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पटेल कॉलेज के प्रधानाचार्य राधेलाल के दो हत्यारों को उम्रकैद
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धौरा टांडा में हुई सनसनीखेज वारदात पर अदालत ने 24 साल बाद सुनाया फैसला, दो अभियुक्त बरी
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प्रधानाचार्य पद के लिए शुरू हुई थी जंग, नकल में पकड़ा गया छात्र और उसका पिता भी था आरोपी
बरेली। धौराटांडा के पटेल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य पद के लिए 25 साल पहले शुरू हुई जिस जंग में आखिरकार तत्कालीन प्रधानाचार्य राधेलाल को सरेआम चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया गया था, अदालत ने बुधवार को उस चर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसमें एक उस वक्त प्रधानाचार्य पद का दूसरा दावेदार है जबकि दूसरा अपने बेटे को नकल में पकड़े जाने पर दुश्मनी मान बैठा था। दो आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
थाना भोजीपुरा में आठ अगस्त 1995 को राधेलाल की हत्या के बाद उनके भतीजे रामकुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिसके मुताबिक राधेलाल पटेल इंटर कॉलेज में 1986 से लेक्चरर ग्रेड में काम कर रहे थे। उस वक्त तत्कालीन प्रधानाचार्य का रिटायरमेंट भी नजदीक था और जल्द ही दूसरे प्रधानाचार्य की नियुक्ति की जानी थी। राधेलाल के साथ कॉलेज का एक शिक्षक भी प्रधानाचार्य पद का दावेदार था। बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले तत्कालीन प्रधानाचार्य ने अवकाश ले लिया तो प्रबंधन ने राधेलाल को केंद्र व्यवस्थापक नियुक्त कर दिया। इसी दौरान कॉलेज के सचल दल ने कस्बे के ही बाबूराम के बेटे नरेंद्र को परीक्षा में नकल करते पकड़ा तो काफी बवाल हुआ। पहले तो नरेंद्र ने ही कई और लड़कों के साथ कॉलेज में हंगामा किया, फिर उसके पिता ने भी राधेलाल के साथ गालीगलौज कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। राधेलाल के खिलाफ पुलिस चौकी धौरेरा में फर्जी रिपोर्ट भी दर्ज करा दी।
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इस घटना के बाद बाबूराम की प्रधानाचार्य पद के दूसरे दावेदार से घनिष्ठ मित्रता हो गई। बाद में तत्कालीन प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद जब प्रबंध कमेटी ने राधेलाल को नया प्रधानाचार्य बनाया तो उनके प्रतिद्वंद्वी ने यह कहना शुरू कर दिया कि राधेलाल ने उनका हक छीना है। प्रबंध कमेटी को भी यह देखने की धमकी दी कि वह कैसे पद पर काम करते रहेंगे। आठ अगस्त 1995 की दोपहर करीब एक बजे कॉलेज से लौट रहे राधेलाल की बाबूराम, नरेंद्र पाल ने कुछ और लोगों के साथ चाकू से गोदकर हत्या कर दी।
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पुलिस ने इस मामले में बाबूराम, नरेंद्र पाल, मुश्ताक, छोटा, सदाकत और नूर खां के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। नरेंद्र पाल के किशोर अपचारी होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्यायालय को भेज दिया गया। छोटा की दौरान मुकदमा मौत हो गई। सदाकत और नूर खां की पत्रावली भी अलग कर दी गई। अदालत ने बुधवार को अभियुक्त मुश्ताक और सदाकत को बरी करते हुए बाबूराम समेत दो को उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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प्रधानाचार्य पद के लिए शुरू हुई थी जंग, नकल में पकड़ा गया छात्र और उसका पिता भी था आरोपी बरेली। धौराटांडा के पटेल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य पद के लिए 25 साल पहले शुरू हुई जिस जंग में आखिरकार तत्कालीन प्रधानाचार्य राधेलाल को सरेआम चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया गया था, अदालत ने बुधवार को उस चर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसमें एक उस वक्त प्रधानाचार्य पद का दूसरा दावेदार है जबकि दूसरा अपने बेटे को नकल में पकड़े जाने पर दुश्मनी मान बैठा था। दो आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
थाना भोजीपुरा में आठ अगस्त 1995 को राधेलाल की हत्या के बाद उनके भतीजे रामकुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिसके मुताबिक राधेलाल पटेल इंटर कॉलेज में 1986 से लेक्चरर ग्रेड में काम कर रहे थे। उस वक्त तत्कालीन प्रधानाचार्य का रिटायरमेंट भी नजदीक था और जल्द ही दूसरे प्रधानाचार्य की नियुक्ति की जानी थी। राधेलाल के साथ कॉलेज का एक शिक्षक भी प्रधानाचार्य पद का दावेदार था। बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले तत्कालीन प्रधानाचार्य ने अवकाश ले लिया तो प्रबंधन ने राधेलाल को केंद्र व्यवस्थापक नियुक्त कर दिया। इसी दौरान कॉलेज के सचल दल ने कस्बे के ही बाबूराम के बेटे नरेंद्र को परीक्षा में नकल करते पकड़ा तो काफी बवाल हुआ। पहले तो नरेंद्र ने ही कई और लड़कों के साथ कॉलेज में हंगामा किया, फिर उसके पिता ने भी राधेलाल के साथ गालीगलौज कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। राधेलाल के खिलाफ पुलिस चौकी धौरेरा में फर्जी रिपोर्ट भी दर्ज करा दी।
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इस घटना के बाद बाबूराम की प्रधानाचार्य पद के दूसरे दावेदार से घनिष्ठ मित्रता हो गई। बाद में तत्कालीन प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद जब प्रबंध कमेटी ने राधेलाल को नया प्रधानाचार्य बनाया तो उनके प्रतिद्वंद्वी ने यह कहना शुरू कर दिया कि राधेलाल ने उनका हक छीना है। प्रबंध कमेटी को भी यह देखने की धमकी दी कि वह कैसे पद पर काम करते रहेंगे। आठ अगस्त 1995 की दोपहर करीब एक बजे कॉलेज से लौट रहे राधेलाल की बाबूराम, नरेंद्र पाल ने कुछ और लोगों के साथ चाकू से गोदकर हत्या कर दी।
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पुलिस ने इस मामले में बाबूराम, नरेंद्र पाल, मुश्ताक, छोटा, सदाकत और नूर खां के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। नरेंद्र पाल के किशोर अपचारी होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्यायालय को भेज दिया गया। छोटा की दौरान मुकदमा मौत हो गई। सदाकत और नूर खां की पत्रावली भी अलग कर दी गई। अदालत ने बुधवार को अभियुक्त मुश्ताक और सदाकत को बरी करते हुए बाबूराम समेत दो को उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।