिपाही आते थे, लेकिन अब नहीं आते हैं। घटना होने के बाद ही पुलिस सक्रिय होती है। इससे पहले कोई नहीं आता है।
फील्ड यूनिट ने लिए फिंगर प्रिंट
फील्ड यूनिट ने नरेश सेठी के घर काफी देर तक छानबीन की। उनकी किचन की खिड़की और अलमारी से फिंगर प्रिंट लिए हैं। उन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा जा रहा है। संदिग्धों के फिंगर प्रिंट से उनका मिलान कराया जाएगा।
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घटना की जानकारी बुधवार सुबह तब हुई जब नरेश सेठी की बेटी को ऑटो चालक स्कूल ले जाने के लिए उनके घर पहुंचा। व्यापारियों ने पोस्टमार्टम हाउस पर जाम लगाकर घटना के जल्द खुलासे की मांग की। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ को भी खुलासे के लिए लगाया है। नरेश सेठी (43) उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल (कंछल गुट) युवा इकाई के जिलाध्यक्ष थे। वह एलआईसी एजेंट के साथ प्रापर्टी तथा लाइफ सेफ्टी डिवाइस का काम भी करते थे। उनकी पत्नी शिखा सेठी (40) ने घर में ब्यूटी पार्लर खोल रखा था। 15 वर्षीय बेटा शुभ सेठी विद्या भवन स्कूल में दसवीं कक्षा और 14 वर्षीय बेटी आस्था जीआरएम में आठवीं क्लास में पढ़ती थी।
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पड़ोसी केहरी सिंह पटेल एडवोकेट ने बताया कि बुधवार को सुबह करीब सात बजे आस्था को स्कूल ले जाने के लिए ऑटो चालक नरेश सेठी के घर पहुंचा। कई बार घंटी बजाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। ऑटो चालक के साथ केहरी सिंह ने नरेश के घर में जाने की कोशिश की तो अचानक कुंडा टूटने से गेट खुल गया। दोनों घर के अंदर घुसे तो नरेश, उनकी पत्नी शिखा के शव बेडरूम में डबल बेड पर खून से लथपथ पर पड़े थे। शिखा के पहने हुए जेवर गायब थे। बेडरूम की अलमारी खुली हुई थी और दोनों लॉकर टूटे हुए थे। उसमें रखे जेवर कपड़े गायब थे। सामान बिखरा पड़ा था। बेटा शुभ ड्राइंग रूम के बेड पर मुंह के बल पड़ा था। खून से सनी बेटी आस्था की लाश फर्श पर पड़ी थी। मंगलवार का अखबार, दूध दरवाजे पर मिला है जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वारदात सोमवार की रात की है। केहरी सिंह की सूचना पर इज्जतनगर इंस्पेक्टर रामगोपाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सीओ आकाश तोमर को बताया तो आईजी विजय सिंह मीना, डीआईजी आशुतोष कुमार, एसएसपी आरके भारद्वाज, एसपी सिटी समीर सौरभ मौके पर पहुंचे तो लोगों की भीड़ जुट चुकी थी। कुतुबखाना के पास गली नवाबान में रहने वाले नरेश के पिता त्रिलोक नाथ सेठी, भाई सुरेश सेठी और परिवार के अन्य लोग पहुंच गए। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट टीम और डॉग स्क्वाड को भी बुला लिया गया। पिता और भाई की घंटाघर के पास तंबाकू व पान से जुड़े उत्पादों की दुकान है।
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घर में फैले सामान से लगता है कि दंपति और उनके बच्चों की हत्या लूटपाट के लिए की गई है। हत्या सिर में भारी व धारदार हथियार मारकर की गई होगी। हत्या के पीछे लूटपाट और रंजिश दोनों लाइनों पर छानबीन की जा रही है।- विजय सिंह मीना, आईजी शासन सख्त, लगाई गई एसटीएफ
लखनऊ। इज्जतनगर में हुई वारदात पर प्रदेश के गृह विभाग ने गंभीर रुख अपनाया है। खुलासे के लिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ एसटीएफ को लगाया है। बरेली में एक के बाद एक हो रही वारदात पर आईजी (एसटीएफ) ने कहा कि की घटना के तार पुरानी घटनाओं से जुड़े होने की दिशा में भी जांच करने को कहा गया है।
गेट बंद कालोनी में कैसे घुस गए बदमाश?
गायत्रीपुरी कॉलोनी में वैसे तो करीब 50 मकान होंगे, लेकिन इनमें 14 मकान अति सुरक्षित माने जाते हैं। इन घरों में रहने वालों के आने जाने के लिए केवल दो रास्ते हैं, दोनों गेटों पर लोहे का दरवाजे लगा है। दरवाजे की ऊंचाई 15 फिट के करीब होगी। पश्चिम गेट रात 10 बजे बंद कर दिया जाता है। इस गेट की चाबी सभी मकान वालों के पास रहती है। पूर्वी गेट की चाबी नरेश सेठी और अधिवक्ता केहरी सिंह के पास रहती है। अधिकांश दिनों गेट नरेश ही बंद करते थे। सोमवार की रात 11 बजे भी कॉलोनी का पूर्वी गेट नरेश ने बंद किया था। घर बंद होने से पड़ोसियों ने सोचा कि नरेश सेठी बाहर गए होंगे। मंगलवार की रात गेट केहरी सिंह के नौकर ने बंद किया था।
नरेश सेठी और उनके परिवार की मौत के पीछे कई सवाल हैं। गेट नरेश ने बंद किया था तो क्या बदमाश पहले से अंदर छिपे थे? माना जा रहा है कि बदमाश नरेश सेठी के घर की चहारदीवारी कूदकर अंदर पहुंचे होंगे। मगर चहारदीवारी पर पैरों के निशान नहीं मिले। छानबीन के दौरान किचिन की खिड़की के निकाली गई ग्रिल ऊपर जीने में रखी मिली। सवाल यह है कि बदमाशों ने ग्रिल ऊपर क्यों रखी थी? नरेश के घर के तीन ओर मकान बने हैं और सामने सड़क है। पीछे वाले मकानों के बरामद में खाली प्लाट पड़े हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि बदमाश छत से होकर आए होंगे। पड़ोसियों के मुताबिक सोमवार रात सेठी ने छत पर लगा जीने का दरवाजा बंद किया था, जो खुला मिला। अगर बदमाश ऊपर से घुसे होते तो दरवाजे को बल पूर्वक खोला गया होता।
जिसने सुना वही दौड़ पड़ा
बरेली। नरेश सेठी की शहर और समाज में अच्छी पहचान थी। हमेशा हंसते रहना और मिलनसार व्यवहार उन्हें दूसरों से अलग करता था। यही कारण था कि घटना के बारे में जिसने भी सुना, उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और नजदीकी लोगों में हर कोई नरेश के अच्छे व्यवहार की तारीफ करते नहीं थक रहा था।
व्यापारी नेता और एलआईसी एजेंट होने के नाते नरेश के तमाम लोगों से जान पहचान थी। उन्होंने नेट वर्किंग कंपनी में भी काम किया था। प्रापर्टी के कारोबार से भी जुड़े थे। ब्यूटी पार्लर चलाने से शिखा सेठी को भी कई लोग जानते थे। बुधवार सुबह कुछ ही देर में कालोनी वालों की भीड़ जमा हो गई। भाजपा नेता गुलशन आनंद, व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता, विशाल मेहरोत्रा, शोभित सक्सेना, नदीम शमसी, देवेंद्र जोशी, सोनू शर्मा, राजकुमार राजपूत, डीके जैन, पोपिंद्र सिंह बक्की, अमित भारद्वाज, सुनील खत्री, सभासद राजेश अग्रवाल, कांग्रेस नेता अमजद सलीम भी वहां पहुंचे।
एक साथ जलीं चाराें चिताएं
शाम को मॉडल टाउन श्मशान भूमि में नरेश सेठी, उनकी पत्नी और बच्चों के शवों का दाह संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि नरेश के बड़े भाई सुरेश सेठी ने दी। पूरे परिवार की चिताएं जलते देख हर किसी की आंखें नम हो गई। अंतिम संस्कार में नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार, बार एसोसिएशन अध्यक्ष घनश्याम शर्मा, व्यापारी दर्शन लाल भाटिया समेत तमाम व्यापारी और वकील आदि मौजूद रहे।
सेठी हाउस बंद था, पड़ोसियों ने झांका तक नहीं
व्यापारी नेता नरेश सेठी का पैतृक मकान कोतवाली क्षेत्र की कुतुबखाना के पास नवाबान गली में है। जहां उनके पिता त्रिलोक नाथ सेठी, बड़े भाई सुरेश सेठी, भाभी और भतीजे रहते हैं। दो बहनें सोनू सेठी व मन्नू सेठी शादीशुदा हैं। परिजनों के मुताबिक सोमवार शाम नरेश और उनकी पत्नी शिखा मॉडल टाउन स्थित हरि मंदिर गए थे। वहीं से नवाबान गली पिता के पास चले गए। उस दिन शिखा का व्रत था। वहां से करीब 10.30 बजे अपने घर लौटे होंगे। उस रात में 11 बजे नरेश को छत का दरवाजा बंद करते पड़ोसी ने देखा था। रात 11.15 बजे तक नरेश के घर से बातें करने की आवाजें सुनी गई थीं। उन्होंने रात 11.30 बजे व्हाट्सएप पर अपने एक साथी को मैसेज भी भेजा था। फिर क्या हुआ कुछ नहीं मालूम।
पड़ोसियों के मुताबिक मंगलवार सुबह दूधिया नरेश का दरवाजा खटखटाता रहा। घर के अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो लौट गया। काम करने पहुंची नौकरानी शोभा ने मंगलवार सुबह नरेश के घर की घंटी कई बार बजाई। मेन गेट पर अंदर से ताला पड़ा था। शिखा मंगलवार को अपना ब्यूटी पार्लर बंद रखती थीं। शोभा ने सोचा कि सब सो रहे होंगे, जिससे लौट गई। मंगलवार दिन में कई व्यापारी नेताओं ने नरेश के मोबाइल पर फोन किया था, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। मगर उनके बारे में पता लगाने की किसी ने कोशिश नहीं की। नरेश का घर दिन भर बंद रहने के बावजूद किसी ने ध्यान नहीं दिया। बुधवार को दरवाजा खुलने पर लॉबी में 27 और 28 सितंबर के अखबार पड़े मिले, जो खुले नहीं थे। बुधवार को घर खोला गया तो अंदर से बदबू निकल रही थी। इससे स्पष्ट है कि पूरे परिवार को सोमवार की रात ही मार दिया गया था।
नरेश के घर में मुख्य दरवाजे से सटी गैलरी, उसके बराबर में ड्राइंग रूम और फिर ब्यूटी पार्लर है। गैलरी के सामने किचन और वहीं छत पर जाने का जीना है। ब्यूटी पार्लर के पीछे बाथरूम और उसके बराबर में स्टोर रूम है। बाथरूम का एक दरवाजा ब्यूटी पार्लर और दूसरा पीछे बेडरूम में खुलता है। बेडरूम, ड्राइंग रूम और स्टोर का दरवाजा अंदर लॉबी में खुलता है।
सोमवार रात नरेश और उनकी पत्नी शिखा बेडरूम में डबल बेड पर सोए होंगे। बेटा शुभ ड्राइंग रूम में पड़े दीवान और बेटी आस्था सोफे पर लेटी होगी। बुधवार सुबह देखा तो किचन की खिड़की का ग्रिल निकली हुई थी। लॉबी का मुख्य दरवाजा भिड़ा हुआ था। इससे अनुमान है कि बदमाश किचन की खिड़की से अंदर घुसे होंगे और लॉबी का दरवाजा खोलकर निकल गए।
बेड पर नरेश और शिखा के शव चित पड़े थे। बदमाशों ने उनके सिर पर वार करके सोते समय ही मारा होगा। उनके खून के छींटे दीवारों और अलमारियों पर साफ दिख रहे थे। बेडरूम के दीवान पर शुभ का शव औंधे मुंह पड़ा था। उसके भी सिर पर वार किए गए थे। आस्था का शव फर्श पर पड़ा मिला। लगता है कि भाई की चीख सुनकर वह जाग गई होगी। उसने भाई को बचाने की कोशिश की होगी तभी बदमाशों ने मार दिया होगा। बदमाशों ने घर में रखी प्रत्येक अलमारी, कोना और बेड की दराज को खंगाला था। बेडरूम में रखी लकड़ी की अलमारी के सभी खानों में चाबी लगी थी। लोहे की अलमारी का दरवाजा भी चाबी से खेला गया था। अलमारी की दोनों तिजोरी किसी सब्बल जैसी चीज से तोड़ी गई होगी।
पूरी तैयारी से आए थे बदमाश, की थी रेकी
वीर सावरकर नगर की गायत्रीपुरी कॉलोनी में व्यापारी नेता नरेश सेठी के यहां वारदात पूरी प्लानिंग से की गई थी। कॉलोनी की सड़क पर खड़ी नरेश की कार और घर में खड़ी दोनों स्कूटी को पंचर कर दिया गया। ताकि कोई उनका पीछा भी नरेश के वाहन से न कर पाए। पुलिस को 15 दिन पहले नरेश के घर की पुताई करने वालों पर रेकी करने का शक है। नरेश की नौकरानी से भी पूछताछ की जा रही है।
व्यापारी नेता के बेटे शुभ सेठी का 11 सितंबर को जन्मदिन था। इस मौके पर उन्होंने प्रभु गुणगान(संकीर्तन) के नाम से कार्यक्रम किया था। कार्यक्रम में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को घर बुलाया था। कार्यक्रम के दौरान रात दस बजे तक खूब धूम धड़ाका हुआ था। इस कार्यक्रम के लिए नरेश ने घर की पुताई भी कराई थी। पुताई करने वाले नरेश के घर के हर कोने के बारे में जानते थे। दूसरा घर में नरेश की पत्नी शिखा बेटी आस्था के नाम ब्यूटी पार्लर चलाती थीं। इसलिए वहां महिलाओं का आना-जाना दिन भर लगा रहता था। महिलाओं के साथ पुरुष भी आते थे। कई ग्राहक घर के अंदर तक चले जाते थे। इसलिए नरेश के घर की रेकी करना बेहद आसान था। हत्या और लूट करने वालों की रेकी इतनी सटीक थी कि उन्हें यह भी मालूम था कि मंगलवार को ब्यूटी पार्लर बंद रहता है। यह बात नरेश का कोई परिचित या कॉलोनी का व्यक्ति ही जानता होगा, क्योंकि बाहर के व्यक्ति का वहां तक पहुंचने का कोई मतलब नहीं बनता है। इसलिए रेकी करने के लिए शक के दायरे में नरेश के घर की तीनों नौकरानी और पुताई करने वाले हैं। ब्यूटी पार्लर पर काम कराने आने वाली ग्राहकों की भी सूची बनाई जा रही है।
हत्याकांड से जुड़ी खास बातें
-घटना की रात सवा ग्यारह बजे तक व्हाट्सएप पर आन लाइन थे। इसके बाद भी बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया है। सारे गेट खुले थे, इसका मतलब साफ है कि बदमाश गेट खुलवाकर ही घुसे होंगे। बदमाशों में कोई परिचित भी हो सकता है।
-छानबीन के दौरान बेडरूम में एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। नरेश के पास लाइसेंसी हथियार कोई था नहीं। सवाल यह उठता है कि घर में कारतूस आया कहां से? क्या बदमाशों के पास तमंचे भी थे? पंजाबी समाज के होने के नाते नरेश कृपाण रखते थे। छानबीन के दौरान घर में म्यान तो मिल गई, लेकिन कटार गायब थी। लॉबी में टंकी के पास एक ग्लब्स भी पड़ा मिला।
-कालोनी के आसपास के पांच सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ली गई गई है। नरेश सेठी के घर के सामने केहरी सिंह एडवोकेट के यहां लगे सीसीटीवी कैमरे में सड़क का कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए दूसरे सीसीटीवी कैमरों से कुछ मिलने की उम्मीद है।
-नरेश सेठी रोजाना अपने दोस्तों को सुबह सवेरे ही राधे-राधे लिखकर मैसेज भेजते थे। मंगलवार को मैसेज नहीं आया तो लोगों ने सोचा कुछ वजह रही होगी। बुधवार को उनकी हत्या की खबर सुनकर सभी हैरान थे।
-गायत्रीपुरी कॉलोनी में नरेश सेठी और उनके परिवार के चार लोगों की हत्या के समय मोहल्ले के लोगों ने चीख की एक आवाज सुन ली थी, इसकी सूचना पुलिस को दी गई। लेकिन पुलिस चक्कर मारकर चली गई थी।
-सोमवार को महालक्ष्मी का व्रत रखने के बाद नरेश सेठी पत्नी शिखा और बेटी आस्था के साथ अपने पैतृक आवास पर गए थे। वहां उन्होंने अपने ससुर त्रिलोकी नाथ को प्रसाद देकर आईं थीं।
-हरि मंदिर से लौटने के बाद नरेश ने अपनी कार से सामान भी नहीं उतारा था। इसके पीछे वजह यह थी नरेश कीर्तन करने जाते थे।
टाइम लाइन
सुबह 6.50 बजे- आटो चालक नरेश सेठी के घर पहुंचा।
सुबह 6.52 बजे- केहरी सिंह एडवोकेट नरेश के घर में गए।
सुबह 6.53 बजे -पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया गया।
सुबह 7.18 बजे- इज्जतनगर इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे।
सुबह 7.20 बजे- परिवार वाले नरेश सेठी के घर पहुंचे।
सुबह 7.40 बजे- पुलिस अफसर घटना स्थल पर पहुंचे।
सुबह 7.50 बजे- फोरेंसिक टीम घटना स्थल पर पहुंची।
सुबह 8.20 बजे- डॉग स्क्वाइड मौके पर बुलाया गया।
सुबह 8.55 बजे - शव पोस्टमार्टम हाउस भेजे गए।
शाम 3.45 बजे- लाशों का पोस्टमार्टम किया गया।
शाम 6.30 बजे- चारो शवों का दाह संस्कार हुआ।
नहीं उठा कंट्रोल रूम का फोन
नरेश सेठी समेत पूरे परिवार की लाशें घर में पड़ी देखने के बाद अधिवक्ता केहरी सिंह ने सिटी कंट्रोल के 100 नंबर पर फोन किया। उनका कहना है कि कई बार नंबर डायल करने पर घंटी जाती रही, लेकिन 20 मिनट तक फोन रिसीव नहीं हुआ। फिर उन्होंने इज्जतनगर थाने के एक दरोगा को फोन किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस गश्त नहीं करती, आक्रोश
इज्जतनगर थाने की रक्षक मोबाइल दो दिन से बंद पड़ी है। 100 डायल सेवा के लिए सिपाहियों के ट्रेनिंग पर चले जाने के बाद से यह दोनों गाड़ियां थाने से बाहर नहीं निकली हैं। गायत्रीपुरी के लोगों का कहना है कि यहां भी पहले चीता मोबाइल के सिपाही आते थे, लेकिन अब नहीं आते हैं। घटना होने के बाद ही पुलिस सक्रिय होती है। इससे पहले कोई नहीं आता है।
फील्ड यूनिट ने लिए फिंगर प्रिंट
फील्ड यूनिट ने नरेश सेठी के घर काफी देर तक छानबीन की। उनकी किचन की खिड़की और अलमारी से फिंगर प्रिंट लिए हैं। उन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा जा रहा है। संदिग्धों के फिंगर प्रिंट से उनका मिलान कराया जाएगा।