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फर्जी आधार से राशन घोटाले की परतें उधेड़ेगी क्राइम ब्रांच
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बरेली। योगी सरकार में आधार कार्ड में बदलाव करके गरीबों का राशन डकारने के चर्चित मामले की जांच क्राइम ब्रांच के हवाले की गई है। चार महीने पहले राशन घोटाला में पूर्ति निरीक्षक की तरफ से कोतवाली, सीबीगंज, प्रेमनगर, बारादरी और किला थानों में करीब 12 मामले सामने आए थे। इनमें दस केस की एफआईआर थानों में दर्ज कराई जा चुकी है। थाने की पुलिस से आरोपियों पर शिकंजा कसने में शिथिलता को देखते हुए एसएसपी मुनिराज जी. के आदेश पर घोटाले की जांच एसपी क्राइम रमेश भारतीय को दी गई है।
सूबे के करीब 44 जनपदों में बड़े पैमाने पर आधार कार्ड के नंबर में बदलाव करके सरकारी राशन निकालने के मामले अगस्त 2018 में सामने आए थे। सरकार ने लखनऊ कंट्रोल रूम के जरिये सूबे में कार्ड धारक और उनके आधार कार्ड का ऑनलाइन सत्यापन कराया। पाया गया कि काफी परिवारों के आधार कार्ड कई-कई दुकानों से लिंक हैं, जिनके आधार पर राशन हासिल किया जा रहा है। प्रदेश में सैकड़ों की संख्या में ऐसे मामले सामने आने पर एफआईआर के आदेश होने के बाद तकरीबन सभी जिलों में रिपोर्ट दर्ज की गईं। बरेली में कुल बारह मामले सामने आए थे, जिनमें दस एफआईआर लिखी गईं।
ऐसे करते हैं फ र्जीवाड़ा
राशन कार्ड से लिंक असली आधार नंबर में कुछ फेरबदल किया जाता है। फेरबदल के बाद नए आधार नंबर वाले व्यक्ति के अंगूठे का इस्तेमाल कर राशन ले लिया जाता है। राशन लेने के बाद आधार नंबर को सही कर देते हैं। इसके चलते असली कार्ड धारक को राशन नहीं मिल पाता। एसपी क्राइम रमेश भारतीय ने बताया कि आवश्यक वस्तु वितरण के लिए एनआईसी के जरिये यूआईडीएआई की आधार बायोमेट्रिक ऑडेंटिफिकेशन का दुरुपयोग करके वास्तविक लाभार्थी के सीडेड आधार संख्या को दोबारा उसके डाटा बेस में अपडेट किया गया था। इस घोटाले की जड़ में यही गड़बड़ी है।
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क्राइम ब्रांच ने आधार कार्ड नंबरों के दुरुपयोग से राशन घोटाले की जांच शुरू कर दी है। पूर्ति विभाग से संबंधित मामला होने के चलते जल्द बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
- रमेश भारतीय, एसपी क्राइम
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सूबे के करीब 44 जनपदों में बड़े पैमाने पर आधार कार्ड के नंबर में बदलाव करके सरकारी राशन निकालने के मामले अगस्त 2018 में सामने आए थे। सरकार ने लखनऊ कंट्रोल रूम के जरिये सूबे में कार्ड धारक और उनके आधार कार्ड का ऑनलाइन सत्यापन कराया। पाया गया कि काफी परिवारों के आधार कार्ड कई-कई दुकानों से लिंक हैं, जिनके आधार पर राशन हासिल किया जा रहा है। प्रदेश में सैकड़ों की संख्या में ऐसे मामले सामने आने पर एफआईआर के आदेश होने के बाद तकरीबन सभी जिलों में रिपोर्ट दर्ज की गईं। बरेली में कुल बारह मामले सामने आए थे, जिनमें दस एफआईआर लिखी गईं।
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ऐसे करते हैं फ र्जीवाड़ा
राशन कार्ड से लिंक असली आधार नंबर में कुछ फेरबदल किया जाता है। फेरबदल के बाद नए आधार नंबर वाले व्यक्ति के अंगूठे का इस्तेमाल कर राशन ले लिया जाता है। राशन लेने के बाद आधार नंबर को सही कर देते हैं। इसके चलते असली कार्ड धारक को राशन नहीं मिल पाता। एसपी क्राइम रमेश भारतीय ने बताया कि आवश्यक वस्तु वितरण के लिए एनआईसी के जरिये यूआईडीएआई की आधार बायोमेट्रिक ऑडेंटिफिकेशन का दुरुपयोग करके वास्तविक लाभार्थी के सीडेड आधार संख्या को दोबारा उसके डाटा बेस में अपडेट किया गया था। इस घोटाले की जड़ में यही गड़बड़ी है।
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क्राइम ब्रांच ने आधार कार्ड नंबरों के दुरुपयोग से राशन घोटाले की जांच शुरू कर दी है। पूर्ति विभाग से संबंधित मामला होने के चलते जल्द बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
- रमेश भारतीय, एसपी क्राइम