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Lakhimpur News: अब दुधवा टाइगर रिजर्व में छोटे बिलाव के लिए विकसित होंगे कॉरीडोर, रिसर्च टीम कर रही अध्ययन

Mon, 09 Jan 2023 06:40 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 09 Jan 2023 06:40 AM IST
सार

शोधकर्ता दुधवा टाइगर रिजर्व में छोटे बिलाव के लिए संरक्षण और संवर्धन के उपायों पर अध्ययन कर रहे हैं। दुधवा में उन स्थलों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां पर बिलाव की संख्या ज्यादा है।

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corridors will be developed for small cats in Dudhwa Tiger Reserve Lakhimpur khiri
छोटा बिलाव (लैपर्ड कैट) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी में दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ-साथ छोटे बिलाव के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी कॉरीडोर विकसित होंगे। दुधवा में बाघ, तेंदुआ, फिशिंग कैट समेत छोटे बिलाव का भी बेहतर प्राकृतिक वास है। इनकी आबादी के संरक्षण और संवर्धन के लिए दुधवा में एक रिसर्च टीम इन दिनों अध्ययन कर रही है।

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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की विंग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलॉजिकल के शोधकर्ता पिछले कई दिनों से दुधवा टाइगर रिजर्व में छोटे बिलाव के लिए संरक्षण और संवर्धन के उपायों पर अध्ययन कर रहे हैं। शोधकर्ताओं की टीम दुधवा में उन स्थलों को चिह्नित कर रही हैं, जहां पर बिलाव की संख्या ज्यादा है। छोटे बिलाव पूरे दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल में भ्रमण कर सकें, इसके लिए कॉरीडोर तलाशे जा रहे हैं ताकि उन पर छोटे बिलाव आसानी से सुरक्षित आवागमन कर सकें। साथ ही प्रजनन कर कर आबादी बढ़ा सकें।

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इन क्षेत्रों में पाए जाते हैं बिलाव 

दुधवा टाइगर रिजर्व के दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर  सेंक्चुअरी, कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) के अलावा बफरजोन की मैलानी और भीरा रेंज में भी छोटे बिलाव की पर्याप्त संख्या है। इनके संरक्षण को लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व में पहली बार गंभीर प्रयास शुरू हुए हैं। 

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दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी संजय पाठक का मानना है कि यह शोध छोटे बिलाव के संरक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने में काफी कारगर साबित होगा। शोधकर्ताओं की सिफारिश के अनुसार दुधवा में छोटे बिलाव के लिए पुराने कॉरीडोर को सुदृढ़ किया जाएगा और कुछ नए कॉरीडोर भी विकसित किए जाएंगे।

छोटे बिलाव प्रजाति में आते हैं ये जीव

छोटे बिलाव प्रजाति में फिशिंग कैट, जंगल कैट, लैपर्ड कैट, रस्टी स्पाटेड कैट समेत यह सभी जीव दुधवा टाइगर रिजर्व में पाए जाते हैं। इसमें इनकी सबसे अधिक संख्या दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुअरी जंगल में पाई जाती है। 

दुधवा टाइगर रिजर्व के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक / एफडी संजय पाठक ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व में छोटे बिलाव के संरक्षण और संवर्धन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल संस्था शोध कर रही है। शोधकर्ताओं की सिफारिश के अनुसार दुधवा में छोटे बिलाव के संरक्षण और संवर्धन के लिए कॉरीडोर विकसित किए जाएंगे।

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