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बरेली की निर्भया को मिला इंसाफ, दो आरोपियों को फांसी की सजा
Fri, 10 Jan 2020 07:37 PM IST
बरेली ब्यूरो
बरेली, संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली, संवाद न्यूज एजेंसी
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 07:37 PM IST
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Court order
- फोटो : सोशल मीडिया
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12 साल की बच्ची की दरिंदगी के बाद हत्या का मामला
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने तीन मिनट में किया सजा का एलान
बरेली। 29 जनवरी 2016 को दरिंदगी का शिकार हुई 12 साल की बच्ची को शुक्रवार को इंसाफ मिल गया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुनील कुमार यादव ने दरिंदगी और हत्या में दोषी पाए गए मुरारी लाल और उमाकांत को फांसी की सजा सुनाई। दोपहर एक बजकर सात मिनट पर न्यायाधीश कोर्ट में आए और तीन मिनट में सजा का एलान कर दिया। दिल्ली के निर्भया जैसे कांड में पीड़िता के परिवार के साथ ही आम लोगों को भी ऐसी ही सख्त सजा की उम्मीद थी।
नवाबगंज के एक गांव के रहने वाले मृतका के पिता ने दर्ज एफआईआर में कहा था कि 29 जनवरी 16 को वह एक शादी में गया हुआ था। उसकी बारह साल की बेटी अपनी मां के साथ दोपहर 12 बजे खेत पर गन्ने की पताई लेने गई थी। पताई लेकर वो घर आ गई, लेकिन मां के कहने पर दोबारा पताई लेने खेत गई। इस बार वो खेत से लौटकर घर नहीं आई। परिजनों ने पूरे गांव में बच्ची को ढूंढा, लेकिन वो नहीं मिली। गांव के बच्चों से शाम चार बजे पता चला कि बच्ची एक लाही के खेत में पड़ी है। गांव वालों के साथ परिजन मौके पर पहुंचे तो देखा कि बेटी अर्धनग्न अवस्था में मृत पड़ी थी। बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर लकड़ी से चोटें पहुंचाई गई थी। आरोपी उमाकांत और मुरारी ने 30 जनवरी 16 को गांव के रामचंद्र के पास पहुंच कर मृतका से दुष्कर्म की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उनसे गलती हो गई है। उन्हें अब पुलिस से बचा लो। राम चंद्र ने यह बात नवाबगंज के तत्कालीन निरीक्षक आरके सिंह को बताई थी।
अभियोजन की ओर से सरकारी वकील रीत राम राजपूत ने मृतका के मां-बाप, दादी समेत कुल ग्यारह गवाह पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से भी एक गवाह पेश किया गया। कोर्ट ने अभियुक्त मुरारी लाल और उमा कांत को दोषी ठहराते हुए कोर्ट नेफांसी की सजा का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों अभियुक्तों को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि इनकी मौत न हो जाए। कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों में से हर एक पर 2 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की रकम में से 2 लाख 20 हजार रुपए पीड़िता के माता पिता को बतौर पुर्नवास देने का आदेश दिया।
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विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने तीन मिनट में किया सजा का एलान
29 जनवरी 2016 को नवाबगंज क्षेत्र में की गई थी बच्ची की हत्या
बरेली। 29 जनवरी 2016 को दरिंदगी का शिकार हुई 12 साल की बच्ची को शुक्रवार को इंसाफ मिल गया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुनील कुमार यादव ने दरिंदगी और हत्या में दोषी पाए गए मुरारी लाल और उमाकांत को फांसी की सजा सुनाई। दोपहर एक बजकर सात मिनट पर न्यायाधीश कोर्ट में आए और तीन मिनट में सजा का एलान कर दिया। दिल्ली के निर्भया जैसे कांड में पीड़िता के परिवार के साथ ही आम लोगों को भी ऐसी ही सख्त सजा की उम्मीद थी।
नवाबगंज के एक गांव के रहने वाले मृतका के पिता ने दर्ज एफआईआर में कहा था कि 29 जनवरी 16 को वह एक शादी में गया हुआ था। उसकी बारह साल की बेटी अपनी मां के साथ दोपहर 12 बजे खेत पर गन्ने की पताई लेने गई थी। पताई लेकर वो घर आ गई, लेकिन मां के कहने पर दोबारा पताई लेने खेत गई। इस बार वो खेत से लौटकर घर नहीं आई। परिजनों ने पूरे गांव में बच्ची को ढूंढा, लेकिन वो नहीं मिली। गांव के बच्चों से शाम चार बजे पता चला कि बच्ची एक लाही के खेत में पड़ी है। गांव वालों के साथ परिजन मौके पर पहुंचे तो देखा कि बेटी अर्धनग्न अवस्था में मृत पड़ी थी। बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर लकड़ी से चोटें पहुंचाई गई थी। आरोपी उमाकांत और मुरारी ने 30 जनवरी 16 को गांव के रामचंद्र के पास पहुंच कर मृतका से दुष्कर्म की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उनसे गलती हो गई है। उन्हें अब पुलिस से बचा लो। राम चंद्र ने यह बात नवाबगंज के तत्कालीन निरीक्षक आरके सिंह को बताई थी।
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अभियोजन की ओर से सरकारी वकील रीत राम राजपूत ने मृतका के मां-बाप, दादी समेत कुल ग्यारह गवाह पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से भी एक गवाह पेश किया गया। कोर्ट ने अभियुक्त मुरारी लाल और उमा कांत को दोषी ठहराते हुए कोर्ट नेफांसी की सजा का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों अभियुक्तों को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि इनकी मौत न हो जाए। कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों में से हर एक पर 2 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की रकम में से 2 लाख 20 हजार रुपए पीड़िता के माता पिता को बतौर पुर्नवास देने का आदेश दिया।
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