{"_id":"5cb0eef4bdec22144855a96a","slug":"101555099380-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फ्राड कंपनी के ओहदेदारों की गर्दन फंसी तो बने फरियादी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फ्राड कंपनी के ओहदेदारों की गर्दन फंसी तो बने फरियादी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। पिछले साल निवेशकों का करीब तीस करोड़ रुपया समेटकर फरार हुई कंपनी के एजेंट और ओहदेदारों को अब निवेशक घेर रहे हैं। इनमें से कुछ पर पहले से मुकदमा दर्ज है और वे पुलिस के रडार पर हैं। ऐसे ही कई लोग शुक्रवार को करीब डेढ़ सौ लोगों की भीड़ लेकर एसएसपी दफ्तर पहुंचे तो एसएसपी ने उन्हें ही कटघरे में खड़ा कर दिया। कहा- तुम तो खुद ही आरोपी हो, पुलिस न्यायसंगत कार्रवाई कर रही है, जो दोषी होगा वो जेल जाएगा।
मिनी बाईपास निवासी ऋषिराम यादव कई महिला-पुरुषों को लेकर एसएसपी मुनिराजजी से मिले। कहा कि 2010 में वह बेरोजगार थे। तब बसंत विहार कॉलोनी के विनोद कुमार से मुलाकात हुई। विनोद ने उन्हें एडीएम कंपाउंड के सामने स्थित अपने दफ्तर में बुुलाया। विनोद और उसके बहनोई विजय ने बताया कि वे विनायक प्रोपमार्ट इंडिया लिमिटेड कंपनी चलाते हैं। कंपनी रुपया जमा करके साढ़े पांच साल में रकम दोगुनी करके देती है। इस धन को वे लोग जमीन खरीद और निर्माण में लगाते हैं, जिससे रकम डूबने का कोई रिस्क नहीं है। अच्छे कमीशन का वादा किया तो उन्होंने अलीम कुरैशी, शमशाद, सफदर अली, ताहिर खान, अबरार अहमद, ओमकार सिंह व ओमपाल आदि को जोड़कर एजेंट बनाया। जनता के कई करोड़ रुपये कंपनी में निवेश कराए। फिर विनोद ने कहा कि काम से खुश होकर कंपनी तुम्हें डायरेक्टर बना रही है और उन लोगों को कंपनी में पदों की जिम्मेदारी दे दी और खुद को कंपनी से अलग करके रकम लेकर बैठ गया। धोखाधड़ी होने पर कई निवेशकों ने विनोद समेत उन लोगों पर रिपोर्ट कराई थी। तब से विनोद लगातार निवेशकों की रकम वापस कराने का झांसा दे रहा था। अब वह बहनोई के साथ फरार है। पुलिस न तो उनकी रिपोर्ट लिखती है और न ही उसे खोजती है।
विनोद समेत धोखाधड़ी के अन्य आरोपियों पर दर्ज मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच कर रही है। नई शिकायत करने वाले लोग ज्यादा दोषी हैं क्योंकि इन्होंने अपने परिचित लोगों का धन फ्रॉड कंपनी में लगवाकर भरोसा तोड़ा है। निवेशक इन्हें परेशान कर रहे हैं तो ये नई रिपोर्ट लिखवाकर मामले को उलझाना चाहते हैं। - मुनिराज जी. एसएसपी
विज्ञापन
महाठग राजेश के कई साथी अभी भी फरार
श्री गंगा इन्फ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजेश मौर्या और उसके साथियों ने भी ऐसे ही निवेशकों का भरोसा जीतकर करीब दो सौ करोड़ रुपये की ठगी की थी। राजेश व उसके साथियों पर बारादरी थाने में रिपोर्ट हुई थी। क्राइम ब्रांच इसमें चार्जशीट लगा चुकी है और करीब दस लोग जेल में हैं। पूर्व में विवेचना कर चुकी बारादरी पुलिस पर आरोप है कि शहर भर में दफ्तर खोलने वाले कई एजेंटों को आरोपी बनाया गया था, जिनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही। बल्कि कई निवेशकों को ही दोषी बना दिया गया है जिनके नाम अब समन और वारंट आ रहे हैं।
कंपनी भाग गई, चेक भी बाउंस निकला
श्री गंगा इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी की निवेशक नवादा शेखान निवासी ऊषा देवी ने बारादरी थाने में तहरीर दी कि एक लाख रुपये जमा करने पर उन्हें एक सिक्योरिटी मनी का चेक दिया था। कहा था कि कंपनी पर संदेह होने पर यह चेक बैंक में जमा कर रुपये वापस ले सकते हैं। छह अप्रैल को उन्होंने बैंक में चेक लगाया तो बाउंस हो गया। बैंक वालों ने बताया कि चेक से संबंधित खाता काफी समय पहले बंद हो चुका है।
विज्ञापन
मिनी बाईपास निवासी ऋषिराम यादव कई महिला-पुरुषों को लेकर एसएसपी मुनिराजजी से मिले। कहा कि 2010 में वह बेरोजगार थे। तब बसंत विहार कॉलोनी के विनोद कुमार से मुलाकात हुई। विनोद ने उन्हें एडीएम कंपाउंड के सामने स्थित अपने दफ्तर में बुुलाया। विनोद और उसके बहनोई विजय ने बताया कि वे विनायक प्रोपमार्ट इंडिया लिमिटेड कंपनी चलाते हैं। कंपनी रुपया जमा करके साढ़े पांच साल में रकम दोगुनी करके देती है। इस धन को वे लोग जमीन खरीद और निर्माण में लगाते हैं, जिससे रकम डूबने का कोई रिस्क नहीं है। अच्छे कमीशन का वादा किया तो उन्होंने अलीम कुरैशी, शमशाद, सफदर अली, ताहिर खान, अबरार अहमद, ओमकार सिंह व ओमपाल आदि को जोड़कर एजेंट बनाया। जनता के कई करोड़ रुपये कंपनी में निवेश कराए। फिर विनोद ने कहा कि काम से खुश होकर कंपनी तुम्हें डायरेक्टर बना रही है और उन लोगों को कंपनी में पदों की जिम्मेदारी दे दी और खुद को कंपनी से अलग करके रकम लेकर बैठ गया। धोखाधड़ी होने पर कई निवेशकों ने विनोद समेत उन लोगों पर रिपोर्ट कराई थी। तब से विनोद लगातार निवेशकों की रकम वापस कराने का झांसा दे रहा था। अब वह बहनोई के साथ फरार है। पुलिस न तो उनकी रिपोर्ट लिखती है और न ही उसे खोजती है।
विज्ञापन
विनोद समेत धोखाधड़ी के अन्य आरोपियों पर दर्ज मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच कर रही है। नई शिकायत करने वाले लोग ज्यादा दोषी हैं क्योंकि इन्होंने अपने परिचित लोगों का धन फ्रॉड कंपनी में लगवाकर भरोसा तोड़ा है। निवेशक इन्हें परेशान कर रहे हैं तो ये नई रिपोर्ट लिखवाकर मामले को उलझाना चाहते हैं। - मुनिराज जी. एसएसपी
विज्ञापन
महाठग राजेश के कई साथी अभी भी फरार
श्री गंगा इन्फ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजेश मौर्या और उसके साथियों ने भी ऐसे ही निवेशकों का भरोसा जीतकर करीब दो सौ करोड़ रुपये की ठगी की थी। राजेश व उसके साथियों पर बारादरी थाने में रिपोर्ट हुई थी। क्राइम ब्रांच इसमें चार्जशीट लगा चुकी है और करीब दस लोग जेल में हैं। पूर्व में विवेचना कर चुकी बारादरी पुलिस पर आरोप है कि शहर भर में दफ्तर खोलने वाले कई एजेंटों को आरोपी बनाया गया था, जिनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही। बल्कि कई निवेशकों को ही दोषी बना दिया गया है जिनके नाम अब समन और वारंट आ रहे हैं।
कंपनी भाग गई, चेक भी बाउंस निकला
श्री गंगा इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी की निवेशक नवादा शेखान निवासी ऊषा देवी ने बारादरी थाने में तहरीर दी कि एक लाख रुपये जमा करने पर उन्हें एक सिक्योरिटी मनी का चेक दिया था। कहा था कि कंपनी पर संदेह होने पर यह चेक बैंक में जमा कर रुपये वापस ले सकते हैं। छह अप्रैल को उन्होंने बैंक में चेक लगाया तो बाउंस हो गया। बैंक वालों ने बताया कि चेक से संबंधित खाता काफी समय पहले बंद हो चुका है।