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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Army recruitment system that will distinguish the terrorists !

ऐसे तो आतंकी भी भेद देंगे सेना का भर्ती सिस्टम!

Sat, 16 Jul 2016 12:34 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Sat, 16 Jul 2016 12:34 AM IST
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हरियाणा के चार युवकों ने सेना के फर्जी नियुक्तिपत्र से जाट रेजीमेंट सेंटर तक घुसपैठ कर ली और 12 दिन तक यहां ट्रेनिंग भी ली। इससे सेना के भर्ती सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। अहम सवाल उठने लगा है कि ऐसे तो सेना के अहम स्थलों की सूचनाएं जुटाने के लिए कोई आतंकी भी इस सिस्टम को भेद सकता है। सेना का खुफिया तंत्र भी इस मामले के बाद से अलर्ट हो गया है। सूत्रों का कहना है कि अब सेना यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं इन युवाओं के पीछे कोई शातिर दिमाग तो नहीं है।
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कुछ महीने पहले ही बरेली के सैन्य ठिकानों की गोपनीय सूचनाएं जुटाने वाला आईएसआई एजेंट इजाज पकड़ा गया था। उसके बारे में पता लगा था कि उसने यहां के सैन्य ठिकानों की कई जानकारियां जुटा ली थीं। वह तो कुछ लोगों की मिलीभगत से सैन्य स्थलों तक घुसपैठ कर पाया लेकिन खुद को हरियाणा का निवासी बताने वाले चार युवक सेना के भर्ती सिस्टम को भेदकर जाट रेजीमेंट सेंटर तक पहुंच पाने में कामयाब रहे। सामने आई जानकारी के मुताबिक, चारों युवाओं ने किसी दलाल के जरिए दिल्ली के सेना भर्ती कार्यालय के फर्जी नियुक्तिपत्र हासिल किए और एक जुलाई को यहां जाट रेजीमेंट सेंटर में पहुंच गए, तब से 12 जुलाई तक वह यहां रहकर सैनिक बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे। पूरे 12 दिन वह यहां रहे। हालांकि सेना के अफसर इनको महज बेरोजगार युवक मानकर की गई उनकी हरकत के रूप में इस मामले को देख रहे हैं लेकिन जिस साहस और हिम्मत से चारों ने सेना के कैंप में डेढ़ हफ्ते से ज्यादा समय तक घुसपैठ की, उससे कई आशंकाएं प्रबल हो रही हैं। खुफिया तंत्र भी इसको हलके में नहीं ले रहा है। इजाज ने जिस मासूमियत और प्लानिंग से घुसपैठ की थी और अपनी असलियत की भनक भी नहीं लगने दी, उसी तरह कब कौन इजाज की तर्ज पर खुराफात करने लगे, कहना मुश्किल है, इसको ही ध्यान में रखकर सैन्य खुफिया तंत्र अब यह जानने में जुटा हुआ है कि इन युवाओं के तार कहीं से जुड़े हुए तो नहीं हैं।
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इंसेट... 

मास्टर माइंड रेशम जानता है सभी बारीकियां
चारों युवाओं की मानें तो उनको फर्जी नियुक्तिपत्र खुद को दिल्ली सेना भर्ती आफिस के एक अधिकारी का ड्राइवर बताने वाले दलाल रेशम ने दिए थे। अगर उनकी बात सच है तो रेशम को भर्ती सिस्टम की पूरी जानकारी थी। उसे यह भी पता है कि भर्ती होने के बाद नियुक्तिपत्र कैसे और कहां जाता है। जाहिर है कि इसीलिए तथाकथित रेशम ने युवाओं को नियुक्तिपत्र थमा दिए और जाट सेंटर भेज दिया। ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं के फर्जी नियुक्तिपत्र के सत्यापन के लिए जाट रेजीमेंट सेंटर ने 12 दिन तक इंतजार किया। अगर दिल्ली भर्ती कार्यालय सूचना नहीं भेजता तो शायद युवक और भी कई दिन ट्रेनिंग लेते रहते। गौरतलब यह है कि ट्रेनिंग के लिए भर्ती कार्यालय युवाओं को नियुक्तिपत्र देने के अलावा अगर डाक से नाम भेजता है, तो वह जाट सेंटर में इतने दिन बाद भी क्यों नहीं पहुंचे। फिलहाल इस बारे में सेना के अफसर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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युवक जानते थे कि वह कर रहे फर्जीवाड़ा
ऐसा नहीं कि जिन युवकों ने सेना में पैसे देकर नियुक्ति की कोशिश की उन्हें फंसाया गया। वह अच्छी तरह जानते थे कि वह गलत कर रहे हैं। क्योंकि सभी को मालूम है कि सेना में भर्ती से पहले फिजिकल और मेडिकल होता है जबकि उनको सीधे नियुक्ति पत्र देकर नौकरी ज्वाइन करने भेज दिया गया था। 
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