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अप्रैल निकाल गए तो जून तक खुद घट जाएगा कोरोना
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बरेली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जिस तेजी के साथ रफ्तार पकड़ रही है, उसने चिकित्सकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चिकित्सकों का कहना है कि हर्ड इम्युनिटी के जरिए कोरोना को पछाड़ना फिलहाल कल्पना करने से ज्यादा कुछ नहीं है। लोगों को उसी एहतियात के साथ कोरोना का मुकाबला करना चाहिए जैसा कि उन्होंने पिछले साल किया था। अगर अप्रैल में लोग कोरोना से बचाव करने में कामयाब हो जाते हैं तो जून तक खुद ब खुद कोरोना का खतरा टल सकता है।
चिकित्सकों के मुताबिक अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता और वैक्सीन से प्रतिरक्षित होने के साथ कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने ज्यादा बेहतर कोरोना से बचाव का फिलहाल और कोई विकल्प नहीं है। संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका फरवरी में ही जता दी गई थी। मार्च से शासन और प्रशासन ने लोगों को आगाह करना शुरू कर दिया था लेकिन लोगों की बेपरवाही से संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। चिकित्सकों का मानना है कि अप्रैल में जिस रफ्तार से संक्रमण बढ़ा है, अगर उसी रफ्तार से आगे भी बढ़ता रहा तो जून के आखिर तक लोगों में हर्ड इम्युनिटी बनने की आशंका है। हर्ड इम्युनिटी से संक्रमण की रफ्तार तेजी से घटेगी। लेकिन इस बीच तमाम लोगों के संक्रमित होने का खतरा है लिहाजा अप्रैल में लोगों को अपने बचाव के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है।
15 दिन स्थिर हो कोरोना की रफ्तार
तभी कोई अनुमान लगाना मुमकिन
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक वायरस की रफ्तार के संबंध में तभी कुछ कहा जा सकता है जब कम से कम 15 दिन लगभग एक जैसी ही स्थिति दिखाई दे। पिछले दिनों कोरोना के केस लगभग शून्य हो गए थे लेकिन अब हफ्ते भर में ही छह गुना संक्रमित बढ़ गए हैं। कोरोना वायरस लगातार स्वरूप बदल रहा है जिस पर शोध चल रहे हैं। निष्कर्ष मिलने तक कुछ कहना कठिन है। राहत की बात इतनी ही है कि पिछले साल रिकवरी की दर कम थी जो इस बार करीब 99 फीसदी है। अगर लोग एहतियात बरतें तभी वायरस से फिर राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
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जिले के करीब 30-35 लाख लोगों में संक्रमित होने के बाद एंटीबॉडी बने तो हर्ड इम्युनिटी विकसित हो सकती है मगर यह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हजारों लोगों के लिए खतरे की घंटी होगी। - डॉ. विनोद पागरानी, हड्डी रोग विशेषज्ञ
रात के कर्फ्यू से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। अब लॉकडाउन ही लोगों को बचा सकता है। पिछले साल अगर लॉकडाउन नहीं होता तो हालात बेकाबू होते। इस बार सख्त लॉकडाउन जरूरी है। - डॉ. अतुल अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ
दो और पेड कोविड अस्पताल बनाने की तैयारी
कोरोना संक्रमण की तेज होती रफ्तार के बीच जिले के सभी कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड फुल होने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी नितीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को दो और अस्पतालों को पेड कोविड अस्पताल बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। उन्होंने बताया कि संक्रमण की रोकथाम, मरीजों को बेहतर इलाज और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर पूरा जोर दिया जा रहा है। लोगों को कोविड से बचाव के नियमों का पालन करना चाहिए।
संक्रमण की बढ़ती रफ्तार पर काबू पाने के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है। जो बाहर से आ रहे हैं, वे बगैर जांच कराएं घर न जाएं। हमारी सभी टीमें सक्रिय हैं। कन्टेनमेंट जोन में संदिग्धों की तलाश की जा रही है। रोज साढ़े तीन हजार से ज्यादा सैंपलिंग की जा रही है। - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ
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चिकित्सकों के मुताबिक अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता और वैक्सीन से प्रतिरक्षित होने के साथ कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने ज्यादा बेहतर कोरोना से बचाव का फिलहाल और कोई विकल्प नहीं है। संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका फरवरी में ही जता दी गई थी। मार्च से शासन और प्रशासन ने लोगों को आगाह करना शुरू कर दिया था लेकिन लोगों की बेपरवाही से संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। चिकित्सकों का मानना है कि अप्रैल में जिस रफ्तार से संक्रमण बढ़ा है, अगर उसी रफ्तार से आगे भी बढ़ता रहा तो जून के आखिर तक लोगों में हर्ड इम्युनिटी बनने की आशंका है। हर्ड इम्युनिटी से संक्रमण की रफ्तार तेजी से घटेगी। लेकिन इस बीच तमाम लोगों के संक्रमित होने का खतरा है लिहाजा अप्रैल में लोगों को अपने बचाव के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है।
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15 दिन स्थिर हो कोरोना की रफ्तार
तभी कोई अनुमान लगाना मुमकिन
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक वायरस की रफ्तार के संबंध में तभी कुछ कहा जा सकता है जब कम से कम 15 दिन लगभग एक जैसी ही स्थिति दिखाई दे। पिछले दिनों कोरोना के केस लगभग शून्य हो गए थे लेकिन अब हफ्ते भर में ही छह गुना संक्रमित बढ़ गए हैं। कोरोना वायरस लगातार स्वरूप बदल रहा है जिस पर शोध चल रहे हैं। निष्कर्ष मिलने तक कुछ कहना कठिन है। राहत की बात इतनी ही है कि पिछले साल रिकवरी की दर कम थी जो इस बार करीब 99 फीसदी है। अगर लोग एहतियात बरतें तभी वायरस से फिर राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
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जिले के करीब 30-35 लाख लोगों में संक्रमित होने के बाद एंटीबॉडी बने तो हर्ड इम्युनिटी विकसित हो सकती है मगर यह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हजारों लोगों के लिए खतरे की घंटी होगी। - डॉ. विनोद पागरानी, हड्डी रोग विशेषज्ञ
रात के कर्फ्यू से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। अब लॉकडाउन ही लोगों को बचा सकता है। पिछले साल अगर लॉकडाउन नहीं होता तो हालात बेकाबू होते। इस बार सख्त लॉकडाउन जरूरी है। - डॉ. अतुल अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ
दो और पेड कोविड अस्पताल बनाने की तैयारी
कोरोना संक्रमण की तेज होती रफ्तार के बीच जिले के सभी कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड फुल होने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी नितीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को दो और अस्पतालों को पेड कोविड अस्पताल बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। उन्होंने बताया कि संक्रमण की रोकथाम, मरीजों को बेहतर इलाज और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर पूरा जोर दिया जा रहा है। लोगों को कोविड से बचाव के नियमों का पालन करना चाहिए।
संक्रमण की बढ़ती रफ्तार पर काबू पाने के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है। जो बाहर से आ रहे हैं, वे बगैर जांच कराएं घर न जाएं। हमारी सभी टीमें सक्रिय हैं। कन्टेनमेंट जोन में संदिग्धों की तलाश की जा रही है। रोज साढ़े तीन हजार से ज्यादा सैंपलिंग की जा रही है। - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ