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कोरोना ने छीन ली इंजीनियरिंग की नौकरी, अब करनी पड़ रही बैंक की तैयारी
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Corona medicine
- फोटो : अमर उजाला
नोएडा में सवा साल काम करने के बाद महामारी ने डूबा दिया पूरा कॅरियर
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गुरुवार को रोजगार छिन जाने से एक युवक ने कर ली थी आत्महत्या
बरेली। कोरोना संक्रमण के बाद से रोगगार के अवसरों पर संकट है। तमाम नौजवान बेरोजगार हो गए हैं। बीटेक करने के बाद नोएडा में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में इंजीनियर युवक को मार्च में लॉकडाउन लागू होने पर घर भेज दिया गया। उसके बाद से रोजगार हाथ नहीं आया। अब वह बैंक में नौकरी के लिए तैयारी कर रहा है। कोरोना महामारी के चलते शादी-ब्याह में डेकोरेशन का काम बंद हो जाने से बेरोजगार हुए डेकोरेटर रिंकू ने गुरुवार को ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली थी।
जागृतिनगर के रहने वाले हर्षित सक्सेना का कॅरियर कोरोना ने डूबो दिया है। वर्ष 2018 में गाजियाबाद के एक इंस्टीट्यूट से बीटेक करने के बाद उन्हें नोएडा की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सिविल इंजीनियर की नौकरी मिल गई थी। ठीक तनख्वाह थी। रोजगार के साथ अनुभव भी बढ़ रहा था। कंपनी में करीब सवा साल काम करने के बाद कोरोना का ऐसा कहर बरपा कि कंपनी ने यह कहकर घर भेज दिया कि जल्द ही दोबारा बुला लेंगे। कई महीने हो गए लेकिन कंपनी से कोई खबर नहीं आई। उनका कहना है कि पिता एलआईसी में है। काफी पैसा खर्च करके उन्होंने इंजीनियर बनाया था लेकिन अब जहां से चले थे, वापस वहीं आकर खड़े हो गए हैं। समझ में नहीं आ रहा कि क्या करें। हर्षित का कहना है कि अब उन्होंने बैंक की तैयारी शुरू कर दी है ताकि किसी तरह से दोबारा रोजगार मिल सके।
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गुरुवार को रोजगार छिन जाने से एक युवक ने कर ली थी आत्महत्या बरेली। कोरोना संक्रमण के बाद से रोगगार के अवसरों पर संकट है। तमाम नौजवान बेरोजगार हो गए हैं। बीटेक करने के बाद नोएडा में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में इंजीनियर युवक को मार्च में लॉकडाउन लागू होने पर घर भेज दिया गया। उसके बाद से रोजगार हाथ नहीं आया। अब वह बैंक में नौकरी के लिए तैयारी कर रहा है। कोरोना महामारी के चलते शादी-ब्याह में डेकोरेशन का काम बंद हो जाने से बेरोजगार हुए डेकोरेटर रिंकू ने गुरुवार को ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली थी।
जागृतिनगर के रहने वाले हर्षित सक्सेना का कॅरियर कोरोना ने डूबो दिया है। वर्ष 2018 में गाजियाबाद के एक इंस्टीट्यूट से बीटेक करने के बाद उन्हें नोएडा की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सिविल इंजीनियर की नौकरी मिल गई थी। ठीक तनख्वाह थी। रोजगार के साथ अनुभव भी बढ़ रहा था। कंपनी में करीब सवा साल काम करने के बाद कोरोना का ऐसा कहर बरपा कि कंपनी ने यह कहकर घर भेज दिया कि जल्द ही दोबारा बुला लेंगे। कई महीने हो गए लेकिन कंपनी से कोई खबर नहीं आई। उनका कहना है कि पिता एलआईसी में है। काफी पैसा खर्च करके उन्होंने इंजीनियर बनाया था लेकिन अब जहां से चले थे, वापस वहीं आकर खड़े हो गए हैं। समझ में नहीं आ रहा कि क्या करें। हर्षित का कहना है कि अब उन्होंने बैंक की तैयारी शुरू कर दी है ताकि किसी तरह से दोबारा रोजगार मिल सके।
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