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वकील बोले- इंतिहा हो गई, चालान के नाम पर बेइज्जती से बचाइए
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वकील बोले- इंतिहा हो गई, चालान के नाम पर बेइज्जती से बचाइए
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। बुधवार दोपहर बार एसोसिएशन अध्यक्ष के साथ पचास से ज्यादा वकीलों ने एसएसपी दफ्तर का घेराव किया। एसएसपी के कक्ष में घुसे वकीलों ने वाहन चेकिंग के नाम पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर शेम शेम के नारे लगाए। बार अध्यक्ष के साथ करीब पंद्रह मिनट की बातचीत में एसएसपी ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष के लिए चालान में रियायत नहीं की जा सकती। अगर किसी पुलिसकर्मी ने खराब व्यवहार या मनमानी की है तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष घनश्याम शर्मा के साथ पहुंचे वकीलों ने एसएसपी मुनिराज से कहा कि चालान के नाम पर वकीलों का शोषण किया जा रहा है। सुबह कचहरी आते वक्त हर चौराहे पर सिपाही और होमगार्ड वाहन में डंडा मारकर रोकते हैं और बेहिसाब चालान काट देते हैं। वकीलों से अभद्रता होती है। सुबह के वक्त चेकिंग में राहत दिलाई जाए चाहें तो शाम के वक्त चेकिंग कर लें। अध्यक्ष ने वकील संतोष कुमार मौर्य का उदाहरण देकर कहा कि एक दिन में एक ही वाहन के कई चालान होना कहां की तुक है। संतोष की बाइक सचिव के कार्यालय के सामने खड़ी होती है जहां सीसीटीवी कैमरा भी लगा है। इसके बाद भी 13 जून को उनकी बाइक के लगातार छह चालान होने के मेसेज संतोष के मोबाइल पर आए। दूसरे अधिवक्ता ने बताया कि उनका हेलमेट उतरवाकर पुलिस ने उनका चालान कर दिया। जबकि पांच मिनट पहले ही उन्होंने हेलमेट लगे हुए पंप पर गाड़ी में पेट्रोल डलवाया था। उसकी फुटेज भी चेक की जा सकती है।
बार अध्यक्ष का कहना था कि खासतौर पर वकीलों को ही चेकिंग के नाम पर टारगेट किया जा रहा है। ये स्थिति काफी खराब है। कई बार हेलमेट व कागजात होने पर भी पुलिस मनमानी कमी दिखाकर चालान कर देती है। जुर्माना भी पांच हजार तक हो रहा है। इस स्थिति में विधि व्यवसाय करना मुश्किल हो गया है। कहा कि अदालत वकीलों को ऑफिसर ऑफ द कोर्ट कहकर सम्मान देती है और पुलिस उनसे अभद्रता करती है। खुद पुलिसकर्मी ही हेलमेट नहीं लगाते। ये स्थिति नहीं सुधरी तो वकीलों को अपने हक की आवाज उठाने के लिए कुछ और कदम उठाने होंगे। एसएसपी ने उनसे कहा कि किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष को चालान की कार्रवाई या समय में छूट नहीं दी जा सकती। अगर कहीं ज्यादती हुई है तो उसकी जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेंगे। बार अध्यक्ष से कहा कि ज्यादती जैसी समस्याएं लिखित में उन्हें दे दें, उनकी एसपी सिटी से जांच करा लेंगे।
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वर्दी वाले दौड़ा रहे बिन हेलमेट बाइक
बरेली। दूसरों को नसीहत देने वाली पुलिस खुद बिना हेलमेट वाहन दौड़ा रही है। सिपाही से लेकर दरोगा तक बाइक पर बेधड़क निकल रहे हैं। अमर उजाला टीम ने ऐसे ही कुछ पुलिसकर्मियों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कीं। सिविल लाइंस इलाके और अयूब खां चौकी के पास से बाइक लेकर निकलते सिविल पुलिस के कई दरोगा व सिपाही कैमरे में कैद हुए। कोई सिंगल तो कोई डबल सवारी बाइक पर बैठकर मस्ती में जा रहे थे। इनमें चीता पुलिस के सिपाही भी थे। चेकिंग अभियान की कमान संभालने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने विभागीय कैप तो लगा रखा था पर हेलमेट उनके पास भी नहीं था। इन्हें देख रहे लोगों में चर्चा थी कि दूसरों को नसीहत देने वाले खुद हेलमेट क्यों नहीं लगाते?
- वकीलों ने जिन बिंदुओं को लेकर शिकायत की है उन पर जांच कराई जाएगी। अभद्रता या मनमानी मिली तो पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई करेंगे। वाहन चेकिंग शासन के निर्देश पर चलाई जा रही है जिसका उद्देश्य हर वाहन सवार को हेलमेट और सीट बेल्ट पहनाना है। इसमें सभी पर समान कार्रवाई हो रही है, मैंने खुद खड़े होकर पुलिसकर्मियों को चालान कराए हैं। - मुनिराज जी. एसएसपी
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बार एसोसिएशन अध्यक्ष घनश्याम शर्मा के साथ पहुंचे वकीलों ने एसएसपी मुनिराज से कहा कि चालान के नाम पर वकीलों का शोषण किया जा रहा है। सुबह कचहरी आते वक्त हर चौराहे पर सिपाही और होमगार्ड वाहन में डंडा मारकर रोकते हैं और बेहिसाब चालान काट देते हैं। वकीलों से अभद्रता होती है। सुबह के वक्त चेकिंग में राहत दिलाई जाए चाहें तो शाम के वक्त चेकिंग कर लें। अध्यक्ष ने वकील संतोष कुमार मौर्य का उदाहरण देकर कहा कि एक दिन में एक ही वाहन के कई चालान होना कहां की तुक है। संतोष की बाइक सचिव के कार्यालय के सामने खड़ी होती है जहां सीसीटीवी कैमरा भी लगा है। इसके बाद भी 13 जून को उनकी बाइक के लगातार छह चालान होने के मेसेज संतोष के मोबाइल पर आए। दूसरे अधिवक्ता ने बताया कि उनका हेलमेट उतरवाकर पुलिस ने उनका चालान कर दिया। जबकि पांच मिनट पहले ही उन्होंने हेलमेट लगे हुए पंप पर गाड़ी में पेट्रोल डलवाया था। उसकी फुटेज भी चेक की जा सकती है।
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बार अध्यक्ष का कहना था कि खासतौर पर वकीलों को ही चेकिंग के नाम पर टारगेट किया जा रहा है। ये स्थिति काफी खराब है। कई बार हेलमेट व कागजात होने पर भी पुलिस मनमानी कमी दिखाकर चालान कर देती है। जुर्माना भी पांच हजार तक हो रहा है। इस स्थिति में विधि व्यवसाय करना मुश्किल हो गया है। कहा कि अदालत वकीलों को ऑफिसर ऑफ द कोर्ट कहकर सम्मान देती है और पुलिस उनसे अभद्रता करती है। खुद पुलिसकर्मी ही हेलमेट नहीं लगाते। ये स्थिति नहीं सुधरी तो वकीलों को अपने हक की आवाज उठाने के लिए कुछ और कदम उठाने होंगे। एसएसपी ने उनसे कहा कि किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष को चालान की कार्रवाई या समय में छूट नहीं दी जा सकती। अगर कहीं ज्यादती हुई है तो उसकी जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेंगे। बार अध्यक्ष से कहा कि ज्यादती जैसी समस्याएं लिखित में उन्हें दे दें, उनकी एसपी सिटी से जांच करा लेंगे।
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वर्दी वाले दौड़ा रहे बिन हेलमेट बाइक
बरेली। दूसरों को नसीहत देने वाली पुलिस खुद बिना हेलमेट वाहन दौड़ा रही है। सिपाही से लेकर दरोगा तक बाइक पर बेधड़क निकल रहे हैं। अमर उजाला टीम ने ऐसे ही कुछ पुलिसकर्मियों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कीं। सिविल लाइंस इलाके और अयूब खां चौकी के पास से बाइक लेकर निकलते सिविल पुलिस के कई दरोगा व सिपाही कैमरे में कैद हुए। कोई सिंगल तो कोई डबल सवारी बाइक पर बैठकर मस्ती में जा रहे थे। इनमें चीता पुलिस के सिपाही भी थे। चेकिंग अभियान की कमान संभालने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने विभागीय कैप तो लगा रखा था पर हेलमेट उनके पास भी नहीं था। इन्हें देख रहे लोगों में चर्चा थी कि दूसरों को नसीहत देने वाले खुद हेलमेट क्यों नहीं लगाते?
- वकीलों ने जिन बिंदुओं को लेकर शिकायत की है उन पर जांच कराई जाएगी। अभद्रता या मनमानी मिली तो पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई करेंगे। वाहन चेकिंग शासन के निर्देश पर चलाई जा रही है जिसका उद्देश्य हर वाहन सवार को हेलमेट और सीट बेल्ट पहनाना है। इसमें सभी पर समान कार्रवाई हो रही है, मैंने खुद खड़े होकर पुलिसकर्मियों को चालान कराए हैं। - मुनिराज जी. एसएसपी