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सीट बेल्ट लगाना भूले, नहीं खुले एयर बैग

Mon, 10 Jul 2017 01:04 AM IST
Updated Mon, 10 Jul 2017 01:04 AM IST
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सीट बेल्ट लगाना भूले, नहीं खुले एयर बैग
Bareilly - फोटो : Bareilly
बरेली।
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मयूर वन चेतना केंद्र के मोड़ पर हादसा में कारोबारी युवराज की मौत होने के बाद पुलिस ने फार्चूनर कार जांच की। भीषण हादसे में फार्चूनर के एयर बैग नहीं खुलने पर पुलिस चौंक गई। कारण तलाशे गए तो सामने आया कि युवराज ने कार चलाने के दौरान सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। सीट बेल्ट से आटो कनेक्ट होने के कारण हादसे के वक्त फार्चूनर के एयर बैग नहीं खुला। माना जा रहा है कि अगर युवा कारोबारी सीट बेल्ट लगाते तो शायद उनकी जान बच सकती।
रामपुर गार्डन में रहने वाले कनुज कुमार की पंजाबी मार्केट में मीनाक्षी साड़ी की दुकान है। खेतान अस्पताल में इलाज करवाने के दौरान उन्होंने बताया कि मयूर वन चेतना केंद्र के मोड़ पर अचानक एक वाहन के सामने आते उन्होंनेब्रेक लगाया था। पीछे से उनकी कार में टक्कर लगी, जिसके बाद कार सड़क पर पलट गई। चार से पांच बार पलटने के बाद कार सड़क के दूसरी तरफ पहुंच चुकी थी। उन्हें ज्यादा चोट नहीं आई थी। उनकी पत्नी रूपल के कंधे से खून रिस रहा था। वह कार से बाहर निकले और फार्चूनर तक चलकर गए तो देखा कि युवराज लहूलुहान है, उसको बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन निकाल नहीं सके। हाईवे के किनारे से कराहने की आवाज सुनकर उन्होंने मोबाइल की रोशनी में देखा तो शिवी खून से लथपथ नजर आई। उन्होंने मोबाइल से पुलिस हेल्पलाइन पर हादसे की सूचना दी। दस मिनट में पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंच गए थे।
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बरेली में ला रहे थे बड़ा प्रोजेक्ट
नोयडा में रियल स्टेट के बड़े कारोबारी अनिल शाह ने एटीएस ग्रुप से अलग होकर शाह ग्रुप नाम से कारोबार शुरू किया। कारोबारी अनिल शाह के नजदीकी माने जाने वाले युवराज कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल थे। यह कंपनी बरेली में पीलीभीत हाईवे पर फन सिटी के पास बड़ा प्रोजेक्ट लेकर आ रही थी। जिसका काम युवराज संभालते थे। हाल में डीडीपुरम में दीपक टॉवर में कंपनी का नया ऑफिस का उद्घाटन किया गया था।
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छात्र संघ अध्यक्ष चुनाव भी लड़े
बरेली कॉलेज से स्नातक करने के बाद युवराज ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से परास्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई भी विश्व विद्यालय में की। उन्होंने एनएसयूआई से छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि वह हार गए थे। बावजूद इसके छात्रों के हितों के लिए आवाज उठाते रहते थे।

वालीबाल राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी
युवराज वालीबाल का राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे। लखनऊ के स्पोर्ट कॉलेज में रहकर उन्होंने खेल के गुर सीखें। स्टेडियम में बेडमिंटन खेलने के लिए पूर्व एमएलए शहजिल इस्लाम के साथ जाया करते थे। उनकी पत्नी शिवी भी शूटिंग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है।

चुने गए द रियल स्टेट डेवलपर
नवंबर 2016 में युवराज को द टाइम्स ऑफ इंडिया की तरफ से रियल स्टेट डेवलपर के तौर पर सम्मानित किया गया था। कारोबार के साथ सामाजिक सेवा में कई बार उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। वह रोटरी क्लब का भी हिस्सा थे।

बड़ी हस्तियों से रहे नजदीकी संबंध
मेयर आईएस तोमर, पूर्व एमएलए शहजिल इस्लाम सहित कई राजनेताओं के साथ उनके नजदीकी संबंध थे। चुनाव के वक्त वह प्रचार के कामों में भी रूचि लेते थे। भोजीपुरा की विधान सभा सीट से मूल निवासी युवराज की पत्नी शिवी भी शेरगढ़ से ब्लॉक प्रमुख रही है।

भोजीपुरा में रहते है मां और पिता
सन सिटी विस्तार में युवराज अपने परिवार के साथ रहते थे जबकि उनके पिता वीरेंद्र सिंह भोजीपुरा में रहकर किसानी करते थे। उनकी पिता भी राजनीति में सक्रिय रहे। उनका गांधीनगर में भी मकान है।

मासूम बच्चों को देखकर लोगों की आंखें भर आई
युवराज की मौत की खबर उनके बच्चों सात वर्षीय दिव्यांश को नहीं बताई गई। उनकी सात महीने की बेटी मनीषा को हादसे के वक्त वह घर छोड़कर गए थे। युवराज का शव घर पहुंचने के बाद मासूम बच्चों को देखकर लोगों की आंखों में आंसू भरे आ रहे थे। हर किसी के जुबां पर चर्चा थी कि हर किसी का भला चाहने वाले शख्स को इतनी जल्दी भगवान ने क्यों बुला लिया।

एक्सीडेंट जोन बना मयूर वन चेतना का मोड़
बरेली। मयूर वन चेतना केंद्र का मोड़ एक्सीडेंट जोन बनता जा रहा है। तीखे मोड़ पर तेज रफ्तार गाड़ियां अक्सर हादसे का शिकार होती है, जिसमें लोग काल के गाल में समा जाते हैं। युवा कारोबारी की मौत के बाद भी लोगों के बीच चर्चा रही कि इसी तीखे मोड़ की वजह से दर्दनाक हादसा हुआ।
- मार्च 2017 में मुरादाबाद नगर निगम में जेई संजय कुमार की कार ट्रक में घुस गई थी। उनकी मौके पर ही मौत होने के साथ उनके बेटे और बेटी ने भी जान गंवाई थी।

- जून 2017 टेंपो की चपेट में आकर बाइक सवार किसान ने जान गंवाई थी।
- अप्रैल 2017 ट्रक को ओवरटेक करने के चक्कर में बाइक सवार दो युवक काल के गाल में समा गए थे।
- नवंबर 2014 में मारुति कार और ट्रक की भीषण टक्कर में छह लोगों की मौत हो चुकी है। जेसीबी मशीन मशीन की मदद से मारुति कार को ट्रक से बाहर निकाला गया था।
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