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भतीजे से धोखाधड़ी का आरोपी अधिवक्ता गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Fri, 21 Oct 2016 12:52 AM IST
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आरोपी कमल मोहन निगम
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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करोड़ों की संपत्ति को लेकर भतीजे से धोखाधड़ी करने के आरोपी अधिवक्ता कमल मोहन निगम को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर सीजेएम कोर्ट में पेश किया। उनकी जमानत खारिज कर दी गई। बाद में जनपद न्यायाधीश राजाराम सरोज ने अंतरिम जमानत देकर रिहा कर दिया।
रामपुर गार्डन निवासी अधिवक्ता कमल मोहन निगम और उनके बेटे अंकुर निगम के खिलाफ उनके भतीजे अंबर निगम ने सात अप्रैल, 2015 को शहर कोतवाली में भारतीय दंड संहिता की धारा 448, 420, 467, 468, 427, 406 व 506 के तहत मामला दर्ज कराया था। डीएम के आदेश पर यह मामला दर्ज हुआ था। अधिवक्ता अंबर के ताऊ हैं, मकान के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। अंबर ने आरोप लगाया था कि ताऊ उसकी करोड़ों की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। उसके माता-पिता के लाखों रुपये उनके कब्जे में हैं। बालिग होने पर वह उसे संपत्ति देने के बजाए फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को आला अधिकारियों के आदेश पर कोतवाली पुलिस अधिवक्ता को गिरफ्तार कर लाई और चालान कर सीजेएम कोर्ट में पेश कर दिया। अधिवक्ता की तरफ से दाखिल जमानत प्रार्थनापत्र को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुसुम लता राठौर ने सुनकर मामले को गंभीर बताते हुए खारिज कर दिया। खारिजा आदेश के साथ अधिवक्ता वीपी ध्यानी ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजाराम सरोज के समक्ष जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई तक के लिए अधिवक्ता को अंतरिम जमानत पर रिहा करने की प्रार्थना की। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने अधिवक्ता को 25000 रुपये की दो जमानती व इतनी ही राशि का व्यक्तिगत बंधनामा देने पर रिहा करने के साथ ही जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के लिए 25 अक्तूबर की तिथि तय की है।
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रामपुर गार्डन निवासी अधिवक्ता कमल मोहन निगम और उनके बेटे अंकुर निगम के खिलाफ उनके भतीजे अंबर निगम ने सात अप्रैल, 2015 को शहर कोतवाली में भारतीय दंड संहिता की धारा 448, 420, 467, 468, 427, 406 व 506 के तहत मामला दर्ज कराया था। डीएम के आदेश पर यह मामला दर्ज हुआ था। अधिवक्ता अंबर के ताऊ हैं, मकान के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। अंबर ने आरोप लगाया था कि ताऊ उसकी करोड़ों की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। उसके माता-पिता के लाखों रुपये उनके कब्जे में हैं। बालिग होने पर वह उसे संपत्ति देने के बजाए फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को आला अधिकारियों के आदेश पर कोतवाली पुलिस अधिवक्ता को गिरफ्तार कर लाई और चालान कर सीजेएम कोर्ट में पेश कर दिया। अधिवक्ता की तरफ से दाखिल जमानत प्रार्थनापत्र को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुसुम लता राठौर ने सुनकर मामले को गंभीर बताते हुए खारिज कर दिया। खारिजा आदेश के साथ अधिवक्ता वीपी ध्यानी ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजाराम सरोज के समक्ष जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई तक के लिए अधिवक्ता को अंतरिम जमानत पर रिहा करने की प्रार्थना की। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने अधिवक्ता को 25000 रुपये की दो जमानती व इतनी ही राशि का व्यक्तिगत बंधनामा देने पर रिहा करने के साथ ही जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के लिए 25 अक्तूबर की तिथि तय की है।
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