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हत्या के दोषी तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास
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पीलीभीत। स्पेशल जज (गैंगस्टर एक्ट) विवेक कुमार ने 11 साल पुराने पूरनपुर क्षेत्र के गांव बंजरिया के जन्मेजय हत्याकांड में तीन आरोपी भाइयों को दोषी पाकर आजीवन कारावास और प्रत्येक को 55000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि साक्ष्य के अभाव में उन्हें गैंगस्टर एक्ट के मामले में दोषमुक्त कर दिया गया।
पूरनपुर कोतवाली में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार ग्राम बंजरिया निवासी अजय कुमार मिश्रा के भाई जन्मेजय और गांव के भूपाली ने तीन जनवरी 2009 को साथ बैठकर पहले शराब पी। इसके बाद उनके बीच गाली गलौज हुई। भूपाली अपने घर लौट आया, जबकि जन्मेजय गांव के ही चंद्रभाल के घर चला गया। वहां चंद्रभाल और उसके भाई सिपाहीलाल और उसके पुत्र दिनेश, अशोक और संतोष ने जन्मेजय को पकड़ लिया। रात में 11 बजे जन्मेजय से मारपीट की गई। गांव के अरुण कुमार मिश्रा और शिव अवतार मिश्रा ने जन्मेजय के भाई अजय कुमार को पूरी घटना बताई। वह दूसरे भाई संजय के साथ चंद्रभाल के घर पहुंचे। वहां उन्होंने जन्मेजय के बारे में जानकारी की। दूसरे दिन चार जनवरी 2009 की सुबह गांव के मथुराप्रसाद और सीताराम मिश्रा ने बताया कि बीती रात वह खेत से इंजन लेकर आ रहे थे तब उन्हें चंद्रभाल, सिपाहीलाल, दिनेश अशोक और संतोष रास्ते में मिले। वे सभी जन्मेजय को बेहोशी की हालत में कहीं ले जा रहे थे। 6 जनवरी 2009 को गांव के बाहर स्कूल के समीप जन्मेजय का शव झाड़ियों में मिला।
पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया। पुलिस ने हत्या की धाराओं के साथ ही गैंगस्टर एक्ट में भी आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान चंद्रभाल की मौत हो गई, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। दूसरे आरोपी सिपाही लाल के मुकदमे में 12 जनवरी 2011 को निर्णय पारित किया गया और न्यायालय ने उन्हें सजा सुना दी थी। उनके मुकदमे की अलग से सुनवाई हुई। अभियोजन अधिकारी अखिलेश कुमार ने राज्य सरकार की ओर से इस मामले में पैरवी की। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट विवेक कुमार ने दिनेश, अशोक और संतोष पर मंगलवार को फैसला सुनाया। तीनों आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। साक्ष्य के अभाव में तीनों को गैंगस्टर एक्ट के मामले में दोषमुक्त किया।
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पूरनपुर कोतवाली में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार ग्राम बंजरिया निवासी अजय कुमार मिश्रा के भाई जन्मेजय और गांव के भूपाली ने तीन जनवरी 2009 को साथ बैठकर पहले शराब पी। इसके बाद उनके बीच गाली गलौज हुई। भूपाली अपने घर लौट आया, जबकि जन्मेजय गांव के ही चंद्रभाल के घर चला गया। वहां चंद्रभाल और उसके भाई सिपाहीलाल और उसके पुत्र दिनेश, अशोक और संतोष ने जन्मेजय को पकड़ लिया। रात में 11 बजे जन्मेजय से मारपीट की गई। गांव के अरुण कुमार मिश्रा और शिव अवतार मिश्रा ने जन्मेजय के भाई अजय कुमार को पूरी घटना बताई। वह दूसरे भाई संजय के साथ चंद्रभाल के घर पहुंचे। वहां उन्होंने जन्मेजय के बारे में जानकारी की। दूसरे दिन चार जनवरी 2009 की सुबह गांव के मथुराप्रसाद और सीताराम मिश्रा ने बताया कि बीती रात वह खेत से इंजन लेकर आ रहे थे तब उन्हें चंद्रभाल, सिपाहीलाल, दिनेश अशोक और संतोष रास्ते में मिले। वे सभी जन्मेजय को बेहोशी की हालत में कहीं ले जा रहे थे। 6 जनवरी 2009 को गांव के बाहर स्कूल के समीप जन्मेजय का शव झाड़ियों में मिला।
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पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया। पुलिस ने हत्या की धाराओं के साथ ही गैंगस्टर एक्ट में भी आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान चंद्रभाल की मौत हो गई, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। दूसरे आरोपी सिपाही लाल के मुकदमे में 12 जनवरी 2011 को निर्णय पारित किया गया और न्यायालय ने उन्हें सजा सुना दी थी। उनके मुकदमे की अलग से सुनवाई हुई। अभियोजन अधिकारी अखिलेश कुमार ने राज्य सरकार की ओर से इस मामले में पैरवी की। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट विवेक कुमार ने दिनेश, अशोक और संतोष पर मंगलवार को फैसला सुनाया। तीनों आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। साक्ष्य के अभाव में तीनों को गैंगस्टर एक्ट के मामले में दोषमुक्त किया।
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