चीखते रह गए बच्चे, पिता ने फांसी लगाकर दी जान
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मूल रूप से बरकलीगंज के निवासी रमजानी कई साल से जोगी नवादा में किराये पर रहते थे। कबाड़ा खरीदने और बेचने का काम करने वाले रमजानी ने छह महीने पहले ही डॉ. अफजल के मकान को किराये पर लिया था। पत्नी तहसीन बेगम और पांचों बच्चे साथ रहते थे। सोमवार दोपहर करीब बारह बजे तहसीन बेगम दवा लेने गई थीं। इस बीच रमजानी ने मेन कमरे का गेट अंदर से बंद कर लिया। खिड़की भी बंद की तो बेटे सलमान को अटपटा लगा। उसने पिता से गेट खोलने को कहा पर उन्होंने न सुनी। छत से बेटी समरीन दौड़ती आई। शोर मचाया तो पड़ोसी भी आ गए। अनहोनी की आशंका में इन लोगों ने पुलिस चौकी पर फोन किया। वहां से चौकी प्रभारी गजेंद्र त्यागी सिपाहियों को लेकर आए। गेट न खुला तो पुलिस ने लोगों की मदद से लकड़ी के दरवाजे को धकेला। तब कुंडा टूटने से गेट खुल गया। अंदर पंखे से तहमद के सहारे रमजानी का शव लटका था। ऊंचाई तक पहुंचने के लिए तख्त के ऊपर कुर्सी और उसके ऊपर बड़ा स्पीकर रखा गया था। मौत से घर में कोहराम मच गया। तहसीन भी पछाड़ें खा रही थीं। तहसीन की बहनें आईं तो उनसे तकरार भी हुई। बहनों ने तहसीन को इसका जिम्मेदार बताया और चली गईं। तहसीन का कहना था कि बहनें उनके खिलाफ पति के कान भरती थीं। इससे पति उन पर शक करने लगे। पंद्रह दिन से वे उनसे नहीं बोल रहे थे। गुमसुम रहते थे, पर वे जान दे देंगे इसका अंदाजा न था। तहसीन बहनों पर अपना घर उजाड़ने का आरोप लगा रही थीं। फरीदपुर से आए रमजानी के मामा हसीन ने तहसीन को आड़े हाथों लेते हुए भांजे की मौत पर सवाल उठाये, कहा कि बच्चों से बात करके पुलिस को तहरीर देंगे। वहीं चौकी प्रभारी ने इसे घरेलू कलह में आत्महत्या का मामला बताया। सोमवार को शव का पोस्टमार्टम होगा।