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कार में युवक-युवती की मौत के मामले में छह साल बाद एसी निकला कसूरवार
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बरेली। आंवला के एक गैराज में खड़ी कार में युवक-युवती की मौत होने की गुत्थी सुलझाने में सीबीसीआईडी को छह साल लग गए। दोनों की नग्न लाश कार से बरामद हुई थी। परिवार के हत्या की आशंका जताने पर सीबीसीआईडी मामले की जांच कर रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने पर सीबीसीआईडी के आग्रह पर सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने डॉक्टरों का पैनल बनाकर दोबारा जांच कराई। जिला अस्पताल के डॉ. वगीश वैश्य की अध्यक्षता में बने पैनल ने सारी रिपोर्टों और कार का परीक्षण करने के बाद पाया कि खड़ी कार में एसी चलने से इंजन से निकली मोनोऑक्साइड और दोनों के सांस छोड़ने से कार्बन डाईऑक्साइड जमा होने से दोनों की मौत हुई। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर अब सीबीसीआईडी केस में क्लोजर रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर रही है।
आंवला थाना क्षेत्र के एक गांव का मार्केटिंग कंपनी में काम करने वाला युवक 23 अगस्त, 2012 को गैराज में खड़ी अपनी कार में एक युवती के साथ मृत मिला था। उस वक्त भी कार का एसी चल रहा था। युवती क्षेत्र के ही एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका थी। युवक के पिता शुरू से ही हत्या की बात कह रहे थे। उनका कहना था कि उनके बेटे के पास कं पनी के 2.65 लाख रुपये थे, जो मौके पर नहीं मिलेे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने के बाद थाना पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी। इसके बाद पिता ने पैरवी पर केस की जांच सीबीसीआईडी को दिला दी। इंस्पेक्टर रविंद्र सक्सेना इस मामले की जांच कर रहे थे। डॉक्टरों के पैनल ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि गैराज में खड़ी कार में शीशे बंद होने और एसी चलने से अंदर ऑक्सीजन का लेवल घट गया और कार्बनडाईऑक्साइड तथा मोनेऑक्साइड गैस का लेवल खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया। चूंकि दोनों गैसों में तेज गंध नहीं होती है, लिहाजा युवक-युवती को इसका अंदाजा नहीं हुआ और दोनों की मौत हो गई।
खड़ी कार में एसी चलाकर न सोएं
डॉक्टरों के मुताबिक, खड़ी कार में एसी चलने से अंदर की ऑक्सीजन खत्म हो जाती है। अंदर बैठे लोगों द्वारा छोड़ी गई कार्बनडाईऑक्साइड भी एकत्रित होती रहती है। इंजन से निकलने वाली मोनोऑक्साइड गैस को भी एसी कार के अंदर भेजता रहता है, जो जानलेवा साबित होती है। डॉक्टरों का कहना है कि खड़ी कार में एसी चलाकर कभी न सोएं।
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आंवला थाना क्षेत्र के एक गांव का मार्केटिंग कंपनी में काम करने वाला युवक 23 अगस्त, 2012 को गैराज में खड़ी अपनी कार में एक युवती के साथ मृत मिला था। उस वक्त भी कार का एसी चल रहा था। युवती क्षेत्र के ही एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका थी। युवक के पिता शुरू से ही हत्या की बात कह रहे थे। उनका कहना था कि उनके बेटे के पास कं पनी के 2.65 लाख रुपये थे, जो मौके पर नहीं मिलेे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने के बाद थाना पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी। इसके बाद पिता ने पैरवी पर केस की जांच सीबीसीआईडी को दिला दी। इंस्पेक्टर रविंद्र सक्सेना इस मामले की जांच कर रहे थे। डॉक्टरों के पैनल ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि गैराज में खड़ी कार में शीशे बंद होने और एसी चलने से अंदर ऑक्सीजन का लेवल घट गया और कार्बनडाईऑक्साइड तथा मोनेऑक्साइड गैस का लेवल खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया। चूंकि दोनों गैसों में तेज गंध नहीं होती है, लिहाजा युवक-युवती को इसका अंदाजा नहीं हुआ और दोनों की मौत हो गई।
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खड़ी कार में एसी चलाकर न सोएं
डॉक्टरों के मुताबिक, खड़ी कार में एसी चलने से अंदर की ऑक्सीजन खत्म हो जाती है। अंदर बैठे लोगों द्वारा छोड़ी गई कार्बनडाईऑक्साइड भी एकत्रित होती रहती है। इंजन से निकलने वाली मोनोऑक्साइड गैस को भी एसी कार के अंदर भेजता रहता है, जो जानलेवा साबित होती है। डॉक्टरों का कहना है कि खड़ी कार में एसी चलाकर कभी न सोएं।
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