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दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकल कराने के लिए मांगी रिश्वत, हंगामा
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बरेली। हफ्ते भर से दुष्कर्म पीड़िता के परिवार को थाना और महिला अस्पताल का चक्कर लगवाने के बाद जब महिला सिपाही ने सोमवार को मेडिकल के नाम पर दो हजार रुपये मांगे तो पीड़िता की मां का सब्र जवाब दे गया। मां ने पुलिस की कारगुजारी और पोल खोलनी शुरू की तो महिला सिपाही ने चुप कराने की कोशिश की। मामला बढ़ता गया और करीब आधे घंटे तक अस्पताल में हंगामा हुआ। आखिर में फजीहत होती देख महिला सिपाही चुपचाप खिसक ली। हालांकि पुलिस ने रिश्वत मांगने के आरोप को नकार दिया।
भमोरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता की मां के मुताबिक उसकी नाबालिग बेटी 18 अगस्त को घर में अकेली थी। शाम पांच बजे वहीं के अशोक कश्यप ने उसके साथ दुष्कर्म किया। चीख पुकार सुनकर बेटा घर आया तो अशोक रिपोर्ट कराने पर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकला। 19 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कर ली गई, लेकिन मेडिकल नहीं कराया जा रहा। आरोप था कि चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मी रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं दे रहे थे। मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल बुलाया तो सोमवार को वहां एक महिला कांस्टेबल ने दो हजार रुपये मांगे। मना किया तो जो रुपये हैं वही देने को कहा। इस पर पीड़ित ने ढाई सौ रुपये दे दिए लेकिन बाकी देेने से इंकार कर दिया। बगैर रुपये दिये मेडिकल क राने से सिपाही ने मना कर दिया और पैर पटकती चली गई।
आधे घंटे तक होती रही झड़प
रेप पीड़िता की मां और महिला सिपाही के बीच करीब आधा घंटा तक झड़प चलती रही। अस्पताल पहुंचे कुछ तीमारदार बीच बचाव करने आगे आए तो पीड़ित की मां महिला सिपाही से रुपये मांगने की बात कहकर रोने लगी। लोग शांत कराने लगे तो महिला सिपाही ने दरोगा को फोन कर मामले की जानकारी दी और फिर वहां से बिना मेडिकल कराए चली गई। इसके बाद पीड़ित की मां ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की बात कही।
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‘रुपये मांगने का आरोप निराधार है। किशोरी और उसकी मां दो दिन पहले थाने में भी हंगामा कर चुकी हैं। वे डॉक्टर के द्वारा दिए गए मेडिकल परीक्षण के कागजों पर दस्तखत करना नहीं चाहती थीं। बड़ी मुश्किल से ये कराया जा सका। आरोपी को पुलिस जेल भेज चुकी है। उसके खिलाफ चार्जशीट लगाने की तैयारी है।’
- श्याम सिंह यादव, एसओ भमोरा
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भमोरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता की मां के मुताबिक उसकी नाबालिग बेटी 18 अगस्त को घर में अकेली थी। शाम पांच बजे वहीं के अशोक कश्यप ने उसके साथ दुष्कर्म किया। चीख पुकार सुनकर बेटा घर आया तो अशोक रिपोर्ट कराने पर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकला। 19 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कर ली गई, लेकिन मेडिकल नहीं कराया जा रहा। आरोप था कि चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मी रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं दे रहे थे। मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल बुलाया तो सोमवार को वहां एक महिला कांस्टेबल ने दो हजार रुपये मांगे। मना किया तो जो रुपये हैं वही देने को कहा। इस पर पीड़ित ने ढाई सौ रुपये दे दिए लेकिन बाकी देेने से इंकार कर दिया। बगैर रुपये दिये मेडिकल क राने से सिपाही ने मना कर दिया और पैर पटकती चली गई।
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आधे घंटे तक होती रही झड़प
रेप पीड़िता की मां और महिला सिपाही के बीच करीब आधा घंटा तक झड़प चलती रही। अस्पताल पहुंचे कुछ तीमारदार बीच बचाव करने आगे आए तो पीड़ित की मां महिला सिपाही से रुपये मांगने की बात कहकर रोने लगी। लोग शांत कराने लगे तो महिला सिपाही ने दरोगा को फोन कर मामले की जानकारी दी और फिर वहां से बिना मेडिकल कराए चली गई। इसके बाद पीड़ित की मां ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की बात कही।
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‘रुपये मांगने का आरोप निराधार है। किशोरी और उसकी मां दो दिन पहले थाने में भी हंगामा कर चुकी हैं। वे डॉक्टर के द्वारा दिए गए मेडिकल परीक्षण के कागजों पर दस्तखत करना नहीं चाहती थीं। बड़ी मुश्किल से ये कराया जा सका। आरोपी को पुलिस जेल भेज चुकी है। उसके खिलाफ चार्जशीट लगाने की तैयारी है।’
- श्याम सिंह यादव, एसओ भमोरा