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कैंटीन संचालक ने बनाया गैंग, 15 लाख था ड्राइवर का हिस्सा
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बरेली। उत्तराखंड की सरिया फैक्टरी के मुनीम से लूट का मास्टर माइंड फैक्टरी के बाहर कैंटीन चलाने वाला रवि ही निकला। उसने करेली, बभिया और चनहेटा के बदमाश दोस्तों को जोड़कर लूट की प्लानिंग बनाई और ड्राइवर मगन को 15 लाख रुपये का लालच देकर अपने साथ शामिल कर लिया। कैंटीन संचालक और ड्राइवर ने खुद को वारदात से अलग भी रखा लेकिन पुलिस की सख्ती में मगन के टूटने से खुलासा हो गया।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक चनेहटा में रहने वाला रवि करीब तीन साल से किच्छा में फैक्टरी के बाहर कैंटीन चला रहा था। तमाम ड्राइवर और क्लीनरों के साथ उसका उठना-बैठना था। तभी उसे पता था कि मुनीम अक्सर करोड़ों रुपये लेकर फैक्टरी आता है। तभी उसने गांव के दोस्त अरविंद से मिलकर लूट का प्लान बनाया। अरविंद ने चनेहटा में किराये पर रहने वाले जावेद और परवेज को साथ लिया। रवि ने ड्राइवर मगन सिंह को 15 लाख रुपये का लालच देकर मिला लिया तो लखनऊ से चलते ही उसने अरविंद को कॉल करके सिग्नल दे दिया। सभी बदमाश भोजीपुरा में टोल प्लाजा के पास खड़े हो गए। वहां से गुजरने पर मगन ने हूटर बजाकर और इंडीकेटर जलाकर इशारा किया तो बदमाशों की बोलेरो उनके पीछे लग गई। फिर मगन ने टॉयलेट के बहाने गाड़ी हल्की करके घेराबंदी करा दी। बदमाशों ने पहले मुनीम को खेत में ले जाकर बांध दिया। बाद में मगन ने भी खुद को बंधवाया। बदमाश उसे मुनीम के पास ही डाल आए ताकि उस पर शक न हो। एसपी क्राइम रमेश भारतीय और एसपी देहात संसार सिंह ने जब मुनीम से अलग बात की, तभी ड्राइवर पर शक हो गया। सुबह पांच बजे उसने पूरी घटना कबूल ली। रवि खुद पूरे वक्त किच्छा कैंटीन में ही रहा ताकि उसका नाम न आए लेकिन मगन ने सबसे पहले उसी का नाम लिया।
बदमाश बोले- साढ़े सैंतालीस लाख ही थी लूट की रकम
बंटवारा करने से पहले ही पकड़े, पचास हजार किसी साथी ने उड़ा लिए
बरेली। चर्चा है कि रात में बदमाश लूट के बाद उत्तराखंड की सीमा में घुस गए थे और किच्छा में रात गुजारी। मगर पुलिस का दावा है कि घटनास्थल से आधा किमी आगे जाकर बदमाशों ने अपनी गाड़ी ऐसे संपर्क मार्ग पर मोड़ दी जो रिठौरा होते हुए शहर में आता है और टोल बच जाता है। बदमाशों के मुताबिक रात में अरविंद के घर आकर नोट गिने, साढ़े सैंतालीस लाख ही निकले। रुपये वहीं छुपाकर सब अपने घरों में जाकर सो गए। ड्राइवर से इनपुट मिलने के बाद सुबह जब उनके गांवों में पुलिस की गतिविधि बढ़ी तो वे निकल लिए। वहीं, रकम को चंद्रसेन और फिर परवेज के घर में छुपाया गया। बदमाशों की मानें तो परवेज के घर छिपाते वक्त रकम 47 लाख ही निकली। वह समझ नहीं पाए कि किस साथी के घर पचास हजार रुपये निकाल लिए गए लेकिन रकम पूरी पचास लाख न होने का उन्होंने दावा किया। मगर अफसर दो अन्य बदमाशाें की गिरफ्तारी होने तक मुनीम के पचास लाख के दावे को सही मान रहे हैं। थाने में बैठे मुनीम को भी छोड़ दिया गया है।
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क्राइम ब्रांच के मुताबिक चनेहटा में रहने वाला रवि करीब तीन साल से किच्छा में फैक्टरी के बाहर कैंटीन चला रहा था। तमाम ड्राइवर और क्लीनरों के साथ उसका उठना-बैठना था। तभी उसे पता था कि मुनीम अक्सर करोड़ों रुपये लेकर फैक्टरी आता है। तभी उसने गांव के दोस्त अरविंद से मिलकर लूट का प्लान बनाया। अरविंद ने चनेहटा में किराये पर रहने वाले जावेद और परवेज को साथ लिया। रवि ने ड्राइवर मगन सिंह को 15 लाख रुपये का लालच देकर मिला लिया तो लखनऊ से चलते ही उसने अरविंद को कॉल करके सिग्नल दे दिया। सभी बदमाश भोजीपुरा में टोल प्लाजा के पास खड़े हो गए। वहां से गुजरने पर मगन ने हूटर बजाकर और इंडीकेटर जलाकर इशारा किया तो बदमाशों की बोलेरो उनके पीछे लग गई। फिर मगन ने टॉयलेट के बहाने गाड़ी हल्की करके घेराबंदी करा दी। बदमाशों ने पहले मुनीम को खेत में ले जाकर बांध दिया। बाद में मगन ने भी खुद को बंधवाया। बदमाश उसे मुनीम के पास ही डाल आए ताकि उस पर शक न हो। एसपी क्राइम रमेश भारतीय और एसपी देहात संसार सिंह ने जब मुनीम से अलग बात की, तभी ड्राइवर पर शक हो गया। सुबह पांच बजे उसने पूरी घटना कबूल ली। रवि खुद पूरे वक्त किच्छा कैंटीन में ही रहा ताकि उसका नाम न आए लेकिन मगन ने सबसे पहले उसी का नाम लिया।
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बदमाश बोले- साढ़े सैंतालीस लाख ही थी लूट की रकम
बंटवारा करने से पहले ही पकड़े, पचास हजार किसी साथी ने उड़ा लिए
बरेली। चर्चा है कि रात में बदमाश लूट के बाद उत्तराखंड की सीमा में घुस गए थे और किच्छा में रात गुजारी। मगर पुलिस का दावा है कि घटनास्थल से आधा किमी आगे जाकर बदमाशों ने अपनी गाड़ी ऐसे संपर्क मार्ग पर मोड़ दी जो रिठौरा होते हुए शहर में आता है और टोल बच जाता है। बदमाशों के मुताबिक रात में अरविंद के घर आकर नोट गिने, साढ़े सैंतालीस लाख ही निकले। रुपये वहीं छुपाकर सब अपने घरों में जाकर सो गए। ड्राइवर से इनपुट मिलने के बाद सुबह जब उनके गांवों में पुलिस की गतिविधि बढ़ी तो वे निकल लिए। वहीं, रकम को चंद्रसेन और फिर परवेज के घर में छुपाया गया। बदमाशों की मानें तो परवेज के घर छिपाते वक्त रकम 47 लाख ही निकली। वह समझ नहीं पाए कि किस साथी के घर पचास हजार रुपये निकाल लिए गए लेकिन रकम पूरी पचास लाख न होने का उन्होंने दावा किया। मगर अफसर दो अन्य बदमाशाें की गिरफ्तारी होने तक मुनीम के पचास लाख के दावे को सही मान रहे हैं। थाने में बैठे मुनीम को भी छोड़ दिया गया है।
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