{"_id":"632389eebb35a36ead62d877","slug":"court-report-on-amin-the-police-want-to-scare-the-judge-bareilly-news-bly49770169","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर सीओ व इंस्पैक्टर के खिलाफ कार्यवाही का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर सीओ व इंस्पैक्टर के खिलाफ कार्यवाही का आदेश
सार
नवाबगंज के भाजपा विधायक डॉ. एमपी आर्य के अस्पताल का अवैध गेट बंद कराने का आदेश तामील कराने पहुंचे कोर्ट अमीन पर एफआईआर दर्ज करने के मामले को अदालत ने पुलिस की ओर से न्यायाधीश को डराने की कोशिश और न्यायपालिका पर हमला बताया है। अदालत ने आईजी को इस बारे में आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश देते हुए अगली तारीख 26 सितंबर तय की है।ये था घटनाक्रमइलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधायक डॉ. एमपी आर्य के अस्पताल का अवैध गेट बंद कराकर दीवार का निर्माण कराने का आदेश दिया था। जब पुलिस और प्रशासन के तमाम अधिकारी मौजूद थे तो मात्र न्यायालय के अमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना न्यायालय को डराने जैसा है।कठोर टिप्पणियां...जिला पुलिस प्रशासन ने जिस साहस का परिचय इस प्रकरण में कोर्ट अमीन पर एफआईआर दर्ज कराने मेें दिया, यदि ऐसे ही साहस का प्रयोग अपराधियों के खिलाफ कर पाते तो कुछ वांछित परिणाम हासिल होते।
विज्ञापन
विस्तार
बरेली। नवाबगंज के भाजपा विधायक डॉ. एमपी आर्य के अस्पताल का अवैध गेट बंद कराने का आदेश तामील कराने पहुंचे कोर्ट अमीन पर एफआईआर दर्ज करने के मामले को अदालत ने पुलिस की ओर से न्यायाधीश को डराने की कोशिश और न्यायपालिका पर हमला बताया है। इस मामले में आईजी को इंस्पेक्टर और सीओ के खिलाफ कार्रवाई के आदेश के साथ डीजीपी और मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा गया है।
यह आदेश बृहस्पतिवार को लघु वाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने जारी किया। इसमें उन्होंने कहा है कि पुलिस अगर ऐसा आचरण करेगी तो भारत जैसा लोकतांत्रिक देश में पुलिस स्टेट स्थापित हो जाएगा और पुलिस को स्वतंत्रता मिल जाएगी कि वह जिसके खिलाफ चाहे जैसा व्यवहार करे। पुलिस ने अपनी शक्तियों का घोर दुरुपयोग कर न्यायालय के आदेश के अनुक्रम में काम कर रहे कोर्ट अमीन के खिलाफ न्यायपालिका को डराने के उद्देश्य से रिपोर्ट दर्ज की गई जो कानून का घोर उल्लंघन है। पुलिस के अधिकारियों ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर यह काम किया है।
उन्होंने कहा है कि कोर्ट अमीन पर एफआईआर दर्ज करने वाले नवाबगंज के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक कुमार कम्बोज और सीओ चमन सिंह चावड़ा के खिलाफ आईपीसी की धारा 217 और 218 के तहत दंडनीय अपराध बनता है। अदालत ने आईजी को इस बारे में आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश देते हुए अगली तारीख 26 सितंबर तय की है।
विज्ञापन
ये था घटनाक्रम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधायक डॉ. एमपी आर्य के अस्पताल का अवैध गेट बंद कराकर दीवार का निर्माण कराने का आदेश दिया था। इसी के तहत 29 अगस्त को कोर्ट अमीन राकेश चंद्र नवाबगंज गए थे। दोनों पक्षों और उनके वकीलों की मौजूदगी मेें गेट बंद कर दीवार बना दी गई। इसी की प्रतिक्रिया में अस्पताल के मैनेजर पंकज कुमार ने अमीन और उनके अर्दली पर दीवार के निर्माण के दौरान लाइनमैन को बुलाकर अस्पताल की बिजली कटवा देने और विरोध पर मारपीट करने पर आमादा हो जाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने पंकज की तहरीर पर कोर्ट अमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसके बाद कोर्ट अमीन ने अदालत में दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दीवार निर्माण के वक्त सीओ नवाबगंज, एसडीएम फरीदपुर , तहसीलदार नवाबगंज और भारी पुलिस मौजूद था। उन्हें लाइन काटे जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है न उन्होंने लाइन कटवाई। न ही इतने अधिकारियों की मौजूदगी में मारपीट करने का कोई प्रश्न उठता है। उन्होंने सिर्फ अदालत के आदेश का पालन कराया था।
सवाल... जब इतने अफसर मौजूद
थे तो सिर्फ अमीन पर रिपोर्ट क्यों
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में अमीन न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने गए थे। इस दौरान मौके पर एसडीएम फरीदपुर, सीओ नवाबगंज, तहसीलदार नवाबगंज और भारी पुलिस बल भी था। जब पुलिस और प्रशासन के तमाम अधिकारी मौजूद थे तो मात्र न्यायालय के अमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना न्यायालय को डराने जैसा है।
कठोर टिप्पणियां...
जिला पुलिस प्रशासन ने जिस साहस का परिचय इस प्रकरण में कोर्ट अमीन पर एफआईआर दर्ज कराने मेें दिया, यदि ऐसे ही साहस का प्रयोग अपराधियों के खिलाफ कर पाते तो कुछ वांछित परिणाम हासिल होते।
देखने में यह आता है कि जिला प्रशासन के अधिकारी अहंकार में रहने के कारण अदालत के आदेश का अनुपालन कराना उचित नहीं समझते। इलाहाबाद हाईकोर्ट के समय-समय पर पारित आदेशों का भी अनुपालन प्रशासनिक अधिकारी तब तक नहीं करते, जब तक कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही नहीं की जाती।
विज्ञापन
यह आदेश बृहस्पतिवार को लघु वाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने जारी किया। इसमें उन्होंने कहा है कि पुलिस अगर ऐसा आचरण करेगी तो भारत जैसा लोकतांत्रिक देश में पुलिस स्टेट स्थापित हो जाएगा और पुलिस को स्वतंत्रता मिल जाएगी कि वह जिसके खिलाफ चाहे जैसा व्यवहार करे। पुलिस ने अपनी शक्तियों का घोर दुरुपयोग कर न्यायालय के आदेश के अनुक्रम में काम कर रहे कोर्ट अमीन के खिलाफ न्यायपालिका को डराने के उद्देश्य से रिपोर्ट दर्ज की गई जो कानून का घोर उल्लंघन है। पुलिस के अधिकारियों ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर यह काम किया है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा है कि कोर्ट अमीन पर एफआईआर दर्ज करने वाले नवाबगंज के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक कुमार कम्बोज और सीओ चमन सिंह चावड़ा के खिलाफ आईपीसी की धारा 217 और 218 के तहत दंडनीय अपराध बनता है। अदालत ने आईजी को इस बारे में आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश देते हुए अगली तारीख 26 सितंबर तय की है।
विज्ञापन
ये था घटनाक्रम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधायक डॉ. एमपी आर्य के अस्पताल का अवैध गेट बंद कराकर दीवार का निर्माण कराने का आदेश दिया था। इसी के तहत 29 अगस्त को कोर्ट अमीन राकेश चंद्र नवाबगंज गए थे। दोनों पक्षों और उनके वकीलों की मौजूदगी मेें गेट बंद कर दीवार बना दी गई। इसी की प्रतिक्रिया में अस्पताल के मैनेजर पंकज कुमार ने अमीन और उनके अर्दली पर दीवार के निर्माण के दौरान लाइनमैन को बुलाकर अस्पताल की बिजली कटवा देने और विरोध पर मारपीट करने पर आमादा हो जाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने पंकज की तहरीर पर कोर्ट अमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसके बाद कोर्ट अमीन ने अदालत में दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दीवार निर्माण के वक्त सीओ नवाबगंज, एसडीएम फरीदपुर , तहसीलदार नवाबगंज और भारी पुलिस मौजूद था। उन्हें लाइन काटे जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है न उन्होंने लाइन कटवाई। न ही इतने अधिकारियों की मौजूदगी में मारपीट करने का कोई प्रश्न उठता है। उन्होंने सिर्फ अदालत के आदेश का पालन कराया था।
सवाल... जब इतने अफसर मौजूद
थे तो सिर्फ अमीन पर रिपोर्ट क्यों
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में अमीन न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने गए थे। इस दौरान मौके पर एसडीएम फरीदपुर, सीओ नवाबगंज, तहसीलदार नवाबगंज और भारी पुलिस बल भी था। जब पुलिस और प्रशासन के तमाम अधिकारी मौजूद थे तो मात्र न्यायालय के अमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना न्यायालय को डराने जैसा है।
कठोर टिप्पणियां...
जिला पुलिस प्रशासन ने जिस साहस का परिचय इस प्रकरण में कोर्ट अमीन पर एफआईआर दर्ज कराने मेें दिया, यदि ऐसे ही साहस का प्रयोग अपराधियों के खिलाफ कर पाते तो कुछ वांछित परिणाम हासिल होते।
देखने में यह आता है कि जिला प्रशासन के अधिकारी अहंकार में रहने के कारण अदालत के आदेश का अनुपालन कराना उचित नहीं समझते। इलाहाबाद हाईकोर्ट के समय-समय पर पारित आदेशों का भी अनुपालन प्रशासनिक अधिकारी तब तक नहीं करते, जब तक कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही नहीं की जाती।