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हमने जान बचा ली, अब पुलिस पहचान तो कराए
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बरेली। सड़क हादसे में घायल युवक की अस्पताल और एंबुलेंस संचालक की मदद से जान तो बच गई लेकिन होश में न होने के चलते पहचान नहीं हो पा रही है। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली।
बड़ा बाईपास पर नवदिया झादा गांव को जाने वाले रोड पर 29 जुलाई को घायल पड़े करीब 40 वर्षीय युवक को एंबुलेंस संचालक ने खुशलोक अस्पताल में भर्ती कराया। डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक, सिर में गंभीर चोट लगी होने के चलते युवक बेहोश था। इलाज शुरू होने के बाद उसकी हालत में तो सुधार हुआ लेकिन अब तक होश नहीं आया है। आईसीयू में होने के चलते दवाइयों का खर्च भी काफी हो रहा है और उसकी अब तक शिनाख्त नहीं हो सकी है। उन्होंने दो बार पुलिस को सूचना भेजी लेकिन उसकी शिनाख्त में कोई मदद नहीं मिली। सीएमओ से संपर्क किया तो उन्होंने भी जिला अस्पताल में आईसीयू और न्यूरो चिकित्सक न होने के चलते अपने पास ही भर्ती रखने को कहा। उनका कहना है कि ऐसे वह कब तक इलाज करेंगे। अस्पताल का काफी खर्च है, अगर सामाजिक संस्थाएं उसकी दवाई का खर्च ही उठा लें तो काफी मदद मिल जाएगी।
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बड़ा बाईपास पर नवदिया झादा गांव को जाने वाले रोड पर 29 जुलाई को घायल पड़े करीब 40 वर्षीय युवक को एंबुलेंस संचालक ने खुशलोक अस्पताल में भर्ती कराया। डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक, सिर में गंभीर चोट लगी होने के चलते युवक बेहोश था। इलाज शुरू होने के बाद उसकी हालत में तो सुधार हुआ लेकिन अब तक होश नहीं आया है। आईसीयू में होने के चलते दवाइयों का खर्च भी काफी हो रहा है और उसकी अब तक शिनाख्त नहीं हो सकी है। उन्होंने दो बार पुलिस को सूचना भेजी लेकिन उसकी शिनाख्त में कोई मदद नहीं मिली। सीएमओ से संपर्क किया तो उन्होंने भी जिला अस्पताल में आईसीयू और न्यूरो चिकित्सक न होने के चलते अपने पास ही भर्ती रखने को कहा। उनका कहना है कि ऐसे वह कब तक इलाज करेंगे। अस्पताल का काफी खर्च है, अगर सामाजिक संस्थाएं उसकी दवाई का खर्च ही उठा लें तो काफी मदद मिल जाएगी।
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