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गुलमोहर के यूं जाने पर छलक पड़ी आंखें..
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बरेली। पर्यावरणविद एवं बरेली कॉलेज में बॉटनी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आलोक खरे की मार्मिक फेसबुक पोस्ट ने रविवार को तमाम पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर दिया। गुलमोहर का एक पेड़, जिसे दस साल पहले उन्होंने अपने हाथों से महानगर स्थित घर के सामने लगाया था, उनकी गैरमौजूदगी में कुछ पड़ोसियों ने ही खड़े होकर कटवा दिया।
डॉ. आलोक ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा, हमारी गली का गुलमोहर.. जो हम सबसे बात करता था। नन्हा सा रोपित करने के बाद जिसे हम सबने बढ़ते हुए देखा था। जब उस पर पहली बार आए फूलों ने सबको उल्लासित किया था, उसकी तस्वीरें ली गई थीं। उसकी डालों पर चिड़ियों ने घोंसले बनाए थे। पास-पड़ोस के बुजुर्ग इस सुंदर पेड़ की रोज ही चर्चा करते थे। तपती गर्मी में न जाने कितने राहगीरों ने उसकी छांव में वक्त गुजारा, गली के तमाम लोग भी उसकी छांव में अपनी गाड़ी खड़ी करने को बेताब रहते थे। मगर बड़ा होने के कारण अब उसकी पत्तियां आसपास के घरों में गिरने लगी तो यह तथाकथित सफाईपसंद लोगों की आंखों में खटकने लगा और सब उसे हटाने पर आमादा थे। मगर उनके रहते किसी की हिम्मत नहीं पड़ी। इसी बीच दो दिन के लिए वह अपने पैतृक घर सीतापुर गए और शनिवार शाम को जब लौटे तो गुलमोहर का हरा-भरा पेड़ टुकड़ों में तब्दील मिला। गली के ही कुछ लोगों ने मेंटनेंस वालों को बुलाकर खड़े होकर गुलमोहर का पेड़ कटवा दिया। गली के लोगों का अहम जीत चुका था लेकिन डॉ. आलोक के घर में मातम छाया था। बच्चों ने गुस्सा दिखाया, कानूनी कार्रवाई करने को भी कहा लेकिन डॉ. आलोक चुप होकर रह गए कि आखिर लड़ाई भी किससे लड़ें। उन पड़ोसियों से जो हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहे।
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डॉ. आलोक ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा, हमारी गली का गुलमोहर.. जो हम सबसे बात करता था। नन्हा सा रोपित करने के बाद जिसे हम सबने बढ़ते हुए देखा था। जब उस पर पहली बार आए फूलों ने सबको उल्लासित किया था, उसकी तस्वीरें ली गई थीं। उसकी डालों पर चिड़ियों ने घोंसले बनाए थे। पास-पड़ोस के बुजुर्ग इस सुंदर पेड़ की रोज ही चर्चा करते थे। तपती गर्मी में न जाने कितने राहगीरों ने उसकी छांव में वक्त गुजारा, गली के तमाम लोग भी उसकी छांव में अपनी गाड़ी खड़ी करने को बेताब रहते थे। मगर बड़ा होने के कारण अब उसकी पत्तियां आसपास के घरों में गिरने लगी तो यह तथाकथित सफाईपसंद लोगों की आंखों में खटकने लगा और सब उसे हटाने पर आमादा थे। मगर उनके रहते किसी की हिम्मत नहीं पड़ी। इसी बीच दो दिन के लिए वह अपने पैतृक घर सीतापुर गए और शनिवार शाम को जब लौटे तो गुलमोहर का हरा-भरा पेड़ टुकड़ों में तब्दील मिला। गली के ही कुछ लोगों ने मेंटनेंस वालों को बुलाकर खड़े होकर गुलमोहर का पेड़ कटवा दिया। गली के लोगों का अहम जीत चुका था लेकिन डॉ. आलोक के घर में मातम छाया था। बच्चों ने गुस्सा दिखाया, कानूनी कार्रवाई करने को भी कहा लेकिन डॉ. आलोक चुप होकर रह गए कि आखिर लड़ाई भी किससे लड़ें। उन पड़ोसियों से जो हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहे।
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