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एसएसपी के तेवर देख पलटी खाई.. नारेबाजी करते आए और देने लगे बधाई
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बरेली। जुलूसे मोहम्मदी के दौरान एक अंजुमन के लाउडस्पीकर उतरवाकर कब्जे में ले लिए जाने के मामले में भीड़ के साथ नारेबाजी करते हुए इंस्पेक्टर बारादरी के खिलाफ शिकायत करने पहुंचे समाजवादी पार्टी के नेताओं का जोश एसएसपी के तेवर देखते ही काफूर हो गया। कप्तान का तीखा अंदाज भांपते ही शिकायत पर टिकने के बजाय उन्हें बेहतर काम की बधाई दी और दफ्तर से निकल लिए।
रविवार को जुलूसे मोहम्मदी के दौरान हजियापुर के लोगों की एक अंजुमन ने जरूरत से ज्यादा लाउडस्पीकर रखे थे। इंस्पेक्टर बारादरी नरेश त्यागी ने इन लाउडस्पीकरों को उतरवाकर कब्जे में ले लिया था। अंजुमन के लोगों की पैरवी में समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता हैदर अली ने इंस्पेक्टर को फोन किया लेकिन इंस्पेक्टर ने उनकी भी एक नहीं सुनी। सोमवार को महंगाई के खिलाफ सपा का कलक्ट्रेट में प्रदर्शन का कार्यक्रम था। इस प्रदर्शन के बाद दोपहर को हैदर अली पार्टी के नेता अधिवक्ता प्रमोद यादव समेत कई महिला नेताओं के साथ जुलूस की शक्ल में एसएसपी दफ्तर पहुंच गए। गेट से ही इन लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
नारेबाजी करते हुए घुसे सपा नेताओं को पहले तो एसएसपी कक्ष के बाहर तैनात पुलिस वालों ने ही रोक लिया। नारेबाजी का कारण पूछा तो सपा नेता शांत हो गए। एसएसपी से मिलने की बात कही तो पुलिसकर्मियों ने कप्तान से पूछकर कुछ लोगों को अंदर भेज दिया। एसएसपी को हैदर अली ने बताया कि अंजुमन वालों ने ज्यादा लाउडस्पीकर लगाने पर माफीनामा तक लिखकर दे दिया फिर भी इंस्पेक्टर ने उनके कहने के बावजूद लाउडस्पीकर वापस नहीं किए। बातचीत भी ठीक लहजे में नहीं की।
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एसएसपी ने तीखे अंदाज में सपा के पूर्व प्रवक्ता से कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी है। जब लाउडस्पीकर की संख्या और आवाज तय थी तो ज्यादा लाउडस्पीकर क्यों लगाए गए थे। कप्तान ने हैदर अली से कहा कि उन्हें भी सिफारिश नहीं करनी चाहिए थी। कप्तान के तेवर देखकर हैदर अली फौरन पलटी मार गए। इंस्पेक्टर की शिकायत छोड़कर एसएसपी को जिले में बेहतर काम करने की बधाई दी। पुलिस के बेहतर काम करने की बात कहकर दूसरे नेताओं के साथ लौट गए। तय संख्या से ज्यादा लाउडस्पीकर न लगाने के बारे में पहले ही पीस कमेटी की मीटिंग और दूसरे माध्यमों से साफ कर दिया गया था। इस पर भी लोग नहीं मान रहे तो लाउडस्पीकर जब्त करने के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई के अलावा पुलिस क्या करती। - शैलेश पांडेय, एसएसपी हम राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं, कई लोग सही और गलत सिफारिश कराने आते हैं। ज्यादातर की सिफारिश करनी पड़ती है। पुलिस अफसरों को जो सही लगे वह करना चाहिए। बस यही बात बारादरी इंस्पेक्टर से हुई थी। कोई और उद्देश्य नहीं था। - हैदर अली, पूर्व प्रवक्ता सपा
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रविवार को जुलूसे मोहम्मदी के दौरान हजियापुर के लोगों की एक अंजुमन ने जरूरत से ज्यादा लाउडस्पीकर रखे थे। इंस्पेक्टर बारादरी नरेश त्यागी ने इन लाउडस्पीकरों को उतरवाकर कब्जे में ले लिया था। अंजुमन के लोगों की पैरवी में समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता हैदर अली ने इंस्पेक्टर को फोन किया लेकिन इंस्पेक्टर ने उनकी भी एक नहीं सुनी। सोमवार को महंगाई के खिलाफ सपा का कलक्ट्रेट में प्रदर्शन का कार्यक्रम था। इस प्रदर्शन के बाद दोपहर को हैदर अली पार्टी के नेता अधिवक्ता प्रमोद यादव समेत कई महिला नेताओं के साथ जुलूस की शक्ल में एसएसपी दफ्तर पहुंच गए। गेट से ही इन लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
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नारेबाजी करते हुए घुसे सपा नेताओं को पहले तो एसएसपी कक्ष के बाहर तैनात पुलिस वालों ने ही रोक लिया। नारेबाजी का कारण पूछा तो सपा नेता शांत हो गए। एसएसपी से मिलने की बात कही तो पुलिसकर्मियों ने कप्तान से पूछकर कुछ लोगों को अंदर भेज दिया। एसएसपी को हैदर अली ने बताया कि अंजुमन वालों ने ज्यादा लाउडस्पीकर लगाने पर माफीनामा तक लिखकर दे दिया फिर भी इंस्पेक्टर ने उनके कहने के बावजूद लाउडस्पीकर वापस नहीं किए। बातचीत भी ठीक लहजे में नहीं की।
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एसएसपी ने तीखे अंदाज में सपा के पूर्व प्रवक्ता से कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी है। जब लाउडस्पीकर की संख्या और आवाज तय थी तो ज्यादा लाउडस्पीकर क्यों लगाए गए थे। कप्तान ने हैदर अली से कहा कि उन्हें भी सिफारिश नहीं करनी चाहिए थी। कप्तान के तेवर देखकर हैदर अली फौरन पलटी मार गए। इंस्पेक्टर की शिकायत छोड़कर एसएसपी को जिले में बेहतर काम करने की बधाई दी। पुलिस के बेहतर काम करने की बात कहकर दूसरे नेताओं के साथ लौट गए। तय संख्या से ज्यादा लाउडस्पीकर न लगाने के बारे में पहले ही पीस कमेटी की मीटिंग और दूसरे माध्यमों से साफ कर दिया गया था। इस पर भी लोग नहीं मान रहे तो लाउडस्पीकर जब्त करने के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई के अलावा पुलिस क्या करती। - शैलेश पांडेय, एसएसपी हम राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं, कई लोग सही और गलत सिफारिश कराने आते हैं। ज्यादातर की सिफारिश करनी पड़ती है। पुलिस अफसरों को जो सही लगे वह करना चाहिए। बस यही बात बारादरी इंस्पेक्टर से हुई थी। कोई और उद्देश्य नहीं था। - हैदर अली, पूर्व प्रवक्ता सपा