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जांच एजेंसियों का यू टर्न, नेपाली गंगा बहादुर को दी क्लीनचिट

Tue, 03 Dec 2019 01:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 01:57 AM IST
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सुपुर्दगी में लेने के लिए परिवार को दी सूचना, दूसरे नेपाली युवक की भी होगी रिहाई
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आईबी, आर्मी इंटेलिजेंस, एटीएस, एसटीएफ और पुलिस जांच के बाद दी गई क्लीनचिट
आधार कार्ड, मूल निवास, मेडिकल सर्टिफिकेट, बैंक खातों की जांच के बाद लिया निर्णय

बरेली। पुलिस समेत कई एजेंसियों ने जांच-पड़ताल के बाद दोनों नेपाली युवकों का रिकार्ड दुरुस्त होने की पुष्टि कर दी है। कई स्तर पर हुई जांच पड़ताल में क्लीन चिट दे दिए जाने के बाद पुलिस ने दोनों को उनके परिजन को सौंपने का निर्णय कर लिया है। उनके परिजन को इस बाबत सूचना भी दे दी गई है। संभवत: मंगलवार को दोनों के परिजन उन्हें लेने बरेली पहुंचेंगे।
पिछले दिनों नेपाली युवक गंगा बहादुर को कैंट में रक्षा संपदा कार्यालय के पास से हिरासत में लिया गया था। दो आधार कार्ड होने के चलते उस पर शक गहराया था। उसके अपने आधार पर लखनऊ तोपखाना का पता लिखा था और दूसरा आधार बिहार के पते पर मोहम्मद मंजर के नाम से था। मोहम्मद मंजर के नाम वाले आधार कार्ड पर जो फोटो था, उस पर लगा फोटो भी गंगा बहादुर से मिल रहा था। इसके चलते ही उसे संदिग्ध मानते हुए पुलिस के अलावा मिलेट्री इंटेलिजेंस, आईबी, एटीएस और एसटीएफ इसकी जांच में लगी थीं। पिछले छह दिन से थाना कैंट में रखकर उससे पूछताछ की जा रही थी। अंत में सोमवार को उसे क्लीनचिट दे दी गई। वहीं, एक अन्य नेपाली युवक सरोज की मानसिक स्थिति ठीक न होने की भी पुष्टि हो गई है। सोमवार को पुलिस ने इन दोनों के परिजन से बात करके इन्हें ले जाने की सूचना दे दी है।
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क्लीनचिट देने के आधार
- गंगाबहादुर के दो बैंक खाते लखनऊ में एसबीआई की गांधीभवन और हजरतगंज शाखा में खुले थे। दोनों जीरो बैलेंस के खाते जुलाई 2019 में बैंक मैनेजर ने वेरीफाई करके खोले थे और आज तक उनमें कोई लेनदेन नहीं हुआ।
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- निवास प्रमाणपत्र और मेडिकल सर्टिफिकेट भी सही पाया गया।
- दोनों आधार कार्ड का डाटा मिलान में सही निकला। मोहम्मद मंजर के नाम से बना आधार कार्ड भी सही है, उस पर लगा फोटो गंगा बहादुर से मिलता जुलता है। वह आधार कार्ड गंगा बहादुर का नहीं है।
- उसके पास से मिली डायरी में 65 लाख नहीं, साढ़े छह लाख रुपये दान में मिलने का हिसाब किताब मिला है।
- नेपाल में रहने वाली गंगाबहादुर की मौसेरी बहन और दिल्ली में रहने वाले दोस्त ने यह पुष्टि की है कि वह पिछले दस साल से ऐसे ही घूम रहा है। रुपये इकट्ठे होने के बाद वह अपनी मां के पास जाता है। साल भर पहले उसके पिता की मौत हो चुकी है।


जांच में दोनों नेपाली युवकों के बारे में सारी सूचनाएं दुरुस्त निकली हैं। उनके पास से मिले आधार कार्ड, मूल निवास, मेडिकल सर्टिफिकेट समेत सारे दस्तावेज सही निकले हैं। दोनों के परिजन को उन्हें ले जाने के लिए सूचना दे दी गई है।
- अशोक कुमार सिंह, सीओ सिटी
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