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लाश का इलाज करने वाला अस्पताल सील
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पीलीभीत। लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करने और उसी अस्पताल के डॉक्टर की डिग्री फर्जी पाए जाने पर प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया। अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर शनिवार को डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अफसरों के साथ अस्पताल पहुंचकर ऑपरेशन थियेटर, बर्न वार्ड और आरोपी डॉक्टर का चैंबर सील कराया। वार्डों में भर्ती मरीजों को ट्रांसफर करने के लिए अस्पताल प्रशासन को तीन दिन की मोहलत दी गई है। कार्रवाई करीब दो घंटे चली। इस दौरान अस्पताल में अफरातफरी मची रही।
पूरनपुर निवासी राजू के परिवार वालों ने 18 जुलाई को प्रशासन से शिकायत की थी कि गौहनिया चौराहा स्थित पं. मैकूलाल, वीरेंद्र नाथ अस्पताल में राजू की मौत के बाद भी उसकी लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज किया जाता रहा और एक लाख रुपये वसूल लिए गए। शिकायत के साथ राजू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, इसमें मौत का समय पोस्टमार्टम होने से 12 से 24 घंटे पहले का बताया गया। डीएम ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने को कहा। एसीएमओ का तीन सदस्यीय पैनल गठित कर मामले की जांच कराई गई। आरोपी डॉक्टर के भी बयान लिए गए। इसमें यह साबित हुआ कि राजू की मौत उसे रेफर करने से सात घंटे पहले हो गई थी। यानी डॉक्टर न केवल लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करता रहा बल्कि उसने लाश को ही हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। इधर, आरोपी डॉक्टर की एमएस और एमसीएच की डिग्री को लेकर भी जांच की गई। जांच में डिग्री भी फर्जी पाई गईं। इसके बावजूद डॉक्टर के रसूख और सत्ताधारियों की पैरवी के दबाव में कार्रवाई दबी रही, लेकिन डीएम की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर शासन ने कार्रवाई के आदेश कर दिए। अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करने के बाद शनिवार को डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने एसीएमओ पीके मिश्रा, वीबी राम, सिटी मजिस्ट्रेट ऋतु पूनिया, एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी, सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल आदि की मौजूदगी में अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर, बर्न वार्ड, इंसेटिव केयर यूनिट और डॉ. योगेंद्र नाथ का चेंबर सील कर दिया। सीएमओ ने वार्डों में भर्ती रोगियों को तीन दिन में किसी और अस्पताल में शिफ्ट करने का समय दिया है।
डॉक्टर के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज
पीलीभीत। शासन से मिले निर्देश के बाद पंडित मैकूलाल वीरेंद्रनाथ हॉस्पिटल को सील करने के चंद घंटे बाद ही शनिवार देर शाम एसीएमओ डॉ.विजय बहादुर राम ने हास्पिटल के डॉ. योगेंद्र नाथ के खिलाफ नामजद तहरीर दी। इसके आधार पर सुनगढ़ी पुलिस ने धारा 419, 420, 467, 468, 471, 403, 304ए और मेडिकल एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है।
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पुलिस को दी गई तहरीर में लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज के नाम पर एक लाख रुपये वसूलने, कूटरचित फर्जी डिग्रियों से अस्पताल का संचालन करने के अलावा 31 मई 2018 में हुई बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव जिरौनिया सेमर गौंटिया निवासी वेगराज के पुत्र अनमोल की इलाज में लापरवाही से मौत के मामले को भी शामिल किया गया है। यह भी बताया गया कि जांच में डॉ.योगेंद्रनाथ की एमएस जनरल सर्जरी एवं एमसीएच इन न्यूरो सर्जरी की डिग्री मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा भारत में प्रैक्टिस के लिए मान्य नहीं है। एसपी मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि दी गई तहरीर के आधार पर सुनगढ़ी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर की डिग्री जांच में गड़बड़ मिलने और लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करने की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन के निर्देश पर प्रशासनिक टीम और सीएमओ को मैकूलाल अस्पताल भेजकर ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, बर्न यूनिट और डॉक्टर का चैंबर सील करा दिया है। वार्ड में भर्ती मरीजों को ट्रांसफर करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई है।
- वैभव श्रीवास्तव, डीएम
डीएम के आदेश पर मैकूलाल अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर उसे सील कर दिया गया है। वार्डों में भर्ती मरीजों को दूसरे किसी अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई है। कार्रवाई की रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।
-डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
अस्पताल को सिर्फ बदनाम किया जा रहा है। अगर प्रशासन जांच में एमएस और एमसीएच की डिग्री फर्जी मान रहा है तो सात साल से लगातार अस्पताल के रिन्यूवल हो रहा है, तब इसे लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए गए। रिन्यूवल के समय डिग्री से संबंधित सभी अभिलेख सीएमओ कार्यालय में उपलब्ध कराए जाते हैं। - डॉ. डीएन मिश्रा, प्रबंध निदेशक, मैकूलाल अस्पताल
पूरनपुर निवासी राजू के परिवार वालों ने 18 जुलाई को प्रशासन से शिकायत की थी कि गौहनिया चौराहा स्थित पं. मैकूलाल, वीरेंद्र नाथ अस्पताल में राजू की मौत के बाद भी उसकी लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज किया जाता रहा और एक लाख रुपये वसूल लिए गए। शिकायत के साथ राजू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, इसमें मौत का समय पोस्टमार्टम होने से 12 से 24 घंटे पहले का बताया गया। डीएम ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने को कहा। एसीएमओ का तीन सदस्यीय पैनल गठित कर मामले की जांच कराई गई। आरोपी डॉक्टर के भी बयान लिए गए। इसमें यह साबित हुआ कि राजू की मौत उसे रेफर करने से सात घंटे पहले हो गई थी। यानी डॉक्टर न केवल लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करता रहा बल्कि उसने लाश को ही हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। इधर, आरोपी डॉक्टर की एमएस और एमसीएच की डिग्री को लेकर भी जांच की गई। जांच में डिग्री भी फर्जी पाई गईं। इसके बावजूद डॉक्टर के रसूख और सत्ताधारियों की पैरवी के दबाव में कार्रवाई दबी रही, लेकिन डीएम की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर शासन ने कार्रवाई के आदेश कर दिए। अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करने के बाद शनिवार को डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने एसीएमओ पीके मिश्रा, वीबी राम, सिटी मजिस्ट्रेट ऋतु पूनिया, एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी, सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल आदि की मौजूदगी में अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर, बर्न वार्ड, इंसेटिव केयर यूनिट और डॉ. योगेंद्र नाथ का चेंबर सील कर दिया। सीएमओ ने वार्डों में भर्ती रोगियों को तीन दिन में किसी और अस्पताल में शिफ्ट करने का समय दिया है।
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डॉक्टर के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज
पीलीभीत। शासन से मिले निर्देश के बाद पंडित मैकूलाल वीरेंद्रनाथ हॉस्पिटल को सील करने के चंद घंटे बाद ही शनिवार देर शाम एसीएमओ डॉ.विजय बहादुर राम ने हास्पिटल के डॉ. योगेंद्र नाथ के खिलाफ नामजद तहरीर दी। इसके आधार पर सुनगढ़ी पुलिस ने धारा 419, 420, 467, 468, 471, 403, 304ए और मेडिकल एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है।
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पुलिस को दी गई तहरीर में लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज के नाम पर एक लाख रुपये वसूलने, कूटरचित फर्जी डिग्रियों से अस्पताल का संचालन करने के अलावा 31 मई 2018 में हुई बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव जिरौनिया सेमर गौंटिया निवासी वेगराज के पुत्र अनमोल की इलाज में लापरवाही से मौत के मामले को भी शामिल किया गया है। यह भी बताया गया कि जांच में डॉ.योगेंद्रनाथ की एमएस जनरल सर्जरी एवं एमसीएच इन न्यूरो सर्जरी की डिग्री मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा भारत में प्रैक्टिस के लिए मान्य नहीं है। एसपी मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि दी गई तहरीर के आधार पर सुनगढ़ी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर की डिग्री जांच में गड़बड़ मिलने और लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज करने की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन के निर्देश पर प्रशासनिक टीम और सीएमओ को मैकूलाल अस्पताल भेजकर ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, बर्न यूनिट और डॉक्टर का चैंबर सील करा दिया है। वार्ड में भर्ती मरीजों को ट्रांसफर करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई है।
- वैभव श्रीवास्तव, डीएम
डीएम के आदेश पर मैकूलाल अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर उसे सील कर दिया गया है। वार्डों में भर्ती मरीजों को दूसरे किसी अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई है। कार्रवाई की रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।
-डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
अस्पताल को सिर्फ बदनाम किया जा रहा है। अगर प्रशासन जांच में एमएस और एमसीएच की डिग्री फर्जी मान रहा है तो सात साल से लगातार अस्पताल के रिन्यूवल हो रहा है, तब इसे लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए गए। रिन्यूवल के समय डिग्री से संबंधित सभी अभिलेख सीएमओ कार्यालय में उपलब्ध कराए जाते हैं। - डॉ. डीएन मिश्रा, प्रबंध निदेशक, मैकूलाल अस्पताल