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दबंगों और पुलिस के कहर के बाद बस्ती छोड़कर भागे जनजाति के सैकड़ों लोग

Mon, 09 Sep 2019 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 09 Sep 2019 01:45 AM IST
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crime
नवाबगंज। सड़क चलते एक बच्चे को बाइक की टक्कर लगने की घटना पर दो जातीय समुदायों के आमने-सामने आने के बाद नवादा बथुआ गांव में अनुसूचित जनजाति के परिवारों पर पहले दूसरी जाति के लोगों और फिर पुलिस ने जमकर कहर ढाया। बस्ती पर हमला कर उसकी बिजली काटने के बाद घरों में घुसकर लाठी-डंडों से लोगों को पीटा गया। चूल्हे-चारपाई तोड़ने के साथ नल तक उखाड़कर फेंक दिए गए। इस घटना से खौफ में आए जनजाति के करीब 500 लोग गांव छोड़कर चले गए हैं। इन परिवारों के इक्का-दुक्का बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ही गांव में बचे हैं जिनका दहशत से बुरा हाल है।
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नवादा गांव में महावट जनजाति के करीब पांच सौ लोग झुग्गी-झोंपड़ियों में रहते हैं। ये लोग भीख मांगकर और पशुपालन कर जीवनयापन करते हैं। कुछ लोग खेतों में मजदूरी करके भी गुजारा करते हैं। बताया जाता है कि शुक्रवार रात कल्लू महावट का आठ वर्षीय बेटा अजय सामान लेने दुकान पर जा रहा था। इसी बीच गांव के ही रिंकू बाबू की बाइक से उसे टक्कर लगने से वह घायल हो गया। घटना के बाद दोनों पक्षों के लोग इकट्ठे हुए तो मारपीट हो गई जिसमें छह लोग घायल हो गए। दोनों पक्षों की ओर से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई जिसमें 12 लोगों को नामजद किया गया था।
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महावट परिवारों का आरोप है कि शनिवार को भारी तादाद में दूसरे पक्ष के लोगों ने हथियारों और लाठी-डंडों के साथ उनकी बस्ती पर हमला कर दिया। घरों में घुसकर लोगों के साथ मारपीट की। बस्ती की बिजली काटकर मीटर भी उखाड़कर फेंक दिए। घरों में चूल्हे, चारपाई आदि सामान तहस-नहस कर नलों तक को उखाड़ दिया। दहशत के मारे बस्ती के लोग जंगल में भाग गए। आरोप है कि दो घंटे बाद ही पुलिस ने भी गांव में दबिश दे दी और जनजाति के लोगों से जमकर बदसलूकी की। इसके बाद बुरी तरह खौफ में आए जनजाति परिवारों के करीब पांच सौ लोग सुबह होने से पहले ही जरूरी सामान लेकर गांव छोड़ गए। रविवार को पूरे दिन इस गांव में सन्नाटा पसरा रहा। बताया जाता है कि कुछ पीड़ित शिकायत करने सीओ के दफ्तर पहुंचे लेकिन वह उन्हें नहीं मिले।
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भूख से बिलख रहे हैं बच्चे और मवेशी
ज्यादातर लोग तो बस्ती छोड़कर भाग गए लेकिन दो-चार परिवार अब भी रुके हुए हैं। इन परिवारों में मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों-महिलाओं की संख्या ज्यादा है। ये लोग अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं। घरों में बच्चे और बाहर उनके मवेशी भूख से बेहाल हैं।

पुलिस की दबिश से दहशत में आए महावट परिवार
दोनों पक्ष की ओर से रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने दबिश देने शुरू कर दी। अनुसूचित जनजाति के लोगों का कहना है कि दूसरे पक्ष के लोग बड़े आदमी है। वे पुलिस से सांठगांठ कर सकते हैं। उनके पास तो खाने तक के लाले हैं तो पुलिस को कहां से देंगे और कैसे मुकदमा लड़ेंगे।

मदद के लिए समाजसेवी आए आगे
एक समाजसेवी ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि पड़ोसी गांव के अनुसूचित जनजाति के लोग एक गांव में अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरे हुए है। उनके पास खाने तक को नहीं है। इस पर उन्होंने राशन का इंतजाम किया है। उन्होंने कहा कि वे लोग बहुत की डरे और सहमे हुए हैं।


मैं पूरे दिन क्षेत्र में मोहर्रम के जुलूस के रूट मार्च में रहा और फिर मिलक पिछौड़ा चला गया। पीड़ित लोगों की शिकायत की जानकारी नहीं है। फिर भी जांच कराई जाएगी और मामला सच पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। - पीतमपाल सिंह सीओ नवाबगंज
 
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