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दलदल में गिरी दूसरी कार वरना होता एक और हादसा

Thu, 27 Jun 2019 02:32 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2019 02:32 AM IST
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दलदल में गिरी दूसरी कार वरना होता एक और हादसा
फरीदपुर (बरेली)। हाईवे में बने गड्ढे और तेज रफ्तार कार उत्तराखंड के शिक्षामंत्री के बेटे और साथी की मौत की वजह बनी। दूसरी कार भी अगर दलदल में न गिरती तो एक और बड़ा हादसा होना तय था। उस कार से निकले लोगों ने जान बचने पर भगवान का शुक्रिया अदा किया।
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बाजपुर से बरात कई कारों के काफिले के साथ निकली थी। इन्हीं में अंकुर की वरना कार शामिल थी। वे खुद ही उसे ड्राइव कर रहे थे। हादसे की वजह ऊंचा नीचा गड्ढे वाला हाईवे और अचानक आए डायवर्जन पर गाड़ी नियंत्रित न होना रहा। यही वजह रही जो कार की दूसरी ओर से आ रहे ट्रक से भिड़ंत हो गई। अंकुर की कार के ठीक पीछे चल रही क्रेटा कार भी इस हादसे से अनियंत्रित हो गई। हालांकि ड्राइवर ने सूझबूझ से काम लेकर कार दूसरी साइड में मोड़ दी, जिससे वह सड़क से नीचे बरसात के पानी से बने कीचड़ के दलदल में जा गिरी। दलदल न होता तो ये कार भी बड़े हादसे का शिकार हो जाती। पुलिस पहुंची तो तीनों वाहनों को जेसीबी से हटवाया। अंकुर की कार में नमकीन के पैकेट आदि काफी सामान था।
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पोस्टमार्टम कराने की हिम्मत नहीं, बमुश्किल भरा पंचनामा
बरेली। मंत्री के पुत्र के शव का पंचनामा भरने में ही पुलिस के पसीने छूट गए। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने जब अंकुर और मुन्ना गिरि को मृत घोषित किया तो परिवारवाले अंकुर का शव लेकर गदरपुर चले गए। उस वक्त मौके पर मौजूद पुलिस में यह हिम्मत नहीं हुई कि पोस्टमार्टम की बात परिजनों से कहें। पुलिस अधिकारियों को जब इसका पता लगा तो उन्होंने इंस्पेक्टर फरीदपुर अशोक पाल को डांटा कि पोस्टमार्टम के बाद ही शव परिवार वालों को सौंपना चाहिए था। तब इंस्पेक्टर ने गदरपुर थाना प्रभारी को कॉल करके वहीं पर पोस्टमार्टम करा लेने को कहा। गदरपुर इंस्पेक्टर ने यह कहकर हाथ खडे़ कर दिये कि मंत्री और मुख्यमंत्री तक यहां पहुंच चुके हैं। ऐसे समय में वह पोस्टमार्टम के बारे में नहीं कह सकते। आपको बरेली में ही पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। बमुश्किल यह बात मंत्री के पीए तक पहुंचाई जा सकी। उन्होंने परिवार से बात की तो पोस्टमार्टम से साफ इंकार कर दिया गया। बमुश्किल परिवार इस बात पर तैयार हुआ कि पंचनामा भरवा लेंगे। तब पंचनामा भरवाया गया।
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