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‘फैसले से देश की न्यायपालिका पर भरोसा और पक्का हुआ’
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बारह साल बाद रिहा होगा गुलाब, परिवार बेहद खुश
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बहेड़ी (बरेली)। रामपुर के सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले में बारह साल से सेंट्रल जेल में बंद गुलाब बेगुनाह साबित हुआ है। उसके साले शरीफ को सजा हुई है। शरीफ के चक्कर में ही जांच एजेंसियों को उस पर शक हुआ था और फिर उसे भी धर लिया गया था। आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने का दाग छूटने से परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। बरसों से लोगों की नजरों से बचकर वक्त गुजार रहा परिवार अब सम्मान की जिंदगी जिएगा। गुलाब के बड़े भाई कमल ने बताया कि इस फैसले से न्यायपालिका पर भरोसा और मजबूत हुआ है।
31 दिसंबर 2007 को पूरा देश नये साल का जश्न मना रहा था। उसी रात रामपुर के सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमला हुआ था। शक में जिन आठ लोगों को उठाया गया, उनमें बहेड़ी के मोहल्ला शाहगढ़ का गुलाब खान भी था। दरअसल उसका साला रामपुर निवासी शरीफ भी इस हमले में शामिल था। उसे सजा सुनाई गई है। एटीएस ने तत्कालीन इंस्पेक्टर को साथ लेकर नौ फरवरी 2008 की सुबह छह बजे गुलाब के घर दबिश दी और उसे उठा ले गये थे। परिवार के लोग करीब छह दिन तक उसे खोजते रहे कि कौन उठाकर ले गया। बाद में जब उसकी कोर्ट में पेशी हुई तब परिवार को पूरी कहानी का पता चला।
गुलाब के बडे़ भाई कमल खां बताते हैं कि भाई के गम में तीन साल बाद उनकी मां अथरी बेगम गुजर गईं। गुलाब से जब मिलने जेल गए तो वह फूट फूटकर रोया। उसे अपनी दो बेटियों और डेढ़ साल के पुत्र की चिंता सता रही थी। पत्नी नाजरा ने लोगों के कपडे़ सिलकर बच्चों को जैसे-तैसे पाला।
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कमल बताते हैं कि कचहरी के चक्कर काटते उनकी पंद्रह बीघा जमीन और एक वर्कशाप तक बिक गया। सारा कारोबार चौपट हो गया, लेकिन उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उनका परिवार ही नही पूरा शाहगढ़ मोहल्ला उनके भाई को निर्दोष बताता था। जब से शरीफ ने उसे फंसाया उसके बाद से उसकी पत्नी मायके तक नहीं गई। वह दिनरात अल्लाह से अपने शौहर के लिए दुआएं करती रहती थी। पूरे परिवार ने अक्सर चटनी रोटी खाई पर पैसा जोड़कर गुलाब की रिहाई के लिए वकील और कागजी कार्रवाई में कमी नहीं आने दी। बताया कि इतने साल परिवार ने घुट घुटकर जिए हैं। गुलाब की पत्नी व परिवार के बाकी लोगों को इंतजार है कि शनिवार या रविवार तक गुलाब घर आ जाएगा।
31 दिसंबर 2007 को पूरा देश नये साल का जश्न मना रहा था। उसी रात रामपुर के सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमला हुआ था। शक में जिन आठ लोगों को उठाया गया, उनमें बहेड़ी के मोहल्ला शाहगढ़ का गुलाब खान भी था। दरअसल उसका साला रामपुर निवासी शरीफ भी इस हमले में शामिल था। उसे सजा सुनाई गई है। एटीएस ने तत्कालीन इंस्पेक्टर को साथ लेकर नौ फरवरी 2008 की सुबह छह बजे गुलाब के घर दबिश दी और उसे उठा ले गये थे। परिवार के लोग करीब छह दिन तक उसे खोजते रहे कि कौन उठाकर ले गया। बाद में जब उसकी कोर्ट में पेशी हुई तब परिवार को पूरी कहानी का पता चला।
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गुलाब के बडे़ भाई कमल खां बताते हैं कि भाई के गम में तीन साल बाद उनकी मां अथरी बेगम गुजर गईं। गुलाब से जब मिलने जेल गए तो वह फूट फूटकर रोया। उसे अपनी दो बेटियों और डेढ़ साल के पुत्र की चिंता सता रही थी। पत्नी नाजरा ने लोगों के कपडे़ सिलकर बच्चों को जैसे-तैसे पाला।
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कमल बताते हैं कि कचहरी के चक्कर काटते उनकी पंद्रह बीघा जमीन और एक वर्कशाप तक बिक गया। सारा कारोबार चौपट हो गया, लेकिन उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उनका परिवार ही नही पूरा शाहगढ़ मोहल्ला उनके भाई को निर्दोष बताता था। जब से शरीफ ने उसे फंसाया उसके बाद से उसकी पत्नी मायके तक नहीं गई। वह दिनरात अल्लाह से अपने शौहर के लिए दुआएं करती रहती थी। पूरे परिवार ने अक्सर चटनी रोटी खाई पर पैसा जोड़कर गुलाब की रिहाई के लिए वकील और कागजी कार्रवाई में कमी नहीं आने दी। बताया कि इतने साल परिवार ने घुट घुटकर जिए हैं। गुलाब की पत्नी व परिवार के बाकी लोगों को इंतजार है कि शनिवार या रविवार तक गुलाब घर आ जाएगा।